रविन्द्र जायसवाल ने कहा रजिस्ट्री विभाग में अभिवक्ताओं पर रोक नहीं
जौनपुर 03 जून (वार्ता) उत्तर प्रदेश के स्टांप , न्यायालय शुल्क एवं निबंधन विभाग के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रविंद्र जायसवाल ने आज कहा कि रजिस्ट्री विभाग में अधिवक्ताओं को रोक नहीं है , वह प्रैक्टिस कर सकते हैं, उनके सहयोग से भी रजिस्ट्री हो सकती है ।
राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रविंद्र जायसवाल गुरुवार को यूनीवार्ता प्रतिनिधि से वार्ता कर रहे थे । उन्होंने कहा कि विगत कुछ दिनों से रजिस्ट्री प्रक्रिया के संदर्भ में अधिवक्ताओं में भ्रम की स्थिति बनी हुई है । इस संदर्भ में उन्होंने स्पष्ट किया कि रजिस्ट्रेशन की धारा 32 के तहत रजिस्ट्री के लिए लेख पत्रों के प्रस्तुतीकरण की व्यवस्था है, इसमें अधिवक्ताओं के आवश्यक रूप से सम्मिलित होने की कोई बाध्यता न पहले थी और न आज है । क्रेता विक्रेता चाहे तो अपना लेख पत्र रजिस्ट्री कार्यालय में स्वयं प्रस्तुत कर लेख पत्रों की रजिस्ट्री करा सकते हैं ।उन्होंने कहा कि रजिस्ट्री प्रक्रिया में अधिवक्ताओं को सम्मिलित करना या न करना पूर्णतया क्रेता विक्रेता के विवेक पर निर्भर करता है । वर्ष 2017 में रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को संपादित करने के लिए विभागीय वेबसाइट पर लेख पत्रों के स्वसृजित प्रणाली की व्यवस्था जनसामान्य के लिए उपलब्ध कराई गई है, इसके माध्यम से क्रेता विक्रेता रजिस्ट्री के लिए लेख पत्र स्वयं तैयार कर सकते हैं । उन्होंने कहा कि ऑनलाइन व्यवस्था के तहत पक्षकार सर्किल रेट का पता लगा सकते हैं , स्टांप एवं निबंधन शुल्क का ऑनलाइन भुगतान विभिन्न माध्यमों से भी कर सकते हैं ।
उन्होंने कहा कि जन सामान्य में प्रचार प्रसार के लिए 2018 में भी विभाग द्वारा पत्र जारी किया गया था , इस संबंध में अभी कोई नया शासनादेश जारी नहीं किया गया है । उन्होंने कहा कि वर्तमान के इन प्रसंगों को देखते हुए यह लगता है कि यह भ्रम विरोधियों द्वारा अधिवक्ताओं को बरगलाने और अस्थिरता पैदा करने के लिए फैलाया जा रहा है । यह सरकार के विकास कार्यो और कोविड-19 महामारी को रोकने में सरकार के सार्थक प्रयासों में अड़चन डालने के लिए विरोधियों का असफल प्रयास मात्र है ।
उन्होंने कहा कि इससे अधिवक्ता गण वर्तमान में अपने मुख्य कार्यों से विमुख होकर धरना प्रदर्शन कर रहे हैं । रजिस्ट्री प्रक्रिया को पूर्ण कराने में अधिवक्ताओं का सहयोग पूर्व में भी मिलता आया है और मुझे आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है कि आगे भी मिलता रहेगा ।
सं विनोद
वार्ता
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें