सोलर एनर्जी का बड़ा हब बनने के लिये यूपी तैयार
लखनऊ 09 अप्रैल (वार्ता) कुछ साल पहले तक उत्तर प्रदेश की पहुंच से दूर मानी जाने वाली सोलर एनर्जी उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने नई नीति तैयार की है। सरकार ने प्रदेश में 1535 मेगावाट की परियोजना पर मुहर लगा दी है। 7500 करोड़ रुपये के खर्च से आकार ले रही इन परियोजनाओं के जरिये राज्य सरकार बिजली उत्पादन के क्षेत्र बड़ा परिवर्तन लाने की तैयारी में है।
अधिकृत सूत्रों ने शुक्रवार को बताया कि सरकार की योजना सोलर एनर्जी के जरिये प्रदेश में बिजली उत्पादन बढ़ाने के साथ ही युवाओं को इन परियोजनाओं के जरिये रोजगार से जोड़ने की है। नयी सौर ऊर्जा नीति के अन्तर्गत 1535 मेगावाट के 7500 करोड़ रूपये के प्रस्ताव स्वीकृत किए गए हैं जबकि 420 मेगावाट क्षमता की 24 सौर पावर परियोजनाएं संचालित हैं।सौर ऊर्जा उत्पादन बढ़कर 749 मेगावाट हो गया है। परियोजना को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने सौर ऊर्जा नीति में सौर ऊर्जा इकाई स्थापना पर स्टाम्प शुल्क में शत-प्रतिशत छूट दी है। 225 मेगावाट क्षमता के सोलर रूफटॉप स्थापित किए गए हैं। पंडित दीनदयाल उपाध्याय सोलर स्ट्रीट लाइट योजना के तहत ग्रामीण बाजारों में 25304 सोलर स्ट्रीट लाइट लगाई गई है। मुख्यमंत्री समग्र ग्राम्य विकास योजना में चयनित राजस्व ग्रामों में 13791 सोलर स्ट्रीट लाइट संयंत्रों की स्थापना की गई है।
प्रदेश में 18823 सोलर पम्प लगा कर किसानों को सस्ते और सुलभ सिंचाई के संसाधन उपलब्ध कराए गए हैं। सौर ऊर्जा उद्यम प्रोत्साहन नीति के अन्तर्गत 2480 करोड़ रूपये का निजी निवेश भी आमन्त्रित किया गया है। इसके साथ ही प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में 720 करोड़ रूपये की लागत की 180 मेगावाट क्षमता की सौर ऊर्जा उत्पादन इकाइयां लगाई गई हैं।
सूत्रों ने बताया कि वाणिज्यिक भवनों में ऊर्जा बचत के लिए ऊर्जा संरक्षण भवन संहिता 2018' लागू की गई है। गरीब, ग्रामीण परिवारों के घरों में एक लाख 80 हजार सोलर पावर पैक संयंत्र लगा कर उन्हें सोलर लाइट की सुविधा दी गई है । प्रदेश के प्राथमिक विद्यालयों में अब तक 3400 सोलर आर.ओ. वाटर प्लांट की स्थापना की गई है। सरकारी और गैर सरकारी क्षेत्र में सोलर एनर्जी प्लांट लगाने और प्रोत्साहन के लिए राज्य सरकार लगातार अभियान चला रही है।
प्रदीप
वार्ता
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