दुश्मन के पैरों की आहट पकड़ लेंगे जूते
पवन गुप्ता
गोरखपुर- देश की सीमा में दुश्मन दबे पांव दाखिल नहीं हो सकेगा। देश की सीमा की निगरानी सैनिकों के साथ ही उनके जूते भी करेंगे। दुश्मन के पैरों की आहट सैनिकों के जूते पकड़ सकेंगे।
सैनिकों के लिए इस तरह के जूते तैयार किए हैं वाराणसी के श्याम चौरसिया ने। यह जूते मोशन सेंसर और लेजर सेंसर से लैस हैं। गोरखपुर महोत्सव की विज्ञान प्रदर्शनी में श्याम चौरसिया ने इसे प्रस्तुत किया। इसकी लागत करीब 25 हजार रुपए आयी है। जूतों में लगे सेंसर से 25 किलोमीटर के परिक्षेत्र में मौजूद किसी भी अनजान व्यक्ति की मौजूदगी का पता चल जाएगा। इस जूते को बनाने में करीब दो साल लगे। इसके लिए कुछ लोगों ने आर्थिक मदद भी की।
श्याम ने बताया कि यह जूता खास तकनीक पर काम करता है। इसके लिए निर्धारित सीमा क्षेत्र में हर दो-दो किलोमीटर पर रिसीवर सेंसर को स्थापित करना होगा। ऐसे में सेंसर और सैनिक के बीच में अगर कोई आता है तो उसका संदेश सैनिक को जूता दे देता है। यह जूता कई मायनों में खास है। वजन में यह हल्का है। इसके सेंसर 25 किलोमीटर तक काम करते हैं।उन्होंने बताया कि इस जूते में छोटी सी बंदूक भी फिट हो सकती है। जो जरूरत पड़ने पर सैनिक के आत्मरक्षा में काम आएगी। उससे गोली निकलेगी। इसका प्रयोग सफल रहा है।
उन्होंने बताया कि इसका प्रयोग सीमावर्ती क्षेत्रों में होगा। जहां पर दो देशों के बीच आवाजाही बंद हो। ऐसी जगहों पर सेंसर के बीच आने वाली सभी हरकतों की सूचना उस क्षेत्र में तैनात सैनिकों को मिल सकेगी। अब यह जूते महज दो हजार रुपए में तैयार हो सकेंगे।
उन्होंने बताया कि इस जूते को तैयार करने के बाद इसे सेना के अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। कुछ विदेशी नव-अन्वेषी खोज एजेंसियों ने भी इसमें रुचि दिखाई है। वह प्रोटोटाइप के मॉडल को देखना चाहते हैं। भविष्य में इस तकनीक का प्रयोग सैनिकों के जैकेट व अन्य चीजों में भी हो सकता है।

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