वाराणसी बाईपास के लिए हो रहे ध्वस्तीकरण के खिलाफ याचिका खारिज
प्रयागराज, 22 सितंबर(वार्ता) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने वाराणसी बाईपास के लिए हो रहे ध्वस्तीकरण के खिलाफ दाखिल याचिका पर हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया है। न्यायालय ने कहा है कि ऐसे मामले में भूमि स्वामित्व का मामला तथ्य का विषय है , जिस पर उच्च न्यायालय में याचिका उचित फोरम नही है। याची कानून के तहत इस मामले में भूमि स्वामित्व को लेकर उचित कार्रवाई कर सकता है।
यह आदेश न्यायमूर्ति एस पी केशरवानी तथा न्यायमूर्ति जयंत बनर्जी की खंडपीठ ने मनोज सोनकर व 42 अन्य की याचिका को खारिज करते हुए दिया है।
याचियों का कहना था कि बिना मुआवजा दिये उनके निर्माण ढहाये जा रहे हैं। राज्य सरकार के स्थाई अधिवक्ता ने कहा कि याचियों का अवैध कब्जा है। जमीन डिफेन्स की है। उस जमीन पर 80 लोगों के अवैध कब्जा पाया गया है। 10 लोगों ने मलबा का मुआवजा लेने पर सहमति दी है। भू स्वामित्व न होने के कारण भूमि का मुआवजा नही दिया जा सकता। न्यायालय ने इस कारण इस मामले में हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया है।
सं भंडारी
वार्ता
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