प्रसूति केंद्र किया गया बंद,जनता परेशान
झांसी 21 अप्रैल (वार्ता) कोरोना संकट से जूझते उत्तर प्रदेश के झांसी में बिना किसी कारण सरकारी आदेश का हवाला देते हुए सरकारी प्रसूति केंद्र को बंद कर दिया गया है जिससे क्षेत्र की जनता को बड़ी कठिनाइयों को सामना करना पड़ रहा है।
यहां प्रेमनगर थानाक्षेत्र के नगरा इलाके की तकरीबन दो से ढाई लाख की आबादी की सुविधा को ध्यान में रखकर बनाया गया जिला प्रसूति केंद्र बंद कर दिया गया है और इसके पीछे सरकारी आदेश होने की बात कही जा रही है। प्रसूति केंद्र को बंद करने के कारणों के बारे में पूछे जाने पर मंगलवार को मुख्य चिकित्सा अधिकारी जी के निगम ने कहा कि कोरोना महामारी के चलते सरकारी आदेश के तहत यह प्रसूति केंद्र बंद कर दिया गया है। इस आपातकालीन स्थिति में जिले के सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) बंद कर दिये गये हैं और किसी भी महिला को प्रसूति संबंधी आपातस्थिति में जिला अस्पताल में प्रसूति संबंधी सुविधाएं मुहैया करायी जा रहीं है।
प्रूसति केंद्र को बंद करने के पीछे की सही वजह नही बताकर वह इधर उधर की बात करते नजर आये। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन की स्थित में किसी महिला के साथ आपातस्थिति हो तो वह एंबुलेंस की 108 और 102 की सुविधाएं ले सकती है।
दो से ढाई लाख की आबादी वाले बड़े क्षेत्र के सरकारी प्रसूति केंद्र बंद होने से गर्भवती महिलाओं और बच्चों को अनिवार्य रूप से किये जाने वाले टीकाकरण को भी बंद कर दिया गया है। इससे इस क्षेत्र के लोगों को बड़ी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है और अपने ही क्षेत्र में उपलब्ध सुविधा को छोड़ लोगों को लॉकडाउन में पांच से छह किलोमीटर दूर जिला अस्पताल के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
इस संबंध में जब जिलाधिकारी आंद्रा वामसी से बात की गयी तो उन्होंने मामले के बारे मे अनभिज्ञता जतायी लेकिन साफ किया कि लॉकडाउन में किसी तरह की आपातकालीन सेवाओं को बंद नहीं किया जा सकता । यह बात शुरूआत से ही साफ है। गर्भवती महिला और बच्चों का टीकाकरण आपातकालीन सेवाएं हैं और यह रोकी नहीं जा सकती हैं। इन केंद्रों में ओपीडी नहीं चलेगी लेकिन किसी तरह की आपातसेवाओं को रोका नहीं जा सकता।
जिलाधिकारी से जब प्रसूति केंद्र के पूरी तरह से बंद होने की बात कही गयी तो उन्होंने मामले को देखने का आश्वासन दिया। इस पूरे मामले में बेहद हैरान करने वाला यह तथ्य प्रकाश मे ंआया कि प्रशासन कि बिना जानकारी के सरकारी आदेशों का हवाला देकर सीएमओ ने अपने स्तर से प्रसूति केंद्र को बंद करा दिया। दूसरी ओर सूत्रों के अनुसार केंद्र पर काम करने वाले संविदाकर्मियों का वेतन भी नहीं दिया गया है और केंद्र को बंद करने के पीछे एक यह भी कारण हैं।
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