देश भर में रही 72वें गणतंत्र दिवस समारोह की धूम

 नयी दिल्ली ,26 जनवरी (वार्ता) देश में मंगलवार को 72वें गणतंत्र दिवस की धूम रही और यहां राजपथ पर भारत ने एक बार फिर दुनिया के सामने अपने शौर्य एवं संस्कृति के वैभव का शानदार प्रदर्शन किया।

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद,उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू , प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी , केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और अन्य मंत्रियों तथा गणमान्य हस्तियों ने देशवासियों को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं दी।


प्रधानमंत्री ने इंडिया गेट स्थित राष्ट्रीय समर स्मारक पर शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि देकर की। यहां शहीदों को गार्ड कमांडर द्वारा सलामी शस्त्र दिया गया तथा उनके सम्मान में दो मिनट का मौन रखा गया। मौन के समापन पर बिगुल वादकों ने ‘राउज’ धुन बजायी। इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने सलामी मंच की ओर प्रस्थान किया।

राष्ट्रपति 46 सजीले घुड़सवार अंगरक्षकों के साथ राजपथ पर पधारे, जहां प्रधानमंत्री मोदी ने उनकी अगवानी की। लेफ्टिनेंट कर्नल जितेन्दर सिंह मेहता के नेतृत्व में राष्ट्रपति को 21 तोपों की सलामी दी गई। श्री कोविंद ने यहां तिरंगा फहराया। भारतीय सेना के अधिकारी मेजर स्वामी नंदन ने झंडा फहराने में उनकी सहायता की। इसके बाद राष्ट्रगान शुरू हुआ।

उल्लेखनीय है कि कोविड-19 के मद्देनजर इस बार कोई विदेशी हस्ती मुख्य अतिथि के तौर पर समारोह में शामिल नहीं हुई , हालांकि सरकार ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया था, लेकिन ब्रिटेन में कोरोना महामारी के कारण उत्पन्न प्रतिकूल स्थिति के मद्देनजर उन्होंने आने में असमर्थता व्यक्त कर दी थी।

राष्ट्रगान के समापन के बाद राष्ट्रपति भवन की ओर से 155 हेलिकाॅप्टर यूनिट के चारमी-17 वी-5 हेलिकाॅप्टर ‘वाइनग्लास’ के आकार में उड़ान भरते हुए सलामी मंच की ओर आए, जिसका नेतृत्व विंग कमांडर निखिल मेहरोत्रा ने किया। उनके पीछे एस्टर्न पोजीशन में विंग कमांडर मयंक पालीवाल थलसेना का ध्वज, उनके बाईं ओर विंग कमांडर कुणाल नौसेना और दायीं ओर तथा सलामी मंच की तरफ विंग कमांडर डबराल ने भारतीय वायुसेना का ध्वज लहरा रहे हेलिकाॅप्टर से फूलों की पंखुड़ियां बिखेरते हुए दर्शकों का अभिवादन किया।

गणतंत्र दिवस के मौके पर सुरक्षा के पुख्ता इंजाम किए गए थे। राष्ट्रीय राजधानी में चप्पे-चप्पे पर सुरक्षाकर्मी तैनात थे। साथ ही दिल्ली पुलिस सीसीटीवी के माध्यम से शहर की हर गतिविधि पर नजर रख रही थी। गणतंत्र दिवस समारोह के बाद किसानों की ट्रैक्टर रैली के मद्देनजर पुलिस ने सुरक्षा के चाकचौबंद बंदोबस्त किये थे।

राजपथ पर परेड की शुरुआत परमवीर चक्र तथा अशोक चक्र विजेताओं ने की। इनमें सूबेदार मेजर योगेन्द्र सिंह यादव, पीवीसी 18 ग्रेनेडियर्स, सूबेदार संजय कुमार, पीवीसी, 13 जम्मू -कश्मीर राइफल्स तथा अशोक चक्र से सम्मानित विजेताओं में लेफ्टिनेंट कर्नल डी श्रीराम कुमार शामिल थे।

वहीं राजपथ पर पहली बार बंगलादेश की सशस्त्र सेनाओं के 122 सैनिकों के मार्चिंग दस्ते ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज करायी। इस दस्ते का नेतृत्व लेफ्टिनेंट कर्नल अबु मोहम्मद शाहनूर शावोन, डिप्टी लेफ्टिनेंट फरहान इशराक और फ्लाइट लेफ्टिनेंट सिबत रहमान कर रहे थे। इस दस्ते में बंगलादेश की थल सेना, नौसेना और वायुसेना के जवान शामिल थे। इससे पहले वर्ष 2016 में फ्रांस की सेना के दस्ते ने परेड की शान बढ़ायी थी।

परेड में कुल 18 मार्चिंग दस्तों ने हिस्सा लिया जिनमें 16 सैन्य और सुरक्षा बलों के तथा एक घुड़सवारों का तथा एक ऊंट पर सवार जवानों का था। परेड में सेना तथा सुरक्षा बलों के 36 बैंड भी अपनी स्वर लहरी से दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। वहीं इस साल राज्यों और विभिन्न विभागों की 32 झांकियां भी राजपथ पर निकाली गयीं। साथ ही पन्द्रह वर्ष से अधिक आयु के स्कूली बच्चों ने सांस्कृतिक तथा कला कार्यक्रम पेश किये। परेड में विभिन्न राज्यों ने अपनी झांकियां प्रस्तुत की।

समारोह में वैश्विक महामारी कोरोना का असर देखने को मिला। प्रत्येक वर्ष परेड राजपथ से शुरू होकर लालकिला तक यानी 8.2 किलोमीटर की दूरी तय करती थी, लेकिन इस बार राजपथ से चलकर इंडिया गेट के नेशनल स्टेडियम तक यानी सिर्फ 3.3 किलोमीटर के दायरे में ही समाप्त हो गयी। परेड के मौके पर राष्ट्रीय बाल पुरस्कार विजेता बच्चों को भी नहीं बुलाया गया। हर साल जहां गणतंत्र दिवस परेड देखने के लिए लगभग एक लाख लोग मौजूद रहते थे, वहीं इस बार करीब 25 हजार लोग ही मौजूद रहें। अपने हैरतअंगेज करतबों से दर्शकों के रोंगटे खड़े कर देने वाले मोटरसाइकिल दस्ते के जांबाज जवान भी इस बार राजपथ की शान बढ़ाने के लिए मौजूद नहीं थे।

टंडन जितेन्द्र

जारी वार्ता

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

सपा अध्यक्ष को लगता है कि मुसलमान उनकी जेब में हैं: मायावती

हार-जीत से बड़ा है सक्षम बनना

24 जुलाई 2026 को चंद्रमा दिखाई देगा अन्टारेस (ज्येष्ठा नक्षत्र के योगतारा) के पास