आयुर्वेद जगत के शिरोमणि वैद्य आत्माराम दुबे जी के निधन पर उनके संक्षिप्त जीवन परिचय सहित डॉ0 विनय प्राणाचार्य , प्रधान - आर्य समाज गोरखपुर द्वारा शोक संवेदना
विश्वदेव सर्राफ
गोरखपुर, आयुर्वेद शिरोमणि ,राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त,राज्यपाल उत्तर प्रदेश द्वारा, आयुर्वेद जगत में अप्रतिम सेवाएं देने के लिए सम्मानित कविराज (वैद्य) आत्माराम दुबे जी का निधन आज दिनांक-२0 - मई - 2021 को प्रातः दिल्ली के मेदांता हॉस्पिटल में हो गया। वे कोरोना महामारी से ग्रसित हो गए थे।वैद्य जी,एक वंश परंपरागत,आयुर्वेद चिकित्सक थे, उनके पितामह और पिता भी आयुर्वेद चिकित्सक थे ,भ्राता द्वय ,पुत्र द्वय,पौत्र सभी आययुर्वेद चिकित्सा के क्षेत्र में ख्यातिमान हैं।वे विश्व आयुर्वेद परिषद, भारतीय आयुर्वेद विकास परिषद, नेशनल इंट्रीग्रेटेड मेडिकल एसोसिएशन जैसी आयुर्वेद जगत की अनेक अग्रणी संस्थाओं में उच्च पदासीन थे। साथ ही गंगोत्री देवी शिक्षण संस्थान, तुलसी दास महा विद्यालय ,आर्य कन्या इंटर कॉलेज, गोरखपुर जैसी महत्वपूर्ण शिक्षण संस्थाओं में भी महत्वपूर्ण पदों पर थे। वे आर्य समाज गोरखपुर के भी संरक्षक सदस्य थे। इसके अतिरिक्त भी अनेकानेक सेवा संस्थानों में उनका विशेष योगदान था।
वैद्य आत्माराम जी गोरखपुर के ब्रह्मपुर स्टेट के ख्यातिमान जमींदार परिवार के सदस्य थे जिनके पूर्वज चौरी चौरा कांड के स्वतंत्रता सेनानी थे भारतीय स्वन्त्रता आंदोलन में भी इस परिवार का योगदान रहा है।
वैद्य जी काशी के विश्व विख्यात आयुर्वेद चिकित्सक पद्मश्री पंडित सत्य नारायण शास्त्री जी के प्रिय शिष्य थे तथा उनके साथ चिकित्साभ्यास भी किये थे। उन्होंने लगभग साठ वर्षों तक निरंतर अपनी चिकित्सा सेवा द्वारा गोरखपुर, उत्तर प्रदेश ही नहीं अपितु पूरे देश मे और विदेशों के भी कठिन और कष्टसाध्य रोगों से ग्रस्त रोगियों को लाभान्वित किया। इनके अभिनंदन में भिषक चिंतामणि कविराज आत्माराम दुबे , विशाल अभिनंदन ग्रंथ प्रकाशित हुआ जिसका लोकार्पण महा महिम राज्यपाल उत्तर प्रदेश ने किया तथा विशाल कार्य क्रम में इन्हें सम्मानित किया। इस ग्रंथ में मा0 प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी जी सहित अनेक राष्ट्रीय हस्तियों ने इन्हें अपनी शुभ कामनाओ से सम्मानित किया है,यह आयुर्वेद जगत का अत्यंत गौरवपूर्ण ग्रंथ है।
इस प्रकार आज वैद्य आत्माराम दुबे जी के निधन से आयुर्वेद जगत का एक युग पुरुष हम सबको अनाथ कर महा प्रयाण कर गया, परमपिता परमेश्वर उन्हें महापुरुषों की गति प्रदान करें। शोक संतप्त परिवार को इस महान कष्ट को सहन करने की शक्ति और सामर्थ्य प्रदान करे।
वेद का मंत्र कहता है-
ओ३म वायु: अनिलं अमृतमथे दम
भस्मांतम शरीरं,ओ३म कर्तोस्मर, क्लिवे स्मर,कृतं स्मर ।। ओ३म शांतिः शांतिः शांतिः ।।
अर्थात यह शरीर मरण धर्मा है।भस्मीभूत होने के पश्चात गतात्मा के कर्तृत्व और कृतित्व का स्मरण करते हुए उनके द्वारा निर्देशित सन्मार्ग पर चलना ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि है।
इन्ही शब्दों के साथ मैं डॉ0 विनय प्राणाचार्य अपने पिता तुल्य ,गुरु , अभिभावक और मार्ग निर्देशक के चरणों मे अश्रुपूरित श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कोटि कोटि वन्दन ,नमन और अभिनंदन करता हूँ।
डॉ0 विनय प्रणाचार्य ।प्रधान - आर्य समाज गोरखपुर। उ0प्र0 ।

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