विधानसभा चुनाव अकेले दम पर लड़ेगी बसपा : मायावती

 लखनऊ 15 जनवरी (वार्ता) बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो मायावती ने शुक्रवार को ऐलान किया कि उनकी पार्टी उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को अकेले दम पर लड़ेगी।

सुश्री मायावती ने अपने 65वें जन्मदिन के अवसर पर पत्रकारों से कहा कि कुछ ही समय के बाद उत्तर प्रदेश और उत्तराखण्ड में एक साथ विधानसभा के आम चुनाव होने वाले है, लेकिन बसपा दोनों राज्यों में बिहार की तरह और लोकसभा चुनाव की तरह भी किसी भी पार्टी के साथ किसी भी प्रकार का कोई भी चुनावी समझौता नहीं करेगी, यानी इन दोनों राज्यों में पार्टी अकेले अपने बलबूते पर ही विधानसभा की सीटों पर पूरी तैयारी और दमदारी के साथ चुनाव लड़ेगी तथा अपनी सरकार भी बनायेगी।

उन्होने कहा कि गरीब, कमजोर और उपेक्षित वर्गों के हित व कल्याण के लिए बसपा गम्भीर, संवेदनशील, ईमानदार और संघर्षरत रहती है जिसके मुताबिक चलकर ही बसपा ने उत्तर प्रदेश में चार बार अपने नेतृत्व में सरकार भी चलाई है लेकिन यह सब जातिवादी, पूँजीवादी व संकीर्ण मानसिकता रखने वाली विपक्षी पार्टियों को अच्छा नहीं लगा और फिर इन्होने यहाँ बसपा के विरूद्ध अन्दर अन्दर एक होकर एवं किस्म-किस्म के साम, दाम, दण्ड, भेद अनेको हथकण्डे इस्तेमाल करके बसपा को आगे सत्ता में आने से रोका है।

बसपा प्रमुख ने कहा कि अब तो ये विरोधी पार्टियाँ षड्यंत्र के तहत् खासकर कमजोर वर्गों में से स्वार्थी किस्म के लोगों की खरीद-फरोख्त करके और पर्दे के पीछे से उनके जरिए अनेको संगठन एवं पार्टियाँ आदि बनवाके तथा अपने फायदे के हिसाब से चुनाव में उनके उम्मीदवार उतार कर कमजोर वर्गों के लोगों का वोट बाँटने मे लगी हुई है ताकि बसपा के उम्मीदवार सफल ना हो सके।

