अधिवक्ता का परिवाद खारिज करने पर हाईकोर्ट सीजेएम से नाराज,रद्द किया आदेश
प्रयागराज,26 सितम्बर (वार्ता) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अधिवक्ता द्वारा दाखिल परिवाद पर तलब किए दरोगा की अदालत में उपस्थिति सुनिश्चत कराने के बजाए परिवाद ही खारिज करने पर नाराजगी जताते हुए सीजेएम मुरादाबाद का 13 अगस्त 2018 का आदेश रद्द कर दिया है।
न्यायालय ने कहा कि यह आदेश बताता है कि आरोपी दरोगा परिवाद के खिलाफ निगरानी खाारिज होने और गैरजमानती वारंट जारी होने के बावजूद अदालत में हाजिर होने से बच गया। यह बड़े आश्चर्य की बात है कि मजिस्ट्रेट ने उसकी अदालत में हाजिरी सुनिश्चत कराने के बजाए केस ही खारिज कर दिया।
न्यायमूर्ति डा. के जे ठाकर ने मुरादाबाद के वकील राजबीर सिंह की निगरानी याचिका स्वीकार करते हुए यह आदेश दिया है।
न्यायालय ने एसपी मुरादाबाद को आदेश की प्रति भेजने का निर्देश देते हुए कहा है कि एसपी न्यायालय को बताएं कि मजिस्ट्रेट द्वारा दरोगा की अदालत में उपस्थिति सुनिश्चत कराने के लिए उनको भेजे गए नोटिस पर क्या कार्रवाई की है। अदालत का कहना है कि एसपी ने दरोगा को संरक्षण दिया, क्योंकि उन्होंने मजिस्ट्रेट के नोटिस पर कोई कार्रवाई नहीं की।
वकील राजबीर सिंह ने सब इंस्पेक्टर जय भगवान के खिलाफ सीजेएम मुरादाबाद के समक्ष एक परिवाद दर्ज कराया था। जिस पर सीजेएम ने चोरी, झूठे तथ्य प्रचारित करने आदि आरोपों में परिवाद पर सुनवाई करते हुए दरोगा को समन भेजा। इस समन के खिलाफ दरोगा ने सेशन अदालत में निगरानी दाखिल की जो खारिज हो गई। इसके बाद भी अदालत में बयान दर्ज कराने के लिए हाजिर नहीं हुए।
सीजेएम ने गैरजमानती वारंट जारी करते हुए एसपी मुुरादाबाद को नोटिस भेज कर दरोगा की उपस्थिति सुनिश्चत कराने के लिए कहा, लेकिन इस पर भी कोई कार्रवाई नहीं की गई। इस दौरान परिवादी वकील बीमार हो गए। मजिस्ट्रेट ने प्रोसेस फीस जमा न/न करने और परिवादी के हाजिर न/न होने के आधार पर परिवाद 13 अगस्त 2018 को खारिज कर दिया। इस आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई थी ।
सं दिनेश त्यागी
वार्ता
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