वृन्दावन में लगने वाले कुंभ मेले की तैयारी माघ मेले से बेहतर
मथुरा 17 जनवरी (वार्ता)हरिद्वार कुंभ के पूर्व मथुरा के वृन्दावन में लगनेवाले कुंभ मेले की तैयारियां प्रयागराज में चल रहे माघ मेले से भी बेहतर करनेे का प्रयास किया जा रहा है।
इस बार का वृन्दावन कुंभ पिछले तीन कुंभ से बेहतर होने की इसलिए संभावना है कि यह पहला अवसर है जब प्रदेश की बागडोर एक ऐसे मुखिया के हाथ में है जो स्वयं न केवल आध्यात्म के पर्याय हैं बल्कि सदैव इस बात के लिए प्रयत्नशील रहते हैं कि भारतीय संस्कृति के उदात्त आदशों एवं धार्मिकता से जुड़े मूल्यों का अधिकाधिक प्रस्फुटन हो।वे एक प्रकार से स्वयं इसकी मानीटरिंग कर रहे हैं। राज्य के ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा भी इसमें व्यक्तिगत रूचि ले रहे हैं तथा प्रत्येक सप्ताह कुंभ मेले में जाकर कई घंटे रूककर प्रगति का अवलोकन करते हैं। जिला प्रशासन ने भी उ0प्र0 वृज तीर्थ विकास परिषद के सीईओ नगेन्द्र प्रताप के रूप में एक ऐसे अधिकारी को मेला अधिकारी बनाया गया है जिनका अनुभव एवं विकासोन्मुखी सोच वृज तीर्थ विकास परिषद के कार्यों में स्पष्ट दिखाई पड़ती है।
वृन्दावन कुंभ को संन्त समागम कहना ठीक नही है । वास्तव में यह कुंभ बैठक या कुंभी है।इस संबंध में वृज संस्कृति के पुरोधा एवं मदनमोहन मन्दिर तथा मथुराधीश मन्दिर के ब्रजेश मुखिया ने बताया कि देव दानवों के सागर मन्थन में निकले अमृत कलश को लेकर जब गरूड़ जी उड़े तो हरिद्वार जाते समय उन्होंने कुछ समय के लिए वृन्दावन के पुरानी कालीदह पर स्थित कदम्ब के वृक्ष पर बैठकर विश्राम किया था।गरूड़ जी ने जिस प्रकार से वृन्दावन में बैठकर विश्राम किया था उसी प्रकार हरिद्वार जाने वाले अखाड़े एवं संत वृन्दावन के कुभ में विश्राम करते हैं।उन्होंने कहा कि प्राचीन काल में आवागमन के साधनों के अभाव में लोग जंगली जानवरों से बचने एवं अवांछनीय तत्वों से लुटने से बचने के लिए समूह में तीर्थाटन करने के लिए पैदल निकलते थे तथा विश्राम करते हुए अपने गंतव्य स्थान में पहुंचते थे । वृन्दावन कुंभ या कुभी हरिद्वार कुभ में जानेवाले अखाड़ों एवं संतो का विश्रामस्थल अथवा बैठक है।
मेला अधिकारी नगेन्द्र प्रताप ने बताया कि जिस प्रकार की तैयारियां इस बार के कुंभ के लिए की जा रही हैं ऐसी तैयारियां 1998 एवं 2010 के कुंभ में भी संभवतः नही की गई होंगी क्योंकि मुख्य मंत्री एवं ऊर्जा मंत्री द्वारा विशेष रूचि लेने के कारण इस बार व्यवस्थाओं को बेहतर करने में धन की कमी नही आएगी।यही नही पिछले कुंभ के 40 हेक्टेयर के विपरीत इस बार कुंभ मेला क्षेत्र बढ़ाकर 56 हेक्टयर कर दिया गया है। मेला 16 फरवरी से 28 मार्च तक चलेगा तथा पालीथीन मुक्त होगा।
उन्होंने बताया कि कुंभ मेले के इतिहास में पहली बार मेला क्षेत्र विशेषकर संतो के शिविर में गंगाजल की आपूर्ति की जाएगी।नगर निगम उच्च कोटि के शौचालय बना रहा है तथा कुंभ क्षेत्र को 24 घंटे आलोकित करने का प्रयास किया जा रहा है।यमुना के घाटों के पास फिसलन रोकने के लिए चकर्ड प्लेटे लगाई जाएंगी तथा सवा किलोमीटर से अधिक क्षेत्र की सड़क चकर्ड प्लेट की ही होगी।मेला अधिकारी के अनुसार सार्वजनिक निर्माण विभाग मेला क्षेत्र में लगभग सात किलोमीटर लम्बी सड़क बना रहा है। सामान्य लोगों के लिए विभिन्न क्षेत्रों में टेंट भी लगाए जाएंगे।
नागेन्द्र प्रताप के अनुसार मेला क्षेत्र में दो पुल बनाए जा रहे हैं जिनमें से एक पर युद्धस्तर पर काम हो रहा है।इस कुंभ को स्मरणीय बनाने के लिए विकास प्राधिकरण मेले का भव्य प्रवेश द्वार बना रहा है।मेले में नित्य सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करने के लिए संस्कृति ग्राम बनाया जा रहा है।इससे कुंभ में आने के लिए पर्यटक भी उत्साहित होंगे। कुंभ क्षेत्र में आने जाने के लिए बसों की भी व्यवस्था की जा रही है।बैरीकेटिंग, वाच टावर , बैरियर व सुरक्षा कार्य तेजी से किया जा रहा है ।अधिकांश व्यवस्थाएं 31 जनवरी तक पूरी करने के लिए प्रयास किये जा रहे हैं जिससे यदि कहीं पर कोई कमी बाद में दिखाई पड़ती है तो उसे पूरा किया जा सके।कुल मिलाकर इस बार के कुंभ में जिस प्रकार की व्यवस्थाएं की जा रही हैं उससे ऐसा लगता है कि हरिद्वार कुंभ वृन्दावन में ही आयोजित किया जा रहा है।
सं विनोद
वार्ता
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