गलत रिकवरी जारी करने पर बैंक प्रबंधक ने न्यायालय में मांगी मांफी

 


प्रयागराज, 06 फरवरी (वार्ता) चोरी गई कार के लोन की रिकवरी के लिए गलत तरीके से रिकवरी सर्टिफिकेट (आरसी) जारी करने पर बैंक ऑफ बड़ौदा मुंडेरा ब्रांच के वरिष्ठ शाखा प्रबंधक को उच्च न्यायाय में माफी मांगनी पड़ी।
न्यायालय ने शाखा प्रबंधक को चेतावनी दी है कि वह भविष्य में इस प्रकार की गलती न/न करें और ग्राहकों के साथ नियमानुसार तरीके से ही कार्रवाई करें । अदालत में याचिका दाखिल होने के बाद बैंक ने रिकवरी सर्टिफिकेट वापस ले लिया था। इसलिए न्यायालय ने चेतावनी देते हुए याचिका का निस्तारण कर दिया।
कीडगंज के मनोज अग्रवाल की याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति एसके गुप्ता और न्यायमूर्ति पीयूष अग्रवाल की खंडपीठ ने आज यह आदेश दिया । याची के अधिवक्ता अयंक मिश्रा और विवेक कुमार श्रीवास्तव का कहना था की याची ने 2011 में बैंक ऑफ बड़ौदा की मुंडेरा ब्रांच से कार खरीदने के लिए पांच लाख लोन लिया था। अगस्त 2011 में उसने अपनी कार रजिस्टर्ड कराई और 5 दिसम्बर 2011 को उसकी कार घर से बाहर चोरी हो गई थी । कार का बीमा यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी से कराया था । उसने कार चोरी की एफआईआर दर्ज कराई । साथ ही बैंक, बीमा कंपनी, आरटीओ को पत्र लिखकर कार चोरी होने के बारे में सूचना दी ।
बीमा कंपनी से क्लेम का भुगतान करने की मांग की । उसका क्लेम अभी निर्णीत नहीं हुआ है। मगर इस बीच 16 सितम्बर 2019 को बैंक ने 480000 का रिकवरी सर्टिफिकेट जारी कर दिया। इसके खिलाफ उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की की गई। अदालत ने पहली याचिका बिना हस्तक्षेप के खारिज़ कर दी तो दुबारा याचिका दाखिल कर अधिवक्ताओं का कहना था की ऋण रिकवरी कानून के तहत बैंक द्वारा की गई कार्रवाई गलत है,लिहाजा रिकवरी सर्टिफिकेट को रद्द किया जाए ।
अदालत ने शाखा प्रबंधक को तलब कर लिया । अदालत में हाजिर हुए सीनियर मैनेजर संतोष कुमार ने स्वीकार किया कि रिकवरी सर्टिफिकेट गलत जारी हो गया था । जिसे बैंक ने वापस ले लिया है। उन्होंने इस गलती के लिए अदालत में बिना शर्त माफी भी मांगी । अदालत ने माफी स्वीकार करते हुए शाखा प्रबंधक को चेतावनी दी है कि भविष्य में इस प्रकार से कार्य न/न किया जाए और ग्राहकों के साथ नियमानुसार तरीके से ही पेश आए।


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