पूर्व राज्यमंत्री अजय राय को अपनी हत्या की आशंका, राज्यपाल से हस्तक्षेप की मांग
वाराणसी, 23 मार्च (वार्ता) उत्तर प्रदेश के पूर्व राज्यमंत्री एवं पांच बार विधायक रहे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अजय राय ने पुलिस सुरक्षा हटाने पर हत्या की आशंका व्यक्त करते हुए इस मामले में योगी आदित्यनाथ सरकार पर ‘अलोकतांत्रिक एवं घृणित मानसिकता’ अपनाने का आरोप लगाते हुए राज्यपाल आनंदीबेन पटेल से तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है।
श्री राय ने आज यहां बताया कि एक बार फिर उन्होंने श्रीमती पटेल को पत्र भेजकर अपनी पुलिस सुरक्षा के मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की। उन्होंने राज्य की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार के रवैये को अलोकतांत्रिक करार दिया है तथा अपनी हत्या की आशंका व्यक्त करते हुए तत्काल काननू संगत कार्रवाई करने की उनसे मांग की है।प्रधामंत्री नरेंद्र मोदी से 2014 एवं 2019 और पूर्व केंद्रीय मंत्री मुरली मनोहर जोशी से 2009 में वाराणसी संसदीय क्षेत्र से चुनावी मुकाबला करने श्री राय का कहना है कि वह अपने बड़े भाई अवधेश राय की तीन अगस्त 1991 को हुई हत्या के मामले में चश्मदीद गवाह हैं। शहर के चेतगंज क्षेत्र में हुई हत्या के इस मामले में कुख्यात बदमाश मुख्तार अंसारी मुख्य आरोपी है। यह मुकदमा प्रयागराज (इलाहाबाद) ‘एमपी-एमएलए’ विशेष अदालत में चल रहा है, जहां उन्हें गवाही के लिए जाना पड़ता है। इस बारे में उन्होंने जिला प्रशासन से लेकर मुख्यमंत्री तक को पत्र लिखकर अवगत करा चुके हैं, बावजूद इसके उनके निवदेन पर सरकार विचार नहीं कर रही।
वर्ष 1996 से 2012 के दौरान जिले के कोलअसला एवं पिंडरा विधान सभाओं क्षेत्रों से पांच निर्वाचित हुए श्री राय ने श्रीमती पटेल को लिखे पत्र में निवेदन किया, “राज्यपाल महोदया! मेरी सुरक्षा को लेकर वर्तमान राज्य सरकार द्वारा जो रवैया अपनाया जा रहा है, वह बेहद अलोकतांत्रिक और गैर-कानूनी है। इससे स्पष्ट प्रतीत होता है कि योगी आदित्यनाथ सरकार मेरी हत्या करवाने पर आमादा है।”
पूर्व सहकारिता राज्यमंत्री श्री राय ने लिखा, “मैं अपने बड़े भाई स्व. अवधेश राय की हत्या का चश्मदीद गवाह हूँ, जिसका मुकदमा अभी भी एमपी एमएलए कोर्ट, इलाहाबाद में चल रहा है। उनकी गवाही कुख्यात अपराधी मुख़्तार अंसारी के ख़िलाफ़ है। पिछले दिनों मेरी सुरक्षा को लेकर छः फरवरी को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री माननीय योगी आदित्यनाथ को एक पत्र भी लिखा था, जिसमे मैंने अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता जाहिर की थी, पर हैरत की बात है कि उस पत्र को लेकर माननीय मुख्यमंत्री द्वारा कोई यथोचित कार्यवाही नहीं की गई, बल्कि उलट जो दस प्रतिशत व्यय पर जो मेरी सुरक्षा थी उसे भी हटा लिया गया, जोकि बेहद अफ़सोनाक और दुर्भाग्यपूर्ण है।”
उन्होंने सवालिया लहजे में आगे लिखा, “लोकतंत्र में विपक्ष का अर्थ शत्रु नहीं होता बल्कि सहयोगी हुआ करता है, पर दुर्भाग्य की बात है योगी सरकार को इसकी अहमियत ही नहीं मालूम। क्या राज्य सरकार की यह कार्यवाही यथोचित और क़ानून संगत है?”
वाराणसी जिले के कोलअसला क्षेत्र से नौ बार विधायक चुने जाने का कीर्तिमान बनाने वाले कम्यूनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (सीपीआई) के कद्दावर नेता रहे ऊदल को हराकर पहली बार उत्तर प्रदेश विधान सभा पहुंचने वाले श्री राय ने अपने पत्र में आगे लिखा, “महोदया, मेरे द्वारा बार-बार अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त की गई है, फिर भी अगर सरकार द्वारा कोई निर्णायक कार्यवाही नहीं किये जाने पर अगर मेरे साथ कोई अप्रिय घटना घटती है तो इसकी पूरी जिम्मेदारी योगी आदित्यनाथ सरकार की होगी।”
पिंडरा के पूर्व विधायक श्री राय का आरोप है कि सत्ताधारी भाजपा की गलत एवं जन विरोधी नीतियों के खिलाफ लगातार आवाज उठाने के कारण उनके साथ राजनीतिक कारणों से उनकी सुरक्षा हटायी गई है। उनका कहना है कि एक बार विधायक तथा कई साधारण लोगों को राज्य सरकार पुलिस सुरक्षा दे रहे ही है। दूसरी तरफ, पांच बार विधायक, एक बार राज्यमंत्री तथा लगभग तीन दशकों से दीन-दुखियों सेवा पर भी उनकी अनदेखी इस कदर की जा रही है कि निवेदन पत्र पर भी विचार नहीं किया जा रहा है।
बीरेंद्र त्यागी
वार्ता
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