नैनोटोक्नोलाजी से मानवता का विकास तथा भविष्य में नैनो युग की शुरूआत


 संवाददाता गोरखपुर।
 कोविड-19 के इस कठिन दौर में सबको एक साथ लेकर सीखने की प्रक्रिया को बनाये रखने के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग ही एक मात्र उपाय है । जिससे शिक्षा और शोध के कार्य को आगे ले जाया जा सकता है । इस परिपेक्षय में सेण्ट एण्ड्रयूज कालेज , गोरखपुर के भौतिक विभाग ने अपनी भूमिका को प्रदर्शित करते हुये दो दिवसीय इण्टरनेशनल वेबिनार जिसका शीर्षक " रीसेन्ट डेवलपमेन्ट इन मटेरियल साइन्स ' का आयोजन किया।
 2 जून को इस वेबिनार का उद्घाटन प्रो. जे. के. लाल, प्राचार्य सेण्ट ऐण्ड्रयूज कालेज ने किया । प्रो. लाल ने कहा कि मानव उत्पति से ही मटेरियल साइन्स की उपयोगिता लोगों के समक्ष में आने लगी थी । मटेरियल साइन्स का उपयोग इलेक्ट्रानिक से लेकर मेडिकल उपकरण , सौर ऊर्जा और सेन्सर में है । इस पेचिनार के सचिव डॉ.शमशाद अहमद खान ने इस  कानफेन्स के बारे में विस्तृत जानकारी दी । उन्होने कहा कि इस वेबिनार का मुख्य उद्देश्य दुनिया के शोधकर्ताओं को जो मानवजाति की भलाई के लिए मटेरियल साइन्स में शोध कर रहे है , उनको एक प्लेटफार्म पर इकट्ठा करके उनके विचारों से सबकों लाभान्वित करना है । इस वेबिनार के मुख्य वक्ता एवं मुख्य अतिथि भारत के जाने माने भौतिक विद तथा एम.जे.जी. रूहेलखण्ड विश्वविद्यालय बरेली के पूर्व कुलपति प्रो. मुशाहीद हुसैन थे । उनके व्याख्यान का शीर्षक " रिसेन्ट टेन्ड्रस इन नैनोटोक्नोलॉजी " था । उन्होंने कहा कि नैनोटोक्नालॉजी से ही मानवता का विकास तथा भविष्य में नैनो युग की शुरूआत सम्भव है । सिगल वाल्य सी. एन.टी.का उपयोग सेन्सर तकनीक में किया जा रहा है । इस वेबिनार के संयोजक डॉ.ए. के. निषाद और सह - संयोजक डॉ.हरिओम गुप्ता ने सभी मुख्य वक्ताओं का परिचय तथा वेबिनार में सम्मिलित हुए सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया । इस वेयिनार के दो सत्र आज हुए । पहले सत्र का संचालन प्रो.शान्तनु रस्तोगी ने किया । प्रो.एस.एन. तिवारी ने अपने व्याख्यान में कहा कि ' लिक्विड क्रिस्टल का उपयोग डिस्पले डिवाइसेज , हाइड्रोलिक क्लच और ब्रेक थर्मामीटरस आदि में किया जाता है । इन्होंने कोविड -19 में लिक्विड क्रिस्टल की उपयोगिता के बारे में विस्तृत रूप से जानकारी दी । इस सत्र के दूसरे वक्ता प्रो. एम.शहीर अख्तर , साऊथ कोरिया ने अपने व्याख्यान में कहा कि आज का युग सौर ऊर्जा का है । सौर ऊर्जा से ही ऊर्जा की कमी को समाप्त किया जा सकता है । इस सत्र के तीसरे वक्ता डॉ.अवशीश कुमार , अमेठी विश्वविद्यालय , नोएडा ने अपने व्याख्यान में कहा कि ' कार्यन वेस नैनो मटेरियल ( कार्यन नैनो टयूब तथा ग्रेफिन ) का उपयोग मानव जाति की भलाई के लिए सेन्सर , ऊर्जा नियंत्रक , पेन्ट और मेडिकल उपकरणों , कन्सर्टकसन मटेरियल में किया जा रहा है । इस सत्र के चौथे वक्ता प्रो.राऊद बिन अजूज , जर्मनी , ने अपने व्याख्यान में कहा कि ' बिना मटेरियल साइन्स के उपयोग किए दैनिक जीवन में भी सम्भव नहीं है । इस सत्र के पाचवे वक्ता प्रो.लोकेन्द्र कुमार , इलाहाबाद विश्वविद्यालय , इलाहाबाद ने अपने व्याख्यान में कहा कि आज का युग हाईब्रिड परयोसफिट मटेरियल का है , जिसका उपयोग आधुनिक सोलर सेल में किया जा रहा है । इस सत्र के छठवें वक्ता डॉ.रामीना हुसैन , जामिआ मिल्लिया इस्लामियां , न्यू दिल्ली ने अपने व्याख्यान में कहा कि कार्यन पालिमर का उपयोग आर्गनिक एल ई. डी. तथा अन्य प्रकार के मेडिकल उपकरणों में किया जा सकता है । इस सत्र के सातवें वक्ता डॉ . नीरज शुक्ला , एन.आई.टी.पटना ने अपने व्याख्यान में कहा कि ' कार्बन अलोट्रोप्रा का प्रयोग टयून सर्किट में किया जा सकता है । इस सत्र के आठवें वक्ता डॉ.त्यूडमिला ब्रोन्स्टीन , इंडियाना यूनिवर्सिटी , बीओमिंगतो , यू. एस. ए. ने अपने व्याख्यान में कहा मैगनिटिक नैनो क्रिस्टल्स का उपयोग Li आयन बैट्री तथा अन्य स्टोरेज डिवाइस में किया जा सकता है । इस वेबिनार के सचिव डॉ. शमशाद अहमद खान ने बताया कि आज का कार्यक्रम बहुत ही उपयोगी रहा । आज के इस वैबीनार में डॉ सी पी गुप्ता , डॉ.पी. पी.श्रीवास्तव , डॉ. अर्चना श्रीवास्तव ,  , डॉ . शोएब अहमद अंसारी , डॉ . रवि प्रकाश त्रिपाठी , इम्तियाज हुसैन खान और आदित्य श्रीवास्तव ने अपनी पूरी सहभागिता दी ।


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