आदि महोत्सव में छायी है छत्तीसगढ़ की गोदना कला
नयी दिल्ली ,11 फरवरी (वार्ता) राजधानी दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय जनजाति महोत्सव में छत्तीसगढ़ के ट्राइबल आर्ट में प्रमुख गोदना कला आंगतुकों के बीच आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
ट्राइफेड ने दिल्ली के आईएनए स्थित दिल्ली हाट में राष्ट्रीय जनजाति पर्व आदि महोत्सव-2021 का आयोजन किया है। महोत्सव में छत्तीसगढ़ के बुनकरों ने प्रदेश की खास पहचान कोसा सिल्क साड़ियों की प्रदर्शनी लगायी है। प्रदर्शनी में टसर सिल्क में हैंड ब्लॉक वर्क, ट्राइबल आर्ट और एप्लिक वर्क जैसी साड़ियां उपलब्ध हैं। छत्तीसगढ़ के स्टाल पर उपलब्ध कोसा साड़ियों में उकेरी गयी गोदना कला लोगों को विशेष रूप से आकर्षित कर रही है और लोग इस कला के मुरीद भी हो रहे हैं। इसके अलावा जनजाति समुदाय की हस्तशिल्प शिल्प वस्तु, कलाकृति, चित्रकारी, परिधान और आभूषणों की प्रदर्शनी लगाई गयी है। आदि महोत्सव 15 फरवरी तक चलेगा।उल्लेखनीय है कि गोदना आदिवासियों में नारी सौंदर्य का प्रतीक है। अब इस कला को शरीर के अलावा साड़ियों और अन्य कपड़ों पर भी उकेरा जा रहा है। कपड़ों पर गोदना कला की चित्रकारी से छत्तीसगढ़ की इस पारंपरिक कला को मानो संजीवनी मिल गयी है। यहां की आदिवासी महिलाएं पारंपरिक गोदना कला का इस्तेमाल करके चादर, टेबल कवर और साड़ियां, कुर्ते डिजाइन कर रही हैं। दिल्ली हाट में भी ग्राहकों के सामने कपड़ों पर गोदना प्रिंट उकेर कर दिखाया जा रहा है।
छत्तीसगढ़ के स्टॉल पर कपड़ों पर गोदना चित्रकारी करने वाली महिला कारीगर ने बताया कि साड़ियों पर गोदना कला से चित्रकारी करना काफी मेहनत का काम होता है। इसमें कलर के रूप में नैचुरल डाई का इस्तेमाल किया जाता है। जिसे हम खुद अपने हाथों से तैयार करते हैं।
टंडन जितेन्द्र
वार्ता
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