भारत के प्रथम राष्ट्रपति डा0 राजेन्द्र प्रसाद के जन्म दिवस पर महापौर ने किया माल्यार्पण
गोरखपुर : महापौर सीताराम जायसवाल ने रेलवे स्टेशन के पास यातायात चैराहे पर स्थित डा0 राजेन्द्र प्रसाद की प्रतिमा पर गणमान्य नागरिकों एवं व्यापारी ,नेताओं के साथ माल्यार्पण किया। महापौर सीताराम जायसवाल ने अपने उद्बोधन में कहा कि डा0 राजेन्द्र प्रसाद बचपन से ही मेधावी एवं कर्मठ व्यक्ति थे। भारतीय राष्ट्रीय मंच पर महात्मा गांधी के आगमन ने डा0 राजेन्द्र प्रसाद को बहुत प्रभावित किया जिसके कारण गांधी जी ने राजेन्द्र प्रसाद को स्वयं सेवको के साथ चम्पारण आने के लिए कहा। गांधी जी के समर्पण भाव एवं साहस को देखते हुए डा0 राजेन्द्र प्रसाद का दृष्टिकोण बदल गया तथा आजादी की लड़ाई में पूर्ण योगदान देने लगे साथ ही असहयोग आन्दोलन में सक्रिय रूप से भाग लिया गया। 15 जनवरी, 1934 को जब बिहार में एक विनाशकारी भू-कम्प आया तब वह जेल में थे। जेल से रिहा होने के दो दिन बाद ही भू-कम्प पीड़ितो की सहायता हेतु धन जूटाने व राहत कार्यो में लग गये। जुलाई 1946 में भारत के संविधान के गठन की जिम्मेदारी देते डा0 राजेन्द्र प्रसाद को अध्यक्ष नियुक्त किया गया। इन्होने बहुत सादगी जीवन व्यतीत करते हुए देश के उज्जवल भविष्य के लिए निरन्तर कार्य करते रहे तथा भारत का प्रथम राष्ट्रपति भी चुना गया जिसपर इन्होने काफी सूझ-बूझ से कार्य किया तथा दूसरों के लिए एक नयी मिसाल बने। डा0 राजेन्द्र प्रसाद जी को सर्वोच्च नागरिक सम्मान ''भारत रत्न'' से सम्मानित किया गया। इनकी ईमानदारी और कार्यकुशलता, सादगी जीवन की जितनी भी प्रशंसा की जाए वह कम है। ऐसे महापुरूष को नमन करते हुए आज जो व्यापारी संगठनों एवं गणमान्य नागरिकों द्वारा यहां उपस्थित होकर माल्यार्पण किया गया है। जिसके लिए हम सभी के आभारी हैं।
उक्त अवसर पर महापौर के साथ सत्य प्रकाश सिंह ''मुन्ना'', पार्षद बब्लू प्रसाद गुप्ता, शत्रुघन मद्धेशिया, कैप्टन वी0एन0 सिंह, डा0 एखलाख आलम, सुधीर झा, सुभाष प्रसाद, शेषनाथ चैरसिया, डा0 संजय सिंह, के0एल0 गुप्ता, जलेशर ठाकुर, सुनील जायसवाल, उमेश शर्मा, रामविनय, अनिल मौर्या आदि भारी संख्या में लोग उपस्थित रहे।
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