अभिव्यक्तियों का रसमय प्रदर्शन है नृत्य और गायन कला- आनन्द शाही
पवन गुप्ता
गोरखपुर।नृत्य और गायन कला मानवीय अभिव्यक्तियों का एक रसमय प्रदर्शन है। जिसका जन्म मानव जन्म के साथ ही हो जाता है। नृत्य और गायन पत्थर के समान कठोर व दृढ़ प्रतिज्ञ मानव हृदय को मोम की तरह पिघलाने की शक्ति रखती है। यह कला मनोरंजन करने के साथ साथ धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष का साधन भी है।
उक्त बातें हियुवा के जिला प्रभारी आनन्द शाही ने आज स्वामी विवेकानन्द गुरुकुल विद्यापीठ इंटर कालेज रामपुर बुजुर्ग में आयोजित दो दिवसीय सुर संगम सांस्कृतिक प्रतियोगिता का उद्घाटन करने के बाद बतौर मुख्य अतिथि कही। उन्होंने आगे कहा कि ऐसी प्रतियोगिताओं के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में छिपी प्रतिभाएं निकल कर सामने आएंगी। ग्रामीण परिवेश में आयोजित होने वाले ऐसे कार्यक्रमों से निकलने वाले तमाम गायक और नृत्य कला के कलाकार आज पूरी दुनियां में अपनी कला का डंका बजा रहे हैं। इससे पूर्व आनन्द शाही ने कार्यक्रम के आयोजक एवं कालेज के संस्थापक सुरेन्द्र सिंह के साथ प्रतियोगिता का उद्घाटन फीता काटकर और मां सरस्वती के चित्र पर पुष्प अर्पित एवं दीप प्रज्वलित कर किया। कार्यक्रम का आगाज ज्ञान प्रकाश सिंह के सरस्वती वंदना और श्वेता विश्वकर्मा के स्वागत गीत से हुआ। इन दोनों प्रस्तुतियों पर कालेज की छात्रा साक्षी और रिशु ने नृत्य प्रस्तुत किया। प्रतियोगिता के पहले सत्र में गायन का मुकाबला हुआ जिसमें गायकों ने अपनी शानदार प्रस्तुतियों से मुकाबले को रोमांचक बना दिया। दूसरे सत्र में नृत्य प्रतियोगिता के दौरान प्रतिभागियों ने एक से बढ़कर एक प्रस्तुति देकर अपनी कला का शानदार प्रदर्शन किया। आज सम्पन्न हुए गायन और नृत्य कला में कुल 40 प्रतिभागियों ने भाग लिया। जज के रूप में मौजूद लोकगायक नरेंद्र सागर, मोहन विश्वकर्मा, प्रदीप कुमार उर्फ बब्लू वर्मा और जयदीप कुमार ने दोनों कलाओं के कलाकारों का अंकन किया। प्रतियोगिता का फाइनल कल होगा। आज के कार्यक्रम में मुख्य रूप से जैनेन्द्र जानू, राजन सिंह,योगेंद्र सिंह, सुधीर कुमार पांडेय, मुन्ना सिंह, कुसुमलता सिंह, विद्या यादव, छोटेलाल उपाध्याय, शम्भू मिश्रा और गंगासागर दुबे सहित तमाम लोग उपस्थित रहे। आयोजक ने बताया कि फाइनल में जीतने वाले प्रतिभागियों को अच्छा पुरस्कार देकर सम्मनित किया जाएगा।
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