उच्च न्यायालय में अग्रिम जमानत की अर्जी सीधे ग्राह्य नहीं
प्रयागराज,03 जून (वार्ता) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने सीधे दाखिल अग्रिम जमानत की अर्जी को स्वीकार करने से इंकार करते हुए कहा कि जब तक अर्जी में विशेष परिस्थिति का उल्लेख न हो तब हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत की अर्जी सीधे प्रथम स्तर पर ग्राह्य नहीं है ।
अदालत ने सीधे हाईकोर्ट में दाखिल अग्रिम जमानत याचिका को खारिज करते हुए कहा कि पांच जजों की वृहदपीठ का फैसला है, कि अग्रिम जमानत अर्जी सीधे उच्च न्यायालय में दाखिल करने के लिए उन कारणों व विशेष परिस्थितियों का उल्लेख करना होगा कि याची क्यों नहीं अग्रिम जमानत की अर्जी सम्बन्धित सत्र न्यायालय में दे सका। यदि सन्तोष जनक कारणों का ज़िक्र नहीं है तो सीधे हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत की अर्जी ग्राह्य नहीं है।यह आदेश न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल ने गाजियाबाद के भोपाल व दो अन्य की तरफ से दाखिल याचिका को खारिज करते हुए पारित किया है। याचीगण के खिलाफ गाजियाबाद के थाना साहिबाबाद में भारतीय दंड संहिता की धारा 420,467,468,471,506,120 बी, 34 व 386 के तहत मुकदमा दर्ज है । इस मामले में याचिका दायर कर हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत की मांग की गई थी।
उच्च न्यायालय ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि याची गण ने कहीं भी उन विशेष परिस्थितियों का उल्लेख नहीं किया है कि वे क्यों इसके लिए सत्र न्यायालय नहीं जा सकते अथवा वह कौन सी विशेष परिस्थिति है कि हाईकोर्ट सीधे इस मामले की सुनवाई करे। अदालत ने कहा कि उसे इस प्रकार की याचिकाओं को सुनने से पहले उसकी ग्राह्यता को देखना होगा। न्यायालय ने याचिका खारिज कर याचीगण को यह छूट दी है कि वे इसके लिए सत्र न्यायालय में अर्जी दाखिल कर सकते हैं ।
सं दिनेश त्यागी
वार्ता
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