कमलेश पाठक आगरा जेल में स्थानांतरित
इटावा, 17 मार्च (वार्ता) सनसनीखेज दोहरे हत्याकांड के आरोपी समाजवादी पार्टी (सपा) एमएलसी कमलेश पाठक समेत सभी सात आरोपियो मे से पांच को उत्तर प्रदेश की इटावा जेल से अन्य जेलों में स्थानांतरित कर दिया गया है।
इटावा जिला जेल के अधीक्षक राजकिशोर सिंह ने मंगलवार को बताया कि प्रशासनिक आधार पर सपा एमएलसी कमलेश पाठक को आगरा सेंट्रल जेल,भाई संतोष पाठक को फिरोजाबाद जिला जेल, रामू पाठक को उरई जेल, भगवताचार्य कथावाचक राजेश शुक्ला और कमलेश पाठक के साले आशीष दुबे को आगरा जिला कारागार भेजा गया है जबकि गनर अवनीश और चालक छोटू को इटावा जिला जेल मे ही रखा गया है ।
गौरतलब है कि औरैया के कोतवाली इलाके के नारायणपुर में मंदिर की जमीन पर अवैध कब्जे को लेकर सपा एमएलसी कमलेश पाठक और अधिवक्ता मंजुल चौबे के बीच पुराना विवाद था । आरोप है कि 15 मार्च को कमलेश पाठक अपने भाई और समर्थकों के साथ आए और मारपीट के बाद गोलीबारी करने लगे। इस दौरान अधिवक्ता मंजुल व उनकी बहन सुधा की गोली लगने से मौत हो गई।
सपा एमएलसी और उनके भाइयों का पुराना आपराधिक इतिहास रहा है। कोतवाली में तीनों भाइयों की हिस्ट्रीशीट खुली है, अकेले कमलेश पाठक के खिलाफ अलग अलग धाराओं में करीब 32 मुकदमे दर्ज हैं। क्षेत्र में उनकी गिनती बाहुबलियों में होती है और सपा की सरकार में दबदबा कायम रहने के कारण उनके खिलाफ कोई भी बोलने की हिम्मत नहीं जुटाता था। उनपर रासुका समेत कई मामले दर्ज हो चुके हैं और भाइयों पर भी सेवन क्रिमिनल एक्ट के मामले दर्ज हैं।
सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव के साथ राजनीति शुरू करने वाले कमलेश पर 1974 में चुनाव के दौरान हत्या आदि धाराओं में मुकदमे दर्ज हुए थे। राजनीति में उतरे कमलेश पाठक पर 20 साल की उम्र में हत्या का मुकदमा दर्ज हो गया था।
इसके बाद राजीनीति में कद बढने के साथ मुकदमे भी बढ़ते गए। 1984 के विधानसभा चुनाव में मतपेटी लूटकर कुएं में फेकने का भी मुकदमा दर्ज हुआ था । 1989 में जनता दल के विधायक रहते हुए कमलेश ने फफूंद स्टेशन पर असम मेल रोक ली थी, जिस पर रेलवे ने उनपर मुकदमा लिखवाया था। 2008 में बसपा सरकार में इंजीनियर हत्याकांड के समय आंदोलन व आगजनी में उनके खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमे दर्ज करने के साथ पुलिस ने रासुका की कार्रवाई भी की थी।
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