मोदी को शबरी की तरह मोमो खिलायेंगे वाराणसी के अरविंद

लखनऊ 27 अक्टूबर (वार्ता) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मिली आत्मीयता से गदगद वाराणसी के पटरी दुकानदार ने उन्हे वाराणसी आने पर शबरी की तरह मोमो खिलाने का प्रस्ताव दे डाला।
दरअसल, श्री मोदी ने मंगलवार को पीएम स्वनिधि योजना के तीन लाभार्थियों से वर्चुअल संवाद किया। श्री मोदी ने वाराणसी के माेमोज दुकानदार अरविंद मौर्य से कहा “ सुन रहा हूं बनारस का मोमोज काफी तेजी से प्रचलित हो रहा है। मैं बनारस आता हूं तो मुझे कोई मोमोज खिलाता ही नहीं। मेरे सुरक्षाकर्मी इसके लिये जिम्मेदार है क्योंकि वे हर चीज को जांचे परखे बगैर मुझे खाने को नहीं देते। कड़ी सुरक्षा के कारण मैं आप लोगों से मिल नहीं पाता हूं। ”
इस पर अरविंद ने कहा “ आप वाराणसी आइये। मैं आपको उसी प्रेम से माेमोज खिलाऊंगा जैसे शबरी ने भगवान राम को बेर खिलाए थे। ” अरविंद ने कहा “ पहले कर्ज के लिए लोग बेवकूफ बनाते थे। जब अचानक बैंक से कहा गया कि आधार और पासबुक लेकर आइए लोन पास हो गया तो विश्वास ही नहीं हुआ।”
अरविन्द ने प्रधानमंत्री को बताया कि लाॅकडाउन से पहले वे मोमोज बेचने का कार्य करते थे। लाॅकडाउन के कारण व्यवसाय पूरी तरह से बन्द हो गया। जमा पूंजी खर्च हो गयी मगर अब पीएम स्वनिधि के अन्तर्गत 10,000 रुपये का ऋण मिलने से उनका कार्य सुचारु रूप से चलने लगा है। लाॅकडाउन के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 1,000 रुपये एवं राशन उपलब्ध कराया जाता रहा, जिससे उन्हें काफी सहायता मिली। उन्हें आयुष्मान भारत, प्रधानमंत्री बीमा सुरक्षा योजना, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना तथा श्रम योगी मानधन योजना का भी लाभ मिल रहा है।
आगरा की प्रीति ने बताया कि पहले वे ताजमहल के निकट फलों का ठेला लगाती थीं लेकिन लाॅकडाउन के चलते आमदनी बहुत कम हो गयी। अब उन्हें पीएम स्वनिधि योजना के अन्तर्गत 10,000 रुपये की कार्यशील पूंजी उपलब्ध करायी गयी है, जिससे उन्होंने अपना व्यवसाय पुनः प्रारम्भ कर दिया है। अब प्रतिदिन 100 से 150 रुपये की आमदनी हो रही है। उन्हें उज्ज्वला योजना और प्रधानमंत्री जनधन योजना का भी लाभ मिल रहा है।
लखनऊ के विजय बहादुर ने प्रधानमंत्री को बताया कि वे लाॅकडाउन से पहले ठेले पर लइया चना बेचने का काम करते थे। लाॅकडाउन में काम ठप हो गया और पूंजी समाप्त हो गयी थी। पीएम स्वनिधि योजना के अन्तर्गत 10,000 रुपये का ऋण उपलब्ध कराया गया है, जिससे उनका कार्य फिर से प्रारम्भ हो गया है। अब उनकी दैनिक आय लगभग 250 रुपये है। उन्होंने बताया कि लाॅकडाउन के दौरान प्रदेश सरकार द्वारा 1,000 रुपये की धनराशि एवं राशन किट उपलब्ध करायी गयी। उन्हें उज्ज्वला योजना तथा प्रधानमंत्री जनधन योजना का लाभ भी मिल रहा है।
प्रदीप
वार्ता


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