न्यायपंचायत नाम वाले गांव में समस्याओं की भरमार, अपनी बदहाली की कहानी बता रहा गाव 

 कभी क्षेत्र में अपनी अलग पहचान रखने वाला महुअवा देवरिया गांव जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा से आज कई समस्याओं जूझ रहा हैं। हालांकि, बदलते वक्त के साथ इस गांव में कई विकास कार्य हुए हैं। इसके बावजूद गांव में न तो कोई उच्च विद्यालय है और न ही कोई डिस्पेंसरी या बड़ा अस्पताल है और शवदाह गृह, विवाह भवन व पुस्तकालय का ही निर्माण नही हुआ है। गाव में कुछ ऐसे परिवार है जो आज भी खुले में शौच जाने को विवश है तो कुछ परिवार राशनकार्ड बनवाने, पेंशन के लिए आज भी कार्यालयों का चक्कर लगा रहे हैं, कई परिवारो को आज भी घर बनाने की जगह नसीब नही हो सकी है। गांव के बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए दूर-दराज के स्कूल में जाना पड़ता है। गांव में जो सरकारी जमीन है, उसे दबंगों ने अवैध रूप से कब्जा कर लिया है। गंदे पानी की निकासी का उचित प्रबंध नहीं होने के कारण हमेशा गंदा पानी सड़क पर ही जमा रहता है। गांव के अंदर जगह-जगह कूड़े का ढेर देखा जा सकता है, जो ग्रामीणों के लिए सिरदर्द बना हुआ है। गांव की कुल आबादी करीब 4 हजार है। गांव में तीन हजार के लगभग मतदाता हैं। गांव में 14 जाति के लोग आपसी भाईचारे के साथ रहते हैं।


गांव के बुजुर्गो की मानें तो इस गांव का वर्षो पुराना इतिहास है। वे बताते हैं कि  ग्रामीण खेतीबाड़ी के साथ पशुपालन और मजदूरी करते थे। गांव में बासफोर, दलित समुदाय के लोगों का एक मोहल्ला भी है। इसके साथ ही गांव में विभिन्न जाति के लिए अलग मोहल्ले हैं। 
गांव में अलग-अलग ब्राह्मण, गुप्ता, कायस्थ, प्रजापति, बढ़ई, लुहार, सुनार, कोइरी, गौड़, मुस्लिम, कुर्मी, चौरसिया जातियों की अलग-अलग बिरादरी निवास करती है। इसके साथ ही एक प्राचीन शिव मंदिर है, जिसे ग्रामीणों ने अपने सहयोग से बनाया है। यहां दुर्गा माता का मंदिर है। 


ग्रामीणों का कहना है कि नालियों की नियमित सफाई नहीं होती हैं। गांव के अधिकतर नालियों में गाद जमा है। इस कारण नालियों में हमेशा पानी जमा रहता है। गंदे पानी की निकासी की उचित व्यवस्था न होने के कारण सुबह नालियां ओवरफ्लो हो जाती हैं और सड़क पर ही जलजमाव की स्थिति हो जाती हैं। इस कारण ग्रामीणों को गलियों से निकलने में अधिक परेशानी होती है। हल्की बारिश के बाद गांव का बुरा हाल हो जाता है। कई फीट बारिश का पानी गलियों में जमा हो जाता है।  इस कारण गांव में बीमारियों के फैलने की संभावना बनी रहती है।


ग्रामीणों की दूसरी बड़ी समस्या सड़क की मरम्मत का नहीं होना है।  ग्रामीणों का कहना है कि इस बारे में कई बार शिकायत की जा चुकी है, लेकिन आज तक कोई सुध लेने के लिए नहीं आया। ग्रामीण बताते हैं कि सड़क जगह-जगह से खुदी पड़ी है। इस कारण आए दिन हादसे होते हैं। आवागमन में यहां के निवासियों को परेशानी होती है। गांव के अंदर की गलियां भी जगह-जगह से टूटी पड़ी है। मरम्मत के नाम पर संबंधित विभाग के कर्मचारी आते जरूर हैं, लेकिन खानापूर्ति कर चले जाते हैं।


