राधारमण मन्दिर की जन्माष्टमी विश्व प्रसिद्ध है
राधारमण मन्दिर की जन्माष्टमी विश्व प्रसिद्ध है क्योंकि इसका विगृह स्वयं प्राकट्य है। इसके अभिषेक में 27 मन दूध, दही, बूरा, शहद और घी के साथ साथ औषधियों एवं महाऔषधियों का प्रयोग अभिषेक में होता है। संभवतः विश्व में यही अकेला मन्दिर है जिसमें जन्माष्टमी के दिन अभिषेक के बाद गोस्वामी वर्ग ठाकुर को दीर्ध आयु का अशीर्वाद देता है क्योंकि इस मन्दिर में ठाकुर की सेवा यशोदा भाव से होती है।
मन्दिर के सचिव एवं सेवायत आचार्य पद्मनाभ गोस्वामी ने बताया कि इन्ही विशेषताओं के कारण जन्माष्टमी पर समूचा वृन्दावन इस मन्दिर में समा जाना चाहतो है चूंकि राधारमण मंदिर में श्रद्धालुओं का प्रवेश नही होगा इसलिए वृन्दावनवासी चरणामृत लेकर ही संतोष करेंगे।
उन्होंने बताया कि चरणामृत का वितरण अधिकतर तो मंन्दिर के गोस्वामियों के घरों से होगा। वृन्दावनवासी उनके यहां से चरणामृत लेे जाएंगे लेकिन जो गोस्वामियों के यहां से चरणामृत नही ले सकेंगे उनके लिए बैरीकेडिंग कर एवं सामाजिक दूरी बनाकर चरणामृत का वितरण पुलिस की उपस्थिति में किया जाएगा। यदि चरणामृत के वितरण के दौरान सामाजिक दूरी को बनाए रखने में अड़चन आएगी तो वितरण रोक दिया जाएगा और सामाजिक दूरी बनाए रखते हुए लाइन लगाकर वितरण होगा।
गोस्वामी ने इस बात से इंकार नही किया कि श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ सकती है क्योंकि ब्रज के सभी मंदिर इस बार की जन्माष्टमी पर बन्द रहेंगे। उनका कहना था कि चूंकि वृन्दावनवासी मन्दिर का चरणामृत गृहण करके ही व्रत के नियम का पालन करते हैं इसलिए उनका प्रयास होगा कि कम से कम वृन्दावनवासियों को चरणामृत देने की सुविधा से वंचित न किया जाय।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह सुविधा केवल वृन्दावनवासियों को ही मिलेगी जन्माष्टमी पर वृन्दावन आनेवाले तीर्थयात्रियों को यह सुविधा इस बार नही मिल सकेगी। उनका यह भी कहना था कि चूंकि वृन्दावनवासी अपने हैं इसलिए उनसे यह अपेक्षा की जाती है कि वे सामाजिक दूरी को बनाए रखने में मंदिर का सहयोग पूरी निष्ठा से करेंगे।
कुल मिलाकर इस बार की जन्माष्टमी वृन्दावन आनेवाले तीर्थयात्रियों के लिए परेशानी का सबब बन सकती है क्योंकि उन्हें ठाकुर के दर्शन नहीं होंगे और प्रसाद पाने के लिए उन्हें पापड़ बेलने पड़ सकते हैं।
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें