बचाव ही कोरोना संक्रमण से लड़ने का प्रमुख हथियार : प्रो. मेहरा

 जौनपुर, 22 मई (वार्ता) कोरोना की घातक दूसरी लहर के मंद होने के बावजूद चिकित्सकों ने संक्रामक बीमारी के प्रति लापरवाही न बरतने की चेतावनी देते हुये कहा कि जानलेवा साबित हो रही संक्रमण की चेन को तोड़ने के लिये सबसे बड़ा हथियार बचाव के तरीके अपनाना है।

वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के आंतरिक गुणवत्ता प्रकोष्ठ की ओर से शनिवार को आयोजित वेबिनार मेंनई दिल्ली के मैक्सिलो फेशियल सर्जन डॉक्टर प्रवेश मेहरा ने कहा कि कोविड-19 से सुरक्षित रहने के लिए सबसे महत्वपूर्ण अपना बचाव है । इसके लिए मास्क लगाना, बार-बार साबुन से 20 सेकंड तक हाथ धोना और सेनीटाइजर का प्रयोग करना जरूरी है । इस बचाव से हम कोविड-19 संक्रमण को बढ़ने से रोक सकते हैं। यह संक्रमण मानव से मानव में और हवा के माध्यम से हमारे शरीर के अंदर प्रवेश करता है जिसके मुख्य द्वार नाक और मुंह है। ऐसे में मास्क और हाथों की सफाई बेहद जरूरी है ।
उन्होने कहा कि किसी संक्रमित व्यक्ति के पास जाने के बाद अगर आपको किसी तरह की परेशानी महसूस हो रही है तो आप अपने आप को आइसोलेट कर लें, क्योंकि 14 दिन के अंदर इसके वायरस निष्क्रिय हो जाएंगे। इसकी कोई सटीक दवा नहीं बनाई गई है लेकिन अन्य पैरासाइट मारने वाली और प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाली दवा का प्रयोग कर हम ठीक हो रहे हैं।
वैक्सिीन पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि इसे लगाकर हम इस बीमारी को काफी हद तक रोकने में सफल हुए हैं । वैक्सिीन को लेकर कोई भ्रम थी कि स्थिति ना पाले यह हमारे हित में है। अगर पहली डोज लेने के बाद कोई व्यक्ति को संक्रमण की चपेट में आता है तो उसे पूर्ण रूप से ठीक होने के दो से तीन महीने बाद यह दूसरी डोज लेनी चाहिए। गर्भवती महिलाओं को कोवैक्सीन का टीकाकरण लेना चाहिए । मौसम तापक्रम से कोरोना का कोई संबंध नहीं है । वैक्सीनेशन से काफी हद तक बीमारी से बचा जा सकता है। योग और प्राणायाम अपने आप को स्वस्थ रखने के और संक्रमण से बचाने के कारगर माध्यम है ।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो निर्मला एस. मौर्य ने कहा कि विज्ञान और तकनीकी दोनों साथ -साथ चले तभी हम इस महामारी से सरलता पूर्वक निपट सकते हैं और लोगों की जान और जीविका की रक्षा कर सकते हैं।
सं प्रदीप
वार्ता

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