डेढ़ दशक में भी पूरी नहीं हो सकी है छितौनी-तमकुही रोड रेल परियोजना

कुशीनगर 10 जनवरी (वार्ता) उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में गंडक नदी के बाढ़ प्रभावित यूपी और बिहार के बीच बनने वाली छितौनी- तमकुही रोडशो रेल लाइन परियोजना 13 साल में भी पूरी नहीं हो सकी।
इस परियोजना से दियरा क्षेत्र के लोगों को बड़ी उम्मीदें हैं। लोग अब अगले बजट में इसके लिए धन का प्रबंध होने की आस लगाए हैं।
विगत 20 फरवरी-2007 को तत्कालीन रेलमंत्री लालू प्रसाद यादव ने यूपी व बिहार के गंडक नदी के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों को आवागमन की सुविधा व बाढ़ रोकने का स्थायी प्रबंध करने के उद्देश्य से छितौनी- तमकुही - छितौनी रेल परियोजना की आधारशिला रखी थी। 62.5 किलोमीटर लंबी रेल लाइन एक तरफ गोरखपुर-नरकटियागंज रेल मार्ग तो दूसरी तरफ कप्तानगंज-थावे रेलमार्ग से जुड़ेगी।
कुशीनगर जिले के चार ब्लॉकों खड्डा, विशुनपुरा, दुदही व सेवरही तथा बिहार प्रांत के गोपालगंज जिले के चार ब्लॉकों पिपरासी, मधुबनी भितहां, ठकरहां के हजारों लोगों के लिए यह रेल लाइन लाइफ लाइन बन सकती है। निर्माणाधीन रेल लाइन पर तमकुहीरोड व छितौनी के बीच जटहां बाजार, मधुबनी, खैरा टोला, धनहा और पिपरही में रेलवे स्टेशन का निर्माण होना है।
रेल लाइन पर दस बड़े पुल व 47 छोटे पुलों का निर्माण भी प्रस्तावित है। 35.70 लाख घनमीटर मिट्टी भराई और रेलवे ट्रैक लिंकिंग का कार्य भी होना है, लेकिन बजट के अभाव में सारा काम रुका हुआ है।
स्थानीय सांसद विजय कुमार दूबे का कहना है कि यह रेल परियोजना गंडक नदी के बाढ़ प्रभावित इलाके के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। परियोजना को पूरा कराने के लिए रेल मंत्री से मिलकर बजट उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।
सं प्रदीप
वार्ता

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