तीर्थराज प्रयाग में माघ मेले का “मकर संक्राति” पर पहला स्नान गुरूवार को
प्रयागराज,13 जनवरी (वार्ता) दुनिया के सबसे बड़े आध्यात्मिक माघ मेला का “मकर संक्रांति” स्नान पर्व पर श्रद्धालु कोरोन की गाइडलाइन के बीच गुरूवार को स्नान करेंगे।
आधी अधूरी तैयारियाें के बीच पहला स्नान पर्व मकर संक्रांति 14 जनवरी को होगा। अभी तक कहीं घाट नहीं बने तो कहीं टेंट ही नहीं लगे। जो टेंट लगे भी उसमें सारी सुविधाएं नहीं मिली हैं। अभी कई संतों को जमीन का आवंटन भी बाकी है। प्रयागवाल के तीर्थ पुरोहितों को जमीन का आवंटन भी नहीं हुआ है। ऐसे में माघ मेला के दौरान श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।कोरोना संक्रमण को देखते हुए मेला क्षेत्र के अन्दर सेनेटाइजशन की व्यवस्थ अभी नजर नहीं आ रही है। मेला क्षेत्र में श्रद्धालु, साधु-संत बिना मास्क लगाए ही इधर-उधर भ्रमण करते देखे जा सकते हैं। मेला क्षेत्र में सामाजिक दूरी का भी घ्यान नहीं रहा जा रहा है। हालांकि मेला प्रशासन ने कल्पवास करने आने वाले श्रद्धालुओं से साथ में कोरोना टेस्ट निगेटिव रिपोर्ट साथ लाने का निर्देश पहले ही जारी कर दिया था।
मेला क्षेत्र का परेड ग्राउंड अभी पूरी तरह से खाली है। यहां पर दुकानें भी नहीं लगी हैं। दुकानों के लिए जमीन का आवंटन किया जाएगा। ऐसे में स्नान पर्व के दिन दुकाने सजना मुश्किल है। झूला और मीना बाजार भी अब तक नहीं लगा है। स्नान घाट के रूप में संगम नोज तो तैयार हो गया। हालांकि अन्य क्षेत्रों में जो घाट बनाए जा रहे हैं। गंगा नदी पर पांच पांटून पुल श्रद्धालुओं के आवागमन के लिए बना दिए गए,लेकिन सेक्टर चार और पांच में सड़कें पूरी तरह दुरुस्त नहीं हुई हैं।
जिलाधिकारी भानुचंद गोस्वामी ने मेला से संबधित अधिकारियों को स्नान पर्व से पहले आधे अधूरे काम को अतिरिक्त श्रमिक लगगाकर पूरा करने का निर्देश दिया था। मेले में सभी काम को पूरा करने के लिए पांच जनवरी तक का समय दिया गया था ,जिसे बाद में बढ़ाकर 10 जनवरी तक किसी भी हाल में करने के निर्देश दिये थे। बावजूद इसके अभी मेले में करीब 40 फीसदी काम बाकी पड़ा है।
मेले से संबधित अधिकारियों का कहना है कि कोरोना काल में आयोजित होने वाले माघ मेले की तैयारी इस बार देर से शुरू हुई। पूरी व्यवस्था करने में मेला प्रशासन को समय कम था। अधिकारी शीघ्र तैयारी पूरी करने का दावा कर रहे हैं।
माघ मेला में कल्पवासियों का आना 26 तथा 27 जनवरी से शुरू होगा। उनका कल्पवास 28 जनवरी से शुरू होगा। इसलिए मकर संक्रांति के स्नान पर्व पर बहुत कम कल्पवासी ही यहां आए हैं। जो कल्पवासी आए भी हैं उनको सुविधाएं नहीं मिली हैं। वह सुविधाओं के लिए मेला कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं। बिना कल्पवासी मेला सूना-सूना सा लग रहा है।
मैथिली कल्पवासियों की शिकायत है कि उनको यहां बसने के लिए सामान सही नहीं मिल रहा है। कल्पवासियों को सामान मुहैया कराने के लिए छह एजेंसियों को ठेका दिया गया है लेकिन उनके पास सामान पर्याप्त नहीं है। जो समान हैं, उसमें कुछ फटे-पुराने भी हैं। इससे कल्पवासियों में नाराजगी है।
तीर्थ पुरोहित राजेन्द्र पालीवाल ने बताया कि कुछ कल्पवासी पिछले रविवार कल्पवास करने के लिए मेला क्षेत्र में आ चुके है। तीर्थ पुरोहित मेला प्रशासन से लगातार आग्रह कर रहा था कि कल्पवासियों को बसाने का काम तीर्थ पुरोहित करते हैं लिहाजा उनको भूमि का आवंटन पहले किया जाए ,लेकिन अभी भी पूरी तरह तीर्थ पुरोहितों को भूमि का आवंटन नहीं हुआ है। भूमि का आवंटन नहीं होने से कल्पवासी कहां ठहरेंगे, लिहाजा कल्पवास करने वालो को तो समस्या पैदा होगी ।
