राजस्थान चुनाव से पहले फिर हो सकता है गुर्जर आरक्षण आंदोलन, 17 अक्टूबर को महापंचायत
जिला परिषद और स्थानीय निकाय चुनाव से पूर्व गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के अल्टीमेटम ने राज्य सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. गुर्जर नेताओं ने 17 अक्टूबर को मलारना डूंगर में महापंचायत बुलाई है. गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के संयोजक कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला ने कहा कि सरकार सब जानती है कि हम क्या चाहते हैं, ऐसे में हम सरकार के साथ वार्ता नहीं करेंगे.
डेढ़ साल से मुख्य सचिव और सरकार के बीच उच्च स्तर पर वार्ता ही हो रही है. प्रक्रियाधीन भर्तियों में गुर्जरों समेत एमबीसी में शामिल पांच जातियों को दिए गए आरक्षण की पूर्णता पालना नहीं हो रही है. कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला का कहना है कि आरक्षण आंदोलन समझौते के सभी बिंदुओं की अक्षरशः पालना के इंतजार में डेढ़ साल गुजार दिए. इस बीच एमबीसी वर्ग को काफी हानि हुई है.
कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला के पुत्र विजय बैंसला ने कहा कि हम सरकार से कोई वार्ता नहीं करेंगे. सरकार का प्रतिनिधि घर आकर वार्ता करता है तो स्वागत है. हाल ही में राज्य सरकार ने खेल मंत्री अशोक चांदना को गुर्जर नेताओं से वार्ता करने के लिए अधिकृत किया है. अशोक चांदना ने कहा था कि यदि आवश्यकता हुई तो वह खुद जाकर गुर्जर नेताओं से वार्ता करेंगे.
गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति में एक बार फिर दो फाड़ होने की संभावना है. कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला ने प्रेस वार्ता में एडवोकेट शैलेंद्र सिंह को नहीं बुलाया. बैंसला के खास साथी एडवोकेट शैलेंद्र सिंह सरकार के साथ हर वार्ता में मौजूद रहे हैं. ऐसा माना जा रहा है कि बैंसला हिम्मत सिंह गुर्जर की तरह एडवोकेट शैलेंद्र सिंह से भी किनारा करने वाले हैं. गुर्जर आरक्षण की कमान अब पूरी तरह कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला के पुत्र विजय बैंसला के हाथ में जाती हुई दिखाई दे रही है. एडवोकेट शैलेंद्र सिंह का कहना है कि इस मामले पर कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला से बात करेंगे.
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