कोरोना वायरस के स्रोत का पता लगायेगा डब्ल्यूएचओ
जिनेवा/नयी दिल्ली 02 मई (वार्ता) विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने कोरोना वायरस ‘सार्स-कोव-2’ के प्रयोगशाला में बनाये जाने के सिद्धांतों को खारिज करते हुए कहा है कि वह इसके स्रोत का पता लगायेगा ताकि दुबारा यह जानवरों से इंसानों में न आ सके।
इस वायरस के कारण दुनिया भर में फैली महामारी ‘कोविड-19’ पर शुक्रवार को डब्ल्यूएचओ की नियमित प्रेसवार्ता में अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य नियमन आपदा समिति की रिपोर्ट जारी की गयी। समिति ने इस वायरस के स्रोत का पता लगाने की सिफारिश की है। इस संबंध में पूछे जाने पर डब्ल्यूएचओ के स्वास्थ्य आपदा कार्यक्रम के कार्यकारी निदेशक डॉ. माइकल जे. रेयान ने कहा कि समिति की इस सिफारिश पर अमल किया जायेगा हालाँकि उन्होंने कुछ वैज्ञानिकों के वायरस के प्रयोगशाला में बने होने के सिद्धांत को खारिज करते हुये कहा यह वायरस प्राकृतिक है।
डॉ. रेयान ने कहा, “वुहान में वायरस के मूल के बारे में हमने बार-बार कई वैज्ञानिकों की राय सुनी है जिन्होंने इस वायरस और संक्रमण फैलने के क्रम का अध्ययन किया है। हम पूरी तरह आश्वस्त हैं कि यह वायरस प्राकृतिक है। इस वायरस के प्राकृतिक आश्रय (जिस जीव में यह प्राकृतिक रूप से पाया जाता है) का पता लगाना महत्वपूर्ण है ताकि हम वायरस को और बेहतर समझ सकें - हम यह समझ सकें कि उस जीव के संपर्क में इंसान कैसे आया और इस क्रम में वायरस से इंसान किस प्रकार संक्रमित हो गया।”
उन्होंने कहा कि इस अध्ययन का उद्देश्य जन स्वास्थ्य के अनिवार्य उपाय करना है ताकि ऐसा दुबारा कहीं भी न हो सके। उन्होंने बताया कि डब्ल्यूएचओ इस पर काम कर रहा है और स्थानीय प्रशासन को इस अध्ययन में पूरा समर्थन देगा।
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