हर आधे मिनट में हेपेटाइटिस से एक मरीज गंवाता है जान
लखनऊ 28 जुलाई (वार्ता) खामोशी के साथ दुनिया भर में गंभीर खतरे के तौर पर तेजी से उभर रही जानलेवा बीमारी हेपेटाइटिस के प्रति चिकित्सकों ने सावधानी बरतने की सलाह दी है।
विश्व हेपेटाइटिस दिवस के मौके पर पेट एवं लिवर रोग विशेषज्ञ डा प्रवीण झा ने बुधवार को यहां पत्रकारों से कहा कि लोगों को अपने लिवर सम्बंधित बीमारियो को नज़र अंदाज़ नहीं करना चाहिये क्योंकि आगे चलकर यह बीमारी हेपेटाइटिस का रूप ले सकती है जो जानलेवा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) के अनुसार विश्व में हर 30 सेकण्ड्स में हेपेटाइटिस से एक व्यक्ति की जान जाती है।रीजेंसी सुपरस्पेशलटी हॉस्पिटल के वरिष्ठ चिकित्सक ने कहा कि हेपेटाइटिस का मतलब है लिवर में सूजन, जो जिगर की कोशिकाओं को क्षतिग्रस्त कर देता है। आमतौर पर हेपेटाइटिस वायरस ए, बी, सी, डी और ई के कारण होता है। हालांकि, हेपेटाइटिस ऑटोइम्यून बीमारियों, दवाओं के अनुचित सेवन और शराब के सेवन और हानिकारक विषाक्त पदार्थों के सेवन से भी होता है। वायरल कारणों में हेपेटाइटिस ए, बी और सी सबसे आम हैं।
उन्होने कहा “ अब वो बीते जमाने की बात हो गयी जब लीवर की बीमारियां केवल शराब के सेवन से जुड़ी थीं, अब जीवनशैली में बदलाव और मोटापे की बढ़ती घटनाओं और मधुमेह जैसे रोगों के कारण हेपेटाइटिस बढ़ रहा है। हेपेटाइटिस संक्रमण के बढ़ने के साथ, इसके बारे में जागरूकता पैदा करना समय की मांग है। अधिकांश समय हेपेटाइटिस पर किसी का ध्यान नहीं जाता है जब तक कि जब तक की आपको कोई नुकसान न हो जाये। वायरल हेपेटाइटिस से पीड़ित 90 फीसद लोगों को पता नहीं होता कि उन्हें यह बीमारी है। ”
हेपेटाइटिस के लक्षणों में बुखार, थकान, भूख न लगना जी मिचलाना, उल्टी, पेट में दर्द, गहरे रंग का पेशाब, हल्के रंग का मल, जोड़ों में दर्द और पीलिया शामिल हैं। शराब का सेवन और धूम्रपान करने वाले लोगों को अल्कोहलिक हेपेटाइटिस हो सकता है जिसमें पेट में दर्द, सूजन, पेट में तरल पदार्थ, मतली या उल्टी, भूख न लगना, वजन घटना, या पीली त्वचा और आंखों का अनुभव हो सकता है। इस स्थिति में लगातार शराब पीने से अतिरिक्त स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं जिसमें सिरोसिस अथवा अत्यधिक रक्तस्राव शामिल है।
डॉ झा ने कहा कि “ मधुमेह, मोटापा के अलावा अनियमित जीवन शैली वाले लोगों को हर छह महीने में अपने जिगर की जांच करवानी चाहिये। हेपेटाइटिस ए और बी के विकास को रोकने के लिए टीकाकरण उपलब्ध हैं इसलिए लोगों को इसके लिए टीकाकरण अवश्य करवाना चाहिए। स्वच्छता रखना हेपेटाइटिस से बचने का एक महत्वपूर्ण तरीका है, कच्चा भोजन खाने से बचें। सुई, रेजर, टूथब्रश आदि किसी से शेयर न करें। क्रोनिक हेपेटाइटिस बी और सी वाले लोगों को शराब से बचने के लिए प्रोत्साहित करे क्योंकि यह जिगर की बीमारी और विफलता को तेज कर सकता है। यदि किसी को क्रोनिक हेपेटाइटिस बी या सी है, तो कोई भी नई दवा लेने से पहले अपने डॉक्टर से संपर्क करें।”
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