हैदराबाद से 10 दिन में गोरखपुर पहुंचा युवक, दुकान खुली दिखते ही खरीदी साइकिल


          गोरखपुर:कोरोना से बचाव के लिए देश भर में लागू लॉकडाउन के बीच रोजी-रोटी गंवा चुके मजदूरों का अपने-अपने जिले में जाने का सिलसिला लगातार जारी है। मजदूर सैकड़ों किलोमीटर का फासला पैदल, साइकिल, ट्रक या फिर जो मिल जाए उससे तय कर रहे हैं। ऐसे ही एक युवक 10 दिन पहले पैदल और ट्रकों से यात्रा करते हुए मंगलवार को गोरखपुर पहुंचा। यहां लॉकडाउन में ढील की वजह से उसे जो पहली साइकिल की दुकान खुली दिखाई दी वहां से साढ़े चार हजार रुपए में साइकिल खरीद ली।
महराजगंज के परतावल क्षेत्र स्थित अपने गांव के लिए वह इसी साइकिल से बढ़ चला। 20 वर्षीय सोमनाथ हैदराबाद में पेंट-पालिश का काम करता था। लॉकडाउन की वजह से उसका काम छूट गया। आमदनी बंद हो जाने और खाने-पीने का कोई इंतजाम न होने के चलते एक दिन सोमनाथ का सब्र जवाब दे गया। वह पैदल ही अपने घर जाने के लिए निकल पड़ा। उसके साथ गोरखपुर का रहने वाला मनोज भी चल पड़ा। दोनों हैदराबाद से पैदल चले। रास्‍ते में कहीं-कहीं कोई ट्रकवाला मिल गया तो उसे कुछ रुपए देकर आगे बढ़ते चले गए। मंगलवार को वे गोरखपुर पहुंचे। यहां सोमनाथ ने खुली दुकान देखी तो बचाकर रखे साढ़े चार हजार रुपयों से अपने लिए साइकिल खरीदी और मनोज पैदल ही गोरखपुर के कूड़ाघाट क्षेत्र स्थित अपने घर के लिए बढ़ चला।
प्रशासन दूसरे राज्‍यों से ट्रेनों-बसों से आ रहे लोगों को तो जगह-जगह क्‍वारंटीन कर रहा है लेकिन सोमनाथ और मनोज जैसे लोग जो छिपते-छिपाते बिना किसी सूचना या रिकार्ड के आ रहे हैं उनके बारे में कुछ कह पाना मुश्किल है। हालांकि कई गांवों या मोहल्‍लों में लोग कोरोना को लेकर सजग हैं। ऐसे लोगों के पहुंचते ही प्रशासन को सूचना दे रहे हैं लेकिन ऐसे कितने मामलों में धरातल पर एक्‍शन हो पा रहा है और लोगों को सफलतापूर्वक क्‍वारंटीन किया जा रहा है इस बारे में जिम्‍मेदारों के लिए भी पुख्‍ता तौर पर बता पाना मुश्किल है। 


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