जिला बदर अपराधी बना ग्राम प्रधान
अमरोहा, 23 मई (वार्ता) उत्तर प्रदेश में अमरोहा पुलिस की लापरवाही के चलते एक जिला बदर और गैंगस्टर गांव में रह कर चुनाव भी लड़ा और जीत कर प्रधान भी बन गया।
जीवित लड़की की हत्या के आरोप में पिता-पुत्र को लंबे अरसे तक जेल कटवाने के बाद पोल खुलने पर शर्मिंदगी झेलने वाली अमरोहा पुलिस अपने अजीबोगरीब कारनामों के लिए चर्चाओं में बनी रहती है। इसे पुलिस की नाकामी कहें या फिर कुछ और जिला बदर और गैंगस्टर आरोपी गांव में रहकर चुनाव भी लड़ा और जीतकर प्रधान भी बन गया। मामले का खुलासा होने के बाद छिछालेदारी से बचने के लिए पुलिस अधीक्षक सुनीति चार महीने के बाद सात थानों में बडा फेरबदल किया है।अमरोहा में 336 ग्राम प्रधान तथा 4,503 पंचायत सदस्यों को 25 मई को शपथ दिलाई जाएगी जिसके बाद 27 मई को ग्राम पंचायत की पहली बैठक होगी। डिडौली कोतवाली क्षेत्र के असगरीपुर गांव का भूरा गैंगस्टर एक्ट में वांछित को अपर जिलाधिकारी के आदेश पर जिला बदर किया गया था। गैंगस्टर ने साठगांठ के बूते प्रशासन की परवाह न करते हुए भूरा ने गांव में रहकर प्रधान पद का चुनाव लड़ा और वह जीत भी गया।
पुलिस अधीक्षक कार्यालय का आरोप है कि इस संबंध में डिडौली प्रभारी निरीक्षक अजय कुमार और हल्का दारोगा पप्पू जादौन ने उच्चाधिकारियों को गुमराह किए रखा। प्रभारी निरीक्षक और हल्का इंचार्ज ने भूरा के संबंध में अफसरों को जिले से बाहर होने की सूचना दी थी,जबकि वह गांव में रहकर प्रधान पद का चुनाव लड़ा और विजयी हुआ। मतदान वाले दिन उस पर मारपीट के आरोप का वीडियो भी वायरल हुआ था। पुलिस ने भूरा पर 10 हजार रुपये का इनाम भी घोषित किया गया था। इसके बाद 12 मई को उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
जिला बदर होने के बाद भी जिले में रहकर चुनाव लड़े जाने के इस मामले में डिडौली थाने के इंस्पेक्टर अजय कुमार और हल्का प्रभारी दरोगा पप्पू जादौन दोषी पाए गए हैं। पुलिस अधीक्षक ने दोनों को निलंबित कर दिया है। पुलिस अधीक्षक सुनीति के चार महिने के कार्यकाल में एकसाथ सात थानों में पहला बडा फेरबदल है।
सं प्रदीप
वार्ता
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