उन्होने कहा कि ये पार्टियाँ अंग्रेजों की ’’फूट डालो व राज करो’’ की नीति की तरह ही हमेशा यहाँ कमजोर व उपेक्षित वर्गों के ऊपर राज करके इनका शोषण व उत्पीड़न आदि करती रहे लेकिन इनके इस हथकण्डे कोे भी बसपा के लोगों को कामयाब नही होने देना है बल्कि अपनी फिर से यहाँ खुद की सरकार बनाने के लिए इन्हें पूर्णरूप से आशावादी बनकर व इसके जवाब में इनको अपने कमजोर एवं उपेक्षित वर्गों के वोटो को किसी भी कीमत बँटने व बिकने नहीं देना है और इनके इन सभी हथकण्डों का मुकाबला करके इन वर्गों को पुनः यहाँ सत्ता हासिल करना है तभी खासकर गरीब, दलित, आदिवासी, पिछड़ा वर्ग, मुस्लिम व अन्य धार्मिक अल्पसंख्यक समाज के लोगों की सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति में व साथ ही किसान, मजदूर, व्यापारी एवं अन्य मेहनतकश लोगों की भी दयनीय स्थिति में काफी कुछ सुधार व बदलाव आ सकता है।
बसपा अध्यक्ष ने कहा कि इसके लिए बसपा के लोगों को पूर्ण रूप से आशावादी बनकर व खासकर 2003 के अपने खुद के अनुभवों से भी काफी कुछ प्रेरणा लेकर इन्हें पुनः यहाँ सत्ता में वापिस आना है। उन्होने कहा कि 2002 में जब प्रदेश में बसपा के नेतृत्व में बसपा और भाजपा की संयुक्त सरकार बनी थी तो तब कुछ समय के बाद, ही 2003 में जब हमें बीजेपी की शर्तों से यह लगा कि इनके साथ मिलकर लोकसभा का आमचुनाव लड़ने से हमारी पार्टी की नीतियाँ काफी कुछ गड़बड़ा (कमजोर) सकती है तो उस समय अपनी पार्टी व मूवमेन्ट के हित में लगभग 16 महीनों की चली सरकार के दौरान् ही अपने मुख्यमंत्री के पद व अपनी सरकार को खुद ही छोड़ दिया था तो तब उस समय हमारी पार्टी के लोग काफी निराश हो गये थे।
उन्होने कहा “ मैंने उनको यह समझाया कि राजनीति में कुर्सी व सत्ता बड़ी नहीं होती है बल्कि उससे बड़ी पार्टी व उसकी नीतियाँ एवं सिद्धान्त होते हैं और इस मामले में हमें अपने सन्तों, गुरुओ व महापुरुषों के संघर्षों से भी काफी कुछ सबक सीखना चाहिए तो तब फिर उस दौरान् पार्टी के लोग धीरे-धीरे अपनी निराशा को छोड़कर व आशावादी बनकर यहाँ अकेले अपने बलबूते पर अपनी सरकार बनाने के लिए पूरे जी-जान से जुट गये थे जिसके कारण फिर सन् 2007 में बसपा की अकेले अपने बलबूते पर ही खुद की सरकार बन गयी थी।”
सुश्री मायावती ने कहा कि राजनीति में कुर्सी व सत्ता के लालच में आकर अपनी पार्टी की नीतियों व सिद्धान्तों से कभी भी अलग नहीं होना है बल्कि इनको प्राथमिकता देते हुये ही आगे बढ़ना है और ना ही कभी निराश होकर इधर-उधर भटकना है बल्कि पूर्ण रूप से आशावादी बनकर सन् 2007 की तरह ही फिर से यहाँ सत्ता को प्राप्त करना है। यही इनका मेरे जन्म-दिन के लिए खास तोहफा भी होगा।
उन्होने कहा कि दिल्ली मेें किसान काफी लम्बे समय से अपनी माँगों को लेकर आन्दोलित है और उनकी माँगो को लेकर किसानों व केन्द्र सरकार के बीच में कई बार बात भी हो चुकी है, जो अभी तक नाकाम रही है, और आज भी इनकी बात होने वाली है जिसको लेकर हमारी पार्टी आज पुनः यह अनुरोध करती है, कि केन्द्र सरकार को अब इनकी सभी माँगो को मान लेना चाहिये तो यह बेहतर होगा क्योंकि किसान अपने हित व अहित को अच्छे प्रकार से समझते हैं।
इसके साथ ही, विशेष अनुरोध है कि केन्द्र की सरकार यह कोरोना वैक्सीन पूरे देश के आम लोगों को फ्री (मुफ्त) मे ही दे तो यह उचित होगा। और यदि केन्द्र की सरकार हमारे इस विशेष अनुरोध को स्वीकार नहीं करती है तो फिर ऐसी स्थिति में देश की सभी राज्य सरकारों को इन्हें यह सुविधा ‘फ्री’ में ही देनी चाहिये। यह भी हमारी पार्टी का सभी राज्य सरकारों से विशेष अनुरोध भी है।
सुश्री मायावती ने कहा कि यदि केन्द्र और यू.पी. की वर्तमान भाजपा सरकार, भी यहाँ के आम लोगों को यह सुविधा ‘फ्री’ में नहीं देते है तो फिर इस बार यहाँ बसपा की सरकार बनने पर इन्हें यह सुविधा ‘फ्री’ में ही दी जायेगी, मगर फिर भी पार्टी यही चाहती है कि केन्द्र की सरकार किसानों व वैक्सीन के मामले में अपना जरूर सकारात्मक रवैया अपनायें जिसका सभी को इन्तजार भी हैै।
प्रदीप
वार्ता

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

सपा अध्यक्ष को लगता है कि मुसलमान उनकी जेब में हैं: मायावती

हार-जीत से बड़ा है सक्षम बनना

24 जुलाई 2026 को चंद्रमा दिखाई देगा अन्टारेस (ज्येष्ठा नक्षत्र के योगतारा) के पास