एसपी सिंह बघेल कभी थे मुलायम के सुरक्षा गार्ड

 इटावा, 7 जुलाई (वार्ता) मोदी मंत्रिमंडल में राज्य मंत्री के तौर पर शपथ ग्रहण करने वाले आगरा के सांसद डॉ. सत्यपाल सिंह बघेल एक जमाने में समाजवादी पार्टी (सपा) संरक्षक मुलायम सिंह यादव के सुरक्षा गार्ड रहे है ।

मुलायम ने उनकी राजनीतिक क्षमता को देखते हुए 1998 मे पहली बार ससंदीय चुनाव मे उतारा। पहली पारी मे ही उन्हे जीत का ऐसा चस्खा लगा कि उसके बाद उन्होने पीछे मुड़ कर नही देखा हालांकि बाद मे उनकी मुलायम से अनबन हो गई । राज्य मंत्री बनने पर उनके पैतृक गांव औरैया जिले के भटपुरा में खुशी का माहौल है। ग्रामीणों ने जमकर आतिशबाजी चलाई जबकि महिलाओं ने मंदिर में मंगल गीत गाये ।


मार्च 2017 मे एसपी सिंह बघेल उत्तर प्रदेश मे योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में गठित प्रदेश सरकार में पशुपालन मंत्री भी रह चुके है। 2019 के संसदीय चुनाव मे भाजपा ने उन्हे आगरा सुरक्षित सीट से चुनाव मैदान मे उतारा जहाॅ उनको जीत मिली। बघेल की इकलौती बहन पदमा बताती है कि उनके पिता रामभरोसे सिंह मध्यप्रदेश मे पुलिस विभाग मे तैनात थे। इसी वजह से हम सभी भाई बहनो की पैदाइश मध्यप्रदेश मे ही हुई है । सत्यपाल सबसे छोटे है। इनका जन्म इंदौर स्थित यशवंतराव होल्कर अस्पताल मे हुआ। पिता रामभरोसे खरगौन से रिटार्यड हुए है इसलिए प्रारंभिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा सभी मध्यप्रदेश मे ही हुई है ।

उत्तर प्रदेश पुलिस सेवा मे सबइंस्पेक्टर के तौर पर भर्ती होने के बाद सत्यपाल को पहली अहम जिम्मेदारी तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी का सुरक्षागार्ड बनने की मिली । 1989 मे मुलायम सिंह यादव के मुख्यमंत्री बनने के बाद बघेल मुलायम सिंह यादव के सुरक्षा चक्र मे शामिल हो गये लेकिन अपनी निर्भकता,मेहनत और ईमानदारी के बल पर उन्होने मुलायम सिंह यादव का भी दिल जीत लिया । सुरक्षा के साथ साथ वो अपने शैक्षिक स्तर को भी उंचा करने मे जुटे रहे । इसी बीच 1993 मे वो आगरा कालेज मे सैन्य विभाग के प्रोफेसर के तौर पर तैनात हो गये लेकिन उनके मन मे राजनैतिक गुण हिलौरे मार रहे थे ।

मुलायम सिंह यादव ने उनको जलेसर सीट से समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार के तौर पर 1998 मे पहली बार उतारा और जीत कर कामयाबी पाई उसके बाद दो दफा वो फिर सांसद चुने गये। बहन पदमा खासी खुश है कि उनके भाई को पहली बार उनकी निर्भीकता,मेहनत और ईमानदारी का असली फल मिला है ।

वर्ष 1998 में पहली बार सपा से सांसद बनने पर प्रोफेसर बघेल की राजनैतिक पारी शुरू हुई । उनका यह क्रम लगातार तीन बार 1999 और 2004 में भी चलता रहा । 2010 में बसपा ने राज्यसभा सांसद बनाया । साथ ही राष्ट्रीय महासचिव का ओहदा भी दिया गया । साल 2014 में फिरोजाबाद लोकसभा से सपा के राष्ट्रीय महासचिव प्रो. रामगोपाल यादव के बेटे अक्षय यादव के सामने चुनाव लड़े हालांकि वह यह चुनाव हार गए थे । उन्होंने जबरन चुनाव हरवाने का आरोप लगाया था । इसके बाद उन्होंने राज्यसभा से इस्तीफा देकर भाजपा की सदस्यता ली । भाजपा ने उन्हें पिछड़ा वर्ग का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया । फिरोजाबाद जिले के टूंडला सुरक्षित सीट से हुए चुनाव मे भाजपा से किस्मत अजमाई जिसमे वो विधायक बने ।

आज भी है गांव की माटी से प्रो.बधेल का जुड़ाव बना हुआ है । ग्राम भटपुरा के ग्रामीण बताते हैं कि प्रोफेसर साहब का अपनी माटी से आज भी जुड़ाव है । प्रधानी के चुनाव आज तक उन्होंने ग्राम उमरी से अपना वोट नहीं कटवाया था । जब भी पंचायत चुनाव होता है तो फिर वोट डालने जरूर आते है ।

प्रोफेसर एसपी सिंह बघेल पिछड़ा वर्ग का चेहरा हैं और उनकी इस वर्ग पर पकड़ भी है, लेकिन चुनाव वह सुरक्षित सीट टूंडला से जीते । 2014 में बसपा छोड़कर भाजपा में शामिल हुए बघेल को पार्टी ने शुरू से ही काफी महत्व दिया है। विधानसभा चुनाव आने पर आगरा और अलीगढ़ मंडल में बघेलों के साथ-साथ निषाद, लोधे और कुशवाह वोट बैंक को साधने के लिए भाजपा ने टूंडला सीट से बघेल को विधानसभा चुनाव लड़ाया । बघेल मुख्यत पिछड़ा वर्ग से आते हैं लेकिन बघेल की उपजाति गड़रिया अनुसूचित जाति में शामिल है। पिछड़ा वर्ग का चेहरा होने के बाद भी अनुसूचित जाति के उनके प्रमाणपत्र ने चुनाव में तुरुप के पत्ते का काम किया । हालांकि उनके प्रमाणपत्र पर काफी हंगामा भी हुआ, शिकायतें भी हुईं लेकिन पत्रावलियां उनके पक्ष में थी । लिहाजा बघेल सुरक्षित सीट पर चुनाव लडे़ और जीत गए।

बघेल को भाजपा ने स्टार प्रचारक बनाया गया और उन्हें जेड श्रेणी की सुरक्षा दी गई । चुनाव में बघेलों के गढ़ में चुनावी सभा कराने के लिए बघेल को पार्टी ने हेलीकाप्टर भी मुहैया कराया । फिरोजाबाद जिले की पांच सीटों के साथ-साथ आगरा की सीटों और अलीगढ़ मंडल की सीटों पर भी बघेल के प्रभाव का पार्टी ने आंकलन किया ।

सं प्रदीप

वार्ता

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