गांव में जगह-जगह कूड़े का ढेर देखा जा सकता है। ग्रामीणों का कहना है कि कूड़ा प्रबन्धन की व्यवस्था न होने से लोगों को जगह जगह कूड़ा फेंकना विवशता हैं।  यदि सफाईकर्मी गांव में नियमित आएं तो ग्रामीणों को प्रदूषित वातावरण में रहने के लिए मजबूर होना नहीं पड़ता, लेकिन कर्मी आते हैं और कुछ ही घंटों में सफाई के नाम पर खानापूर्ति कर चले जाते हैं। कूड़ा से उठने वाली बदबू से भी ग्रामीणों को दो-चार होना पड़ रहा है। कभी-कभार कूड़ा सड़क पर फैल जाता है। इस कारण लोगों को आवागमन में भी परेशानी होती है। गांव में ज्यादातर नालियां जाम हैं। उनमें गाद जमी है। इस कारण सुबह अक्सर नाली का पानी ओवरफ्लो होकर गलियों में फैल जाता है। इससे हमें आने-जाने में काफी मुश्किल होती है। शिकायत करने पर कर्मी आते हैं, लेकिन ग्राम प्रधान के घर की परिक्रमा कर चले जाते हैं। ग्रामीण बताते हैं कि गांव में न तो कोई डिस्पेंसरी है और न ही कोई जच्चा बच्चा केन्द्र ही है। डिस्पेंसरी के अभाव में ग्रामीणों को इलाज करवाने के लिए दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, खासकर प्रसव के समय काफी परेशानी होती हैं और उन्हें विवश होकर प्राइवेट अस्पतालों में प्रसव करानी पड़ती है जिससे उन्हें आर्थिक समस्या झेलनी पड़ती हैं। जबकि गांव में काफी जमीन सरकारी है, जहां पर अस्पताल बनाया जा सकता है, लेकिन दबंगों ने सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा कर लिया है। प्रशासन न तो अवैध कब्जा ही हटा रहा है और न उक्त जमीन को भूमिहीनों में बाट रहा है और न तो कोई सार्वजनिक भवन ही बनवाने की पहल कर रहा है। यहां कुछ ऐसे परिवार है जिनके पास अपना घर तक बनाने की भूमि नही है लेकिन बड़े बड़े लोग सभी सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा जरूर जमा रखे हैं, कमजोर ग्रामीण आवाज तो उठाना चाहते हैं लेकिन दबंगो द्वारा उनकी आवाज को ही दबा दी जाती है कारण कि इन दबंगो की सत्ता के गलियारों तक जो पहुच हैं। गांव में कुछ साल में कुछ विकास कार्य हुए हैं, लेकिन आज भी कुछ ऐसी समस्याएं हैं, जो वर्षो से जस की तस बनी हुई हैं। प्राचीन गांव होने के बाद भी गांव में एक सीनियर सेकेंडरी स्कूल नहीं है। गांव में महिलाओं के लिए न तो पार्क है और न ही प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र है। गांव में जल निकासी का उचित प्रबंध नहीं है। इस कारण नालियों में गंदा पानी जमा रहता है। गांव की समस्या के बारे में हमने जनप्रतिनिधियों को अवगत कराया गया था, लेकिन कुछ समस्या आज तक बनी हुई है। गांव में सरकारी जमीन पड़ी है, जहां पर प्रशासन चाहे तो महिलाओं के लिए पार्क या फिर स्कूल खोल सकता है। गाव में शवदाह गृह नही है और न ही विवाह भवन का ही निर्माण हो सका है। इसके वजह से गरीब व कमजोर लोगों को शव जलाने के लिए सोचना पड़ता हैं तो वही भूमिहीन होने के चलते वैवाहिक कार्यक्रम  संपन्न कराने में खासा दिक्कत उठानी पड़ती हैं।
ग्रामीण बताते हैं गाव में अधिकांश बुजुर्ग, विधवा व विकलांग हैं जो सरकारी पेंशन पाने से वंचित है। कुछ ऐसे भी परिवार हैं जो भूमिहीन तो है लेकिन उन्हें राशन कार्ड की सुविधा से महरूम होना पड़ रहा है और सरकार की ओर से उन्हें दी जाने वाली सुविधाएं गवई राजनीति की भेंट चढ़ गई हैं। कुछ ऐसे परिवार जो आज भी छतविहीन हैं लेकिन उन्हें सरकारी आवास की सुविधा मयस्सर न हो सकी हैं। ग्रामीण बताते हैं इन सुविधाओं के लिये सरकारी कार्यालयों का बार बार चक्कर तो लगाते हैं लेकिन जिम्मेदार हम गरीबो की समस्याओं की ओर ध्यान ही नही देते हैं यहां तक कि जिनके राशनकार्ड है उन्हें भी कम राशन मिलता हैं और कोटेदार अपनी मनमानी के अनुसार ही वितरण करते हैं। गाव में बहुत से मजदूर हैं जिन्हें रोजगार उपलब्ध नही है उनके परिवार के सामने इस महामारी में  आर्थिक समस्या खड़ी हो गयी हैं। अब उन्हें परिवार के भरण पोषण में दिक्कतें हो रही हैं लेकिन जिम्मेदार मस्त हैं और गरीब पस्त हैं। 


 काश हम गरीबो की समस्याओं पर भी पड़ जाती नजर 


 काश गाव के सर्वांगीण विकास का हसीन ख्वाब दिखाने वाले जनप्रतिनिधियों की खुल जाती कुम्भकर्णी नींद तो हो जाता गाव का कायाकल्प


टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

सपा अध्यक्ष को लगता है कि मुसलमान उनकी जेब में हैं: मायावती

हार-जीत से बड़ा है सक्षम बनना

24 जुलाई 2026 को चंद्रमा दिखाई देगा अन्टारेस (ज्येष्ठा नक्षत्र के योगतारा) के पास