अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस आज

          गोरखपुर। हर साल 11 अक्टूबर के दिन को विश्व बालिका दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन को सेलिब्रेट करने का मकसद दुनियाभर के लोगों को जागरूक करना है होता है कि समाज में जितना हक और अधिकार एक पुरुष या लड़के को मिलते है उतने की हक़दार लड़कियां या महिला भी है। इस दिवस को इसलिए भी मनाया जाता है की लड़कियों पर हो रहे अत्याचार में कमी लाई जाए और पुरुष प्रधान समाज को लड़कियों को उनके अधिकार के बराबर का दर्जा मिले,बालिका शिशु के साथ भेद-भाव एक बड़ी समस्या है जो कई क्षेत्रों में फैला है जैसे शिक्षा में असमानता, पोषण, कानूनी अधिकार, चिकित्सीय देख-रेख, सुरक्षा, सम्मान, बाल विवाह आदि। समाजिक लोगों के बीच उनके जीवन को बेहतर बनाने के लिये और समाज में लड़कियों की स्थिति को बढ़ावा देने के लिये इसे मनाया जाता है। ये बहुत जरुरी है कि विभिन्न प्रकार के समाजिक भेदभाव और शोषण को समाज से पूरी तरह से हटाया जाये जिसका हर रोज लड़कियाँ अपने जीवन में सामना करती हैं।
वर्षों से, भारतीय समाज में माता-पिता के द्वारा लड़के के जन्म की चाह के कारण महिलाओं की स्थिति पिछड़ी हुई है। इसने समाज में लिंग असमानता का निर्माण किया और लिंग समानता को लाकर इसे हटाना बहुत आवश्यक है। समाज में व्याप्त अत्यधिक गरीबी ने महिलाओं के खिलाफ सामाजिक बुराई जैसे दहेज प्रथा जन्म दिया है जिसने महिलाओं की स्थिति को बद से बदतर (बहुत बुरा) बना दिया है। आमतौर पर माता-पिता सोचते है की लड़कियाँ केवल रुपये खर्च कराती है जिसके कारण वो लड़कियों को बहुत से तरीकों (कन्या भ्रूण हत्या, दहेज के लिये हत्या) जन्म से पहले या बाद में मार देते है।


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