रोजी रोटी के संकट के बीच गीडा ने 300 मजदूरों वाली फैक्ट्री को थमाया ढहाने का नोटिस,
गोरखपुर/ औद्योगिक विकास प्राधिकरण (गीडा) और प्लाईवुड फैक्ट्री के जिम्मेदारों की अनदेखी का खामियाजा 300 से अधिक मजदूरों को भुगतना पड़ सकता है। कोरोना काल में रोजी रोटी के संकट के बीच इन मजदूरों के बीच यह बड़ी चिंता का विषय बन गया है। गीडा के अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी द्वारा जारी नोटिस में प्लाईवुड फैक्ट्री को ध्वस्त करने की बात कही गई है।
नोटिस में कहा गया है कि उद्यमी ने बिना गीडा प्रशासन की अनुमति और मानचित्र स्वीकृति के फैक्ट्री खड़ी कर ली और उत्पादन भी शुरू कर दिया। गीडा के कड़े कदम से मजदूरों के रोजगार को लेकर संकट खड़ा हो गया है। अब जब नोटिस को लेकर फैक्ट्री के वजूद पर सवाल खड़ा हो गया है तो गीडा प्रशासन और फैक्ट्री मालिक की तरफ से तर्क दिये जा रहे हैं। गीडा के अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी अशोक कुमार सिंह की तरफ से फैक्ट्री मालिक जमालुद्दीन अहमद को जारी नोटिस में कहा गया कि वह 15 दिन के अंदर अनाधिकृत निर्माण को गिराकर गीडा प्रशासन को सूचित करें। नोटिस में कहा गया कि है कि कालेसर के पास जहां करीब 90 डिसमिल में फैक्ट्री चल रही है, उस जमीन का अधिग्रहण गीडा द्वारा किया गया है।
अधिग्रहित जमीन पर किसी प्रकार का निर्माण अवैध है। इस जमीन का आवंटन गीडा द्वारा नहीं किया गया है। न ही गीडा से उद्योग लगाने की अनुमति ली गई है न ही मानचित्र ही स्वीकृत कराया गया है। 10 जून को जारी नोटिस में 15 दिन के अंदर निर्माण को ध्वस्त कराकर सूचित करने की बात कही गई है। बता दें कि बीते वर्ष 21 अगस्त को भी फैक्ट्री को नोटिस जारी की गई थी। नोटिस के बाद हरकत में आये फैक्ट्री मालिक ने प्रमुख सचिव औद्योगिक विकास को पत्र लिख राहत की गुहार की है।
फैक्ट्री के मालिक जमालुद्दीन अहमद का तर्क है कि वर्तमान में जहां फैक्ट्री है, वहां से कुछ दूरी पर उनकी काफी पहले से फैक्ट्री थी। जगह छोटा होने से वह इसका विस्तार नहीं कर पा रहे थे। जिसके बाद उन्होंने एक किसान से जमीन खरीदी। किसान द्वारा कहा गया कि यह जमीन गीडा के अधिग्रहण क्षेत्र से बाहर है। जिसके बाद उद्योग विभाग की औपचारिकता के बाद बैंक से ऋण लेकर फैक्ट्री स्थापित की गई। फैक्ट्री मालिक का कहना है कि वह 25 साल से गीडा क्षेत्र में इस धंधे में हैं। किसान से जब जमीन ली गई थी तो गीडा की तरफ से कोई आपत्ति नहीं आई।
उद्योग विभाग से औपचारिकता के बाद बैंक से ऋण लेकर फैक्ट्री स्थापित की गई। गीडा में फैक्ट्री चलाया जाना है, हम फैक्ट्री ही चला रहे हैं। प्रमुख सचिव से पत्र लिखकर मांग की गई है कि गीडा की तरफ से फैक्ट्री को रेगुलर के लिए जो शुल्क निर्धारित किया जाएगा, उसे हम देंगे। फैक्ट्री स्थापना के प्रयासों के बीच फैक्ट्री का ध्वस्तीकरण न्यायसंगत नहीं है।
गीडा द्वारा अधिग्रहित जमीन को किसान से खरीदा जाना गलत है। इसीलिए फैक्ट्री संचालकों को नोटिस जारी की गई है। संचालकों द्वारा उच्चाधिकारियों के पास अपील की गई है, जो भी गाइडलाइन मिलेगी उसके मुताबिक आगे की कार्रवाई की जाएगी।
संजीव रंजन, सीईओ, गीडा
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