सबके लिए उपयोगी क्रियात्मक योग गुरु गोरक्षनाथ की देन : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

लखनऊ,  20 जून। योग और निरोग एक दूसरे के पूरक हैं। योग करने से रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) बढ़ती है। अगर व्यक्ति की प्रतिरोधक क्षमता मजबूत है तो उसे किसी भी वायरस के संक्रमण का खतरा कम होगा। ये बातें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की पूर्व संध्या पर कही। वह महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद एवं महायोगी गोरक्षनाथ योग संस्थान की ओर से योग पर आयोजित ऑनलाइन कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। 


मुख्यमंत्री ने कहा कि योग के मूल आचार्य भगवान शिव हैं। लेकिन मानव जगत के लिए योग दार्शनिक पक्ष महर्षि पतंजलि और व्यवहारिक या क्रियात्मक पक्ष महायोगी श्री गुरु गोरखनाथ की देन हैं। योग का यह क्रियात्मक पक्ष हर उम्र के व्यक्ति के लिए उपयोगी है। इनके जरिए वह शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ प्राप्त करने के साथ आध्यात्मिक जगत के रहस्यों को भी समझ सकता है। आध्यात्मिक रहस्य को जानने के लिए शरीर और मन का स्वस्थ्य होना जरूरी है। और यह योग द्वारा ही संभव है। हर किसी को अपनी दिनचर्या में योग को अनिवार्य रूप से शामिल करना चाहिए। 


मुख्यमंत्री ने कहा कि योग मूलत: भारत की थाती है। प्रधानमंत्री ने इसे वैश्विक सम्मान दिलाकर सराहनीय कार्य किया। आज यह दिवस 200 से अधिक देशों में मनाया जाता है। इसका मतलब यह भी है कि इतने देशों से अपनी विरासत के जरिए भारत आत्मीय संवाद भी बनाता है। हालात के कारण योग का यह कार्यक्रम इस बार सामूहिक रूप से संभव नहीं। लिहाजा अपने घरों में परिवार के साथ योग करें। क्या करना है कैसे करना है इसके लिए केंद्रीय आयुष मंत्रालय ने एक कॉमन योगा प्लेट प्रोटोकॉल जारी किया है। आप योग करते हुए अपनी फोटो या वीडियो भी उस प्लेटफार्म पर अपलोड कर सकते हैं। केंद्र और राज्य सरकार अच्छे योगाभ्यासियों को पुरस्कृत भी करेगी। मुख्यमंत्री ने उम्मीद जतायी कि पहले के वर्षों जैसे ही यह कार्यक्रम सफल और प्रेरणादायी होगा।
 
घबराएं नहीं 


मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना से घबराएं नहीं। बस इसके संक्रमण की गति तेज है। इस संक्रमण से ही खुद को बचाना होगा। खासकर बच्चे, बुजुर्ग एवं जिनको पहले से ही कोई रोग है, वे इस संक्रमण के प्रति सर्वाधिक संवेदनशील हैं। लिहाजा उनको इसी अनुसार सावधानी भी बरतनी चाहिए। 


 बचाव के लिए प्रधानमंत्री के स्लोग्न पर करें अमल


बचाव के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस स्लोगन (मास्क है जरूरी, दो गज की दूरी) को जरूर याद रखें और इस पर अमल भी करें। अगर हम ऐसा कर लें और घर से बाहर निकलने पर मास्क का प्रयोग करें तो संक्रमण से बचा जा सकता है।


समय और तकनीक के महत्व को समझें


मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना के कारण वैश्विक स्तर पर सबके जीवन में बदलाव आया है। हमें बदलाव के इस दौर में तकनीक के महत्व को समझना होगा। जिन लोगों ने समय और तकनीक दोनों के महत्व को समझा उन्होंने बेहतर नतीजे भी दिये। कोरोना के संक्रमण को रोकना है तो समूह में एकत्र न हों। बिना समूह में एकत्र हुए भी डिजिटल प्लेटफार्म के जरिए संवाद स्थापित किया जा सकता है। जो हम आपके साथ भी कर रहे हैं।


पूर्व के वर्षों में इस दौरान योग शिविर लगते थे। योग के व्यवहारिक और सैद्धांतिक पक्ष पर भी विशेषज्ञ चर्चा करते थे, पर बदले हालात में ऐसा संभव नहीं। यहीं डिजिटल प्लेटफार्म की प्रासंगिकता बढ़ जाती है। हमने इस दौरान शासन एवं प्रशासन के कार्यों में इस प्लेटफार्म का भरपूर उपयोग किया है, खासकर पात्र लोगों को शासन की कल्याणकारी योजनाओं से लाभान्वित कराने में। अब डीबीटी के जरिए पात्रों के खाते में सीधा पैसा जाने से बिचौलिये और उनके पास जाने वाला पैसा रुक गया। कभी वह भी समय था जब विकास के पैसे का 10 फीसद ही पात्रों तक पहुंचता था। बाकी बिचौलिए की जेब में। एक पूर्व प्रधानमंत्री ने इस मुद्दे पर लाचारगी जतायी थी। अब तो एक क्लिक करिए और पैसा जरूरतमंद के खाते में। इसी माध्यम से हर चीज की प्रभावी निगरानी शासन और प्रशासन स्तर से की जा सकती है। हम कर भी रहे हैं।


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