पिता ने मौत को दस दिन तक रोके रखा


            महराजगंज:कोरोना से बचाव के लिए देश भर में लागू लॉकडाउन के बीच रोज एक से बढ़कर एक मन विचलित कर देने वाली खबरें आ रही हैं। ऐसा ही एक वाकया महराजगंज में गुरुवार को पेश आया जब एक बेटा जालंधर से दस दिन साइकिल चलाकर अपने बीमार पिता के पास पहुंचा लेकिन उसके पहुंचने के चंद मिनटों के अंदर ही पिता ने दम तोड़ दिया। इस घटना ने गांववालों को हिलाकर रख दिया है। गांव में हर जुबां पर बस यही बात है कि बेटे को अंतिम बार देखने के लिए इस पिता ने मौत को भी इंतजार करा दिया। 
वह एक सप्ताह से कोमा में थे। लॉकडाउन में जालंधर में फंसा उनका बेटा साइकिल से दस दिन में घर पहुंचा। वह दूर से ही बीमार पिता को आवाज देता रहा। शरीर में कुछ हरकत हुई, लेकिन कुछ ही देर में उनकी मौत हो गई। पिता को अपने  सामने मौत के आगोश में जाता देख बेटा बेसुध हो गया। वह वहीं गिर गया और देर तक पड़ा रहा। लोगों ने उसे समझा-बुझाकर क्वारंटीन सेंटर भेजा। पिता के अंतिम संस्कार में भी वह दूर-दूर रहा।
घुघली क्षेत्र के मंगलपुर पटखौली निवासी भोला चौधरी कुछ महीने पहले रोजी-रोटी कमाने जालंधर गए  थे। परिवार की माली हालत ठीक करने के लिए पिता ने उन्‍हें जाने की इजाजत दी थी। लेकिन कोरोना के संक्रमण ने ऐसा कहर बरपाया कि भोला के मंसूबों पर पानी फिर गया। जालंधर में किराए के मकान में कैद भोला को रोटी के लाले पड़ गए। बेहाल भोला ने जालंधर से साइकिल से ही घर लौटने के लिए हिम्मत जुटाई। 
वह निकल पड़ा। दिन भर साइकिल चलाता और जहां रात हो जाती वहीं कहीं जगह देखकर रुक जाता। इसी दौरान चार दिन पहले उसके 74 वर्षीय पिता छांगुर चौधरी हाई बीपी के कारण कोमा में चले गए। प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र घुघली से लेकर मेडिकल कालेज तक इलाज हुआ लेकिन कोई सुधार न होने पर परिवारीजन उन्हें वापस घर लेकर आए।
गुरुवार सुबह अपनी यात्रा के दसवें दिन भोला साइकिल चलाते हुए गांव पहुंचा। घर पर दूर से ही पिता की हालत देख फफक पड़ा। जोर-जोर से बाबूजी-बाबूजी की आवाज लगाने लगा। पिता के शरीर में थोड़ी हरकत हुई, मानो बेटे से मिल लेना चाहते हों लेकिन मौत ने मोहलत नहीं दी। उसी समय उनकी मौत हो गई। जिसने भी इस पूरे वाकये को देखा उसकी आंखें नम हो गईं। गांव में हर जुबान पर पिता-पुत्र के प्रेम की चर्चा है। लोग कह रहे हैं कि छांगुर चौधरी ने अंतिम वक्‍त में बेटे के इंतजार में मौत को रोके रखा। बेटा के आते ही मौत ने उन्‍हें अपने आगोश में ले लिया। 
पिता के अंतिम संस्कार में दूर-दूर रहा भोला
पिता के अंतिम संस्कार में दूर-दूर रहने वाले भोला ने खुद क्वारंटीन रहने की इच्छा जताई। प्रधान भरत शुक्ल ने भोला को लोगों से दूर रखते हुए उसके पिता के अंतिम संस्कार के बाद क्वारंटीन में शिफ्ट करा दिया। 


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