मण्डलायुक्त जयन्त नार्लिकर ने विकास भवन सभागार में खरीफ मौसम में फसल अवशेष जलाने से उत्पन्न हो रहे प्रदूषण की रोकथाम के लिए मण्डल के विभिन्न अधिकारियों के साथ बैठक करते हुए निर्देश दिया

गोरखपुर 4 नवम्बर 19। मण्डलायुक्त जयन्त नार्लिकर ने विकास भवन सभागार में खरीफ मौसम में फसल अवशेष जलाने से उत्पन्न हो रहे प्रदूषण की रोकथाम के लिए मण्डल के विभिन्न अधिकारियों के साथ बैठक करते हुए निर्देश दिया कि जो भी किसान पराली/फसल अवशेष जलाते हुए पाये जाते है उन्हें किसी भी प्रकार की सरकारी सहायता/अनुदान उपलब्ध न कराने की कार्यवाही की जाये तथा यदि किसान बार बार पराली/फसल अवशेष जलाते हुए पाये जाय तो उनके उपर जर्माना के साथ एफ.आई.आर. भी कराया जाये। उन्होंने सीडीओ महराजगंज को निर्देश दिया कि नौतनवा, निचलौल, फरेन्दा एंव महराजगंज सदर में आगामी एक माह के लिए मजिस्ट्रेटों की तैनाती कर फसल अवशेष जलाने वालों पर निगरानी रखी जाये तथा फसल अवशेष जलाने पर जिलाधिकारी एंव मुख्य विकास अधिकारी कड़ी कार्यवाही सुनिश्चित करें।
मण्डलायुक्त ने यह भी निर्देश दिया कि जिला स्तर पर दूसरे प्रान्तों से आने वाली कम्बाइन मशीनों की जांच की जाये, बिना बाइटर रिपर के कोई कम्बाइन मशीन न चले, यदि कोई मशीन बिना रिपर के चले तो उसे तत्काल सील किया जाये। कृषि विभाग किसान गोष्ठियों के माध्यम से किसानों में फसल अवशेष जलाने से होने वाले नुकसान के बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी दे। मण्डलायुक्त ने परिवहन विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया कि ज्यादा से ज्यादा सी0एन0जी0 आटो को लाइसेंस निर्गत किया जाये तथा प्रदूषण प्रमाण पत्र की जांच भी की जाये। उन्होंने सभी जिला कृषि अधिकारियों को निर्देशित किया कि 10 नवम्बर तक कृषि यन्त्रों का वितरण सुनिश्चित किया जाये अन्यथा उनके विरूद्ध कड़ी कार्यवाही की जायेगी।
मण्डलायुक्त ने पी0डब्लू0डी0 के अधिकारियों को निर्देश दिया कि एन0जी0टी0 के नियमों के अनुसार सड़क निर्माण हेतु बने हाटमिक्स प्लान्ट का संचालन हो। उन्होंने नगरनिगम एंव जीडीए के अधिकारियों को निर्देश दिया कि कही भी कूड़ा न जलाया जाये, यदि कोई कूड़ा जलाते पाया जाये उसपर एफ0आई0आर0 कराया जाये तथा 15 दिनों के अन्दर निर्माण कार्यों की नीति भी तैयार कर ली जाये। इसके अतिरिक्त पानी के छिड़काव के लिए एस0टी0पी0 के पानी का प्रयोग किया जाये। उन्होंने उद्योग एंव गीडा के अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रदूषण वाले उद्योगों का संचालन न हो तथा गीडा प्रदूषण रोकने के लिए तीन दिनों के अन्दर अपनी कार्य योजना प्रस्तुत करें।
बैठक में संयुक्त निदेशक कृषि ने बताया कि पराली/फसल अवशेष जलाने से प्रतिवर्ष लगभग एक करोड़ 12 लाख रू0 के बराबर की यूरिया नष्ट होती है तथा खेतों में जैविक तत्वों को भी काफी नुकसान होता है। बैठक में अपर आयुक्त प्रशासन अजयकान्त सैनी, मुख्य विकास अधिकारी गोरखपुर एंव महराजगंज, सहित चारों जनपदों के अपर जिलाधिकारी गण एंव अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।


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