क्या कामनी की मौत दिला पायेगा सलेमगढ़ को ओवरब्रिज
जी हां उपरोक्त प्रश्न एन एच 28फोर लेन निर्माण के समय से ही सलेमगढ़ में उठते और दबते रहे हैं और इस बीच नजाने कितनी जिन्दगियां रफ्तार के खेल में परवान चढ़ गयी। जिसमें आज एक और 18वर्षिय कामीनी जो अपने पिता रामप्रसाद चौरसिया के सहयोग के लिए दुकान आयी थी रोज ही तो गुड़िया बेटी देखते ही देखते सड़क पार कर जाती थी। यह कह कर छाती पीटना अब उस बाप के लिए उसका तकदीर बन गया है। पर कामिनी की मौत एक बार फिर ओवरब्रिज मुद्दे को हवा दे गया। हालांकि पुलिस की लाठियों ने दमनकारी अंग्रेजी हुकुमरानो की याद जरूर दिला गयी जिसे कहते सुनते वुजूर्ग स्वर्ग सिधार गये।
मुद्दा ओवरब्रिज
घटना स्थल से करीब 2.5कीमी पूरब बहादुरपुर पुलिस चौकी के समीप बिहार वार्डर व करीब इतनी ही दूरी टोल टैक्स के बीच कहीं भी सड़क पार के लिए क्रासिंग नहीं है जबकि सलेमगढ मुख्य बाजार से निकलने वाले लोग सिधे तौर पर हाइवे को अपना कर अपनी गति बढ़ाना चाहते हैं।जिस होड में न जाने कितनी ज़िन्दगी चींटी के मोल सड़क पर मसल गयी। लोग एक दिवसीय हंगामे के बाद अगली दुर्घटना तक सोते दिखे। ऊपर से यहां वे तरतीब त्रीचक्र वाहन के स्वामीयों की मनमानी हमेशा से ही किसी ने दुर्घटना को दावत देती है।
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