चौरीचौरा को किया राममय नव वर्ष उत्सव समिति ने

 चौरी चौरा, चौरी चौरा में नव वर्ष उत्सव समिति के कार्यकर्ताओं ने इस वर्ष अयोध्या में श्री राम मंदिर के भूमि पूजन के शुभ अवसर पर नगर पंचायत मुण्डेरा बाजार  में  रामचंद्र जी की प्रतिमा स्थापित करके अयोध्या जैसा माहौल बना दिया I समिति के आयोजक राजन मद्धेशिया ने बताया कि जब हमारे समिति के श्री राम भक्तों ने 2017 में श्री राम रथ यात्रा पहली बार निकाली तो 90 के दशक के बाद पुनः एक बार चौरी चौरा के हिंदुओं के हृदय में राम मंदिर निर्माण और कार सेवा की भावनाएं जीवंत हो उठी। नगर वासियों की राम मंदिर के प्रति श्रद्धा और आस्था को देखते हुए समिति के सभी श्री राम भक्तों ने यह प्रण किया कि जब तक अयोध्या में रामलला के भव्य मंदिर के निर्माण का शुभारंभ नहीं हो जाता तब तक हम सभी बिना रुके प्रतेक वर्ष श्री राम रथ यात्रा निकालकर देश वासियों को यह संदेश देते रहेंगे की प्रभु श्री राम हिंदुस्तान के जन-जन और कण-कण में बसते हैं अतः भव्य मंदिर का निर्माण होना ही चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय की पीढ़ी बहुत ही भाग्यशाली है जो अपने आंखों के सामने मंदिर का निर्माण होते हुए देख रही है और आज अगर यह संभव हो पाया है तो इसमें सबसे बड़ा योगदान हमारे पूर्वजों का है जिन्होंने कार सेवा में अपने प्राणों की आहुति दे दी और बहुत से लोगों को गंभीर शारीरिक चोटे भी आई थी अतः समिति के सदस्यों ने नगर के उन सभी त्यागी कारसेवकों से मिलकर उनको रामनामी अंगवस्त्रम ओढाकर  सम्मानित किया और मुंह भी मीठा कराया तथा उनके त्याग, समर्पण और शौर्य को नगर की वर्तमान पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया। इसके पश्चात नगर के दानी भवानी पोखरा पर भारत माता की प्रतिमा और बाजार में श्री रामचंद्र जी की प्रतिमा स्थापित की गई धर्म के साथ-साथ राष्ट्रधर्म की भावना जागृत करने के लिए भारत के विभिन्न क्रांतिकारियों के चित्र नगर में लगाए गए नगर के हर गली और चौराहों पर ढोल नगाड़े बजाकर मिष्ठान बांटा गया प्रत्येक घरों पर दीपक जलाने का निवेदन किया गया I पूरे नगर में एक 101 साउंड सिस्टम लगाकर राम धुन बजाकर ऐतिहासिक नगर चौरी चौरा में ही सभी राम भक्तों के हृदय में पवित्र अयोध्या जैसी रामलहर की अनुभूति करा दी गई। समिति के आयोजक ने बताया कि यह आयोजन श्री राम भक्तों सतीश, जयराम, अमित, गौतम, अरविंद, विशाल, आकाश, सनी, रजत, प्रथम, अजय, सचिन, अंकित, द्वारिका, रमन, रतन, छेदी, विजय, आलोक, मनीष, राज, राकेश, जितेंद्र, रिपुंजय, अजीत, सोनू, नागेश्वर, आनंद, दिलीप और कृष्णा जैसे रीढ़ स्तम्भ कार्यकर्ताओं के वजह से ही संभव था। साथ ही साथ नगर के सभी जनमानस एवं जनप्रतिनिधियों ने भी समिति का पूरा सहयोग किया।


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