आजादी की लड़ाई का निर्णायक मोड़ था चौरी चौरा कांड

 


गोरखपुर 02 फरवरी (वार्ता) स्वतंत्रता संग्राम में चौरी-चौरा कांड एक निर्णायक मोड़ साबित हुआ था जिसने न सिर्फ महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन को स्थगित करने पर विवश कर दिया था बल्कि इस घटना के बाद अंग्रेजी हुकूमत की उल्टी गिनती भी शुरू हो गयी थी।

चार फरवरी 1922 को घटित इतिहास की इस महत्वपूर्ण घटना के सौ वर्ष पूरे होने पर गोरखपुर प्रशासन शताब्दी वर्ष मना रहा है। गांधी जी के असहयोग आंदोलन में भाग ले रहे प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने गोली चला दी थी, जिससे कई आंदोलनकारी मारे गये थे। इससे क्रुद्ध होकर प्रदर्शनकारियों ने चार फरवरी 1922 को चौरी-चौरा थाने पर हमला करके उसे आग के हवाले कर दिया था। इससे थाने में मौजूद पुलिसकर्मियों की जल जाने से मृत्यु हो गयी थी। बाद मेें आंदोलनकारियों में से अनेक को अंग्रेज़ों ने फांसी दे दी थी।
अग्निकांड में मारे गये पुलिसकर्मियों की याद में यहां एक स्मारक बनवाया गया था, जिस पर आज़ादी के बाद भी लोग श्रद्धांजलि देने जाते रहे, लेकिन बाद में यहां उन आंदोलनकारियों की स्मृति में एक नया शहीद स्मारक बना है, जहां हर वर्ष चार फरवरी को लोग अपने श्रद्धासुमन अर्पित करने जाते हैं। रेलगाड़ी से गुज़रते समय चौरी-चौरा स्टेशन से थोड़ी दूरी पर रेलवे लाइन के दोनो ओर दोनो स्मारक दिखाई पड़ते हैं।
स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और पुलिस के दौरान झड़प से शहीद हुए लोगों की याद में चार फरवरी 2021 से चार फरवरी 2022 तक चौरी चौरा शताब्दी वर्ष मनाने के लिए गोरखपुर जिला प्रशासन ने पूरी तैयरियां कर ली है।
चौरी चौरा की लोमहर्षक घटना में शहीद आंदोलनकारियों के अलावा उम्र कैद तथा फांसी की सजा पाने वालों की तीसरी और चौथी पीढ़ी के 102 लोगों की सूची जिला प्रशासन ने तैयार कर ली है। इस सूची में और भी नाम जुड़ सकते हैं क्योंकि प्रशासन इन दिनों चौरी चौरा के शहीदों के रिकार्ड जुटाने में लगी हुयी है।
एक वर्ष तक चलने वाले इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए प्रदेश स्तर पर दो कमेटियां बनायी गयी हैं एक की अध्यक्षता मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कर रहे हैं जबकि दूसरी कमेटी की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल के निर्देशन में काम कर रही है।
गोरखपुर के जिलाधिकारी के. विजेन्द्र पान्डियन ने भी जिला स्तरीय कमेटी बनायी है और पिछले दिनों मुख्यमंत्री ने शहीद स्थल चौरी चौरा का निरीक्षण करने के बाद अधिकारियों को निर्देश दिया था कि यहां शहीदों के चित्र और उनकी पेन्टिंग बनवायी जाय तथा उनके जीवन संघर्ष के सम्बंध में शोध करके एक सोवेनियर प्रकाशित किया जाय।
आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार चौरी चौरा रेलवे स्टेशन के उच्चीकृत करने का प्रस्ताव भी भारत सरकार को भेजा गया है।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 1919 में असहयोग आन्दोलन के दौरान राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने गोरखपुर में स्थित बाले मियां के मैदान में एक जन सैलाब को सम्बोधित किया था जिसके बाद उनसे प्रभावित होकर मुंशी प्रेमचन्द अपनी लेखनी से स्वतंत्रता संग्राम सेनानी होने का प्रमाण दिया तो यहां के फिराक गोरखपुरी आईसीएस से त्याग पत्र देकर गांधी जी के नेतृत्त्व में इस आन्दोलन में कूद पडे थे। 21 जनवरी 1919 को चौरी चौरा में साप्ताहिक बाजार लगा तो थानेदार ने लोगों को प्रताड़ित करना शुरू कर दिया।
इस घटना के विरोध में पूरे क्षेत्र में लोग उग्र हो गये और चार फरवरी 1922 को चौरी चौरा थाने में आग लगा दी गयी। इस घटना में 30 पुलिस कर्मियों सहित कई लोग मारे गये और फिर अंग्रेज सरकार ने 232 लोगों के खिलाफ मुकदमे की कार्रवाई के बाद 172 लोगों को मृत्युदंड दिया मगर पन्डित मदन मोहन मालवीय और जवाहर लाल नेहरू द्वारा की गयी कानूनी पैरवी के बाद सजा पाने वालों की संख्या 38 हो गयी जिसमें 14 लोगों को आजीवन कारावास और 19 लोगों को मृत्यु दंड दिया गया।
आजादी मिलने के बाद पहली बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार के प्रयासों से इस बडी शहादत को याद करने के लिए यह आयोजन हो रहा है जिसमें पूर्वी उत्तर प्रदेश के वह सभी जिले और स्थान शामिल किये जा रहे हैं जो स्वतंत्रता संग्राम से जुडे रहे हैं।
उदय प्रदीप
वार्ता
उदय प्रदीप
जारी वार्ता

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