श्री पालीवाल ने कहा कि कुछ लोग संक्रांति से कल्पवास करते हैं और अधिकांश लोग पौष पूर्णिमा से माघी पूर्णिमा तक कल्पवास करते हैं। रविवार को प्रवेश का शुभ दिन था ,इसलिए मकर संक्रंति से माघ शुक्ल की संक्राति तक कल्पवास करने वाले साधु-संत एवं मिथिला के कल्पवासी मेला क्षेत्र में पहुंचे हैं। इसमें बिहार और बंगाल के लोग भी होते हैं। बाकी लोग पौष पूर्णिमा से माघी पूर्णिमा तक कल्वास करते हैं।
श्री पालीवाल ने बताया कि अभी तक एक भी शिवर ऐसा नहीं है जहां पर मेला प्रशासन की ओर से पूरी तैयारी की गयी हो। भूमि आवंटन के बाद अब तक मेला कार्यालय में सुविधा पर्ची को लेकर मामला चल रहा है।
उन्होंने बताया कि माघ मेला में कुल छह स्नान पर्व हाेने हैं। पहला स्नान पर्व 14 जनवरी (मकर संक्रांति) दूसरा स्नान पर्व 28 जनवरी (पौष पूर्णिमा) तीसरा स्नान पर्व 11 फरवरी (मौनी अमावस्या) चौथा 16 फरवरी (बसंत पंचमी)
पांचवा स्नान पर्व 27 फरवरी (माघी पूर्णिमा) तथा छठा और अंतिम 11 मार्च (महाशिवरात्रि) को होगा।
दिनेश त्यागी
वार्ता
दिनेश त्यागी
वार्ता
माघ मेला में कल्पवासियों का आना 26 तथा 27 जनवरी से शुरू होगा। उनका कल्पवास 28 जनवरी से शुरू होगा। इसलिए मकर संक्रांति के स्नान पर्व पर बहुत कम कल्पवासी ही यहां आए हैं। जो कल्पवासी आए भी हैं उनको सुविधाएं नहीं मिली हैं। वह सुविधाओं के लिए मेला कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं। बिना कल्पवासी मेला सूना-सूना सा लग रहा है।
मैथिली कल्पवासियों की शिकायत है कि उनको यहां बसने के लिए सामान सही नहीं मिल रहा है। कल्पवासियों को सामान मुहैया कराने के लिए छह एजेंसियों को ठेका दिया गया है लेकिन उनके पास सामान पर्याप्त नहीं है। जो समान हैं, उसमें कुछ फटे-पुराने भी हैं। इससे कल्पवासियों में नाराजगी है।
तीर्थ पुरोहित राजेन्द्र पालीवाल ने बताया कि कुछ कल्पवासी पिछले रविवार कल्पवास करने के लिए मेला क्षेत्र में आ चुके है। तीर्थ पुरोहित मेला प्रशासन से लगातार आग्रह कर रहा था कि कल्पवासियों को बसाने का काम तीर्थ पुरोहित करते हैं लिहाजा उनको भूमि का आवंटन पहले किया जाए ,लेकिन अभी भी पूरी तरह तीर्थ पुरोहितों को भूमि का आवंटन नहीं हुआ है। भूमि का आवंटन नहीं होने से कल्पवासी कहां ठहरेंगे, लिहाजा कल्पवास करने वालो को तो समस्या पैदा होगी ।
श्री पालीवाल ने कहा कि कुछ लोग संक्रांति से कल्पवास करते हैं और अधिकांश लोग पौष पूर्णिमा से माघी पूर्णिमा तक कल्पवास करते हैं। रविवार को प्रवेश का शुभ दिन था ,इसलिए मकर संक्रंति से माघ शुक्ल की संक्राति तक कल्पवास करने वाले साधु-संत एवं मिथिला के कल्पवासी मेला क्षेत्र में पहुंचे हैं। इसमें बिहार और बंगाल के लोग भी होते हैं। बाकी लोग पौष पूर्णिमा से माघी पूर्णिमा तक कल्वास करते हैं।
श्री पालीवाल ने बताया कि अभी तक एक भी शिवर ऐसा नहीं है जहां पर मेला प्रशासन की ओर से पूरी तैयारी की गयी हो। भूमि आवंटन के बाद अब तक मेला कार्यालय में सुविधा पर्ची को लेकर मामला चल रहा है।
उन्होंने बताया कि माघ मेला में कुल छह स्नान पर्व हाेने हैं। पहला स्नान पर्व 14 जनवरी (मकर संक्रांति) दूसरा स्नान पर्व 28 जनवरी (पौष पूर्णिमा) तीसरा स्नान पर्व 11 फरवरी (मौनी अमावस्या) चौथा 16 फरवरी (बसंत पंचमी)
पांचवा स्नान पर्व 27 फरवरी (माघी पूर्णिमा) तथा छठा और अंतिम 11 मार्च (महाशिवरात्रि) को होगा।
दिनेश त्यागी
वार्ता
दिनेश त्यागी
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