निजीकरण के फैसले के विरोध में बिजली कर्मचारी लामबंद

लखनऊ 19 सितम्बर (वार्ता) पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के विरोध में शनिवार को लगातर दूसरे दिन बिजली कर्मचारियों ने की और सरकार ने प्रस्ताव को वापस लेने की मांग की।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के आह्वान पर राजधानी लखनऊ सहित गोरखपुर, वाराणसी, मेरठ, कानपुर, आगरा, मुरादाबाद, सहारनपुर, बुलंदशहर, प्रयागराज अयोध्या, आजमगढ़, बांदा, बस्ती, बरेली, अलीगढ, झाँसी, अनपरा, ओबरा, परीछा, समेत सभी जिलों एवं परियोजनाओं में बिजली कर्मचारियों, संविदा कर्मियों, और अभियंताओं ने निजीकरण के प्रस्ताव के विरोध में सभा की और सरकार से व्यापक जनहित में निजीकरण का प्रस्ताव निरस्त करने की माँग की है।
मध्यांचल मुख्यालय लखनऊ पर हुयी विरोध सभा में प्रभात सिंह, जय प्रकाश, सुहेल आबिद, केके वर्मा, विजय गुप्ता, दीपक चक्रवर्ती समेत संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के विघटन व निजीकरण का फैसला वापस न लिया गया और इस दिशा में सरकार की ओर से कोई भी कदम उठाया गया तो ऊर्जा निगमों के तमाम बिजली कर्मचारी, जूनियर इंजीनियर व अभियंता उसी समय बिना और कोई नोटिस दिए अनिश्चित कालीन आंदोलन प्रारंभ करने के लिये बाध्य होंगे जिसमें पूर्ण हड़ताल भी सम्मिलित है।
संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री माननीय योगी आदित्यनाथ से अपील की कि वह प्रभावी हस्तक्षेप करने की कृपा करें जिससे निजीकरण का प्रस्ताव निरस्त हो सके और उनके कुशल नेतृत्व में बिजली कर्मी पूर्ववत पूर्ण निष्ठा से बिजली आपूर्ति और सुधार के कार्य में जुटे रह सकें।
आंदोलनरत कर्मियों ने कहा कि निजीकरण का निर्णय संघर्ष समिति और ऊर्जा मंत्री की उपस्थिति में विगत 5 अप्रैल 2018 को हुए समझौते का खुला उल्लंघन है जिसमें लिखा गया है कि बिजली कर्मचारियों को विश्वास में लिए बगैर प्रदेश में ऊर्जा क्षेत्र का कोई निजीकरण नहीं किया जाएगा।
संघर्ष समिति ने प्रदेश सरकार और प्रबंधन से विगत में किए गए निजीकरण के प्रयोगों की विफलता की समीक्षा करने की भी मांग की। संघर्ष समिति के प्रतिनिधियों का कहना है कि दिसंबर 1993 में ग्रेटर नोएडा क्षेत्र का निजीकरण किया गया और अप्रैल 2010 में आगरा शहर की बिजली व्यवस्था टोरेन्ट फ्रेंचाइजी को दी गई और यह दोनों ही प्रयोग विफल रहे हैं। इन प्रयोगों के चलते पावर कार्पोरेशन को अरबों खरबों रुपए का घाटा हुआ है जो बढ़ता ही जा रहा है।
पदाधिकारियों ने निर्णय लिया कि निजीकरण के विरोध में व्यापक जन जागरण करने के लिये संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारी 21 सितम्बर से 20 अक्टूबर तक मंडल मुख्यालयों पर विरोध सभाएं कर कर्मचारियों और उपभोक्ताओं को जागरूक करेंगे। इसके साथ ही प्रदेश भर में जन प्रतिनिधियों को निजीकरण के विरोध में ज्ञापन दिए जाएंगे।
प्रदीप
वार्ता


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