भारतीय इतिहास और संस्कृति अध्ययन हेतु भीष्म इंडिक्स की अनूठी पहल
नयी दिल्ली 26 जुलाई (वार्ता) भारतीय ज्ञान प्रणाली पर आधारित डिजिटल क्रांति ‘शोध भारत का! बातें भारत की’ के अंतर्गत कोई भी अब भारतीय ज्ञान संपदा अर्जित कर सकता है।
भीष्म इंडिक्स के संस्थापक-निर्देशक क्षितिज पाटुकलेजी ने सोमवार को बताया की प्राचीन भारतीय ज्ञानप्रणाली अब केवल समाज के विद्वानों और अभिजन-वर्ग तक ही सीमित नहीं रहेगी। इस पहल ने सभी के लिए प्राचीन भारतीय ज्ञान प्रणाली के प्रवाह खोल दिए हैं। भीष्म इंडिक्स के भारतीय ज्ञानप्रणाली शुरू किए ऑनलाइन पाठ्यक्रम आईएसीडीएससी परिषद (अमेरिका ) द्वारा मान्यता प्राप्त हैं।पुणे की संस्था भीष्म इंडिक्स ने भारतीय ज्ञानप्रणाली और भारतीय अध्ययन में ऑनलाइन पाठ्यक्रमों की घोषणा की है जो 02 अगस्त से शुरू हो रहा है। भीष्म स्कूल ऑफ इंडिक स्टडीज भीष्म इंडिक फाउंडेशन द्वारा चलाने जानेवाला एक उपक्रम है।
भीष्म इंडिक्स ने आगामी भविष्य हेतु ‘प्राचीन भारतीय ज्ञान’ को संवर्धित एवं संयोजित करने, भारत के युवाओं में जिज्ञासा पैदा करने तथा भारतीय ज्ञान प्रणाली और भारतीय अध्ययन के लिए बौद्धिक योद्धा बनाने में मदद के उद्देश से इस जन-जागरूकता अभियान की शुरुवात की है। राजीव मल्होत्रा (अमेरिका), डॉ. विजय भटकर, स्वामी गोविंददेव गिरि, डॉ. रवींद्र कुलकर्णी (न्यूयॉर्क), डॉ. मिलिंद साठे (ऑस्ट्रेलिया) जैसे वरिष्ठ गणमान्य व्यक्ति भीष्म इंडिक्स की मेंटर सूची में हैं। भीष्म संगठन पिछले चालीस वर्षों से इस क्षेत्र में काम कर रहा है
वर्तमान में सात पाठ्यक्रम अभी उपलब्ध हैं। जो क्रमशः पुराणों का अध्ययन, वेद, वेदांग और दर्शन का अध्ययन, प्राचीन भारतीय कला और वास्तुकला, उपनिषद का अध्ययन, हिंदू मंदिरों और देवताओं का अध्ययन, प्राचीन भारतीय संस्कृतियां और परंपराएं एवं भगवद् गीता का अध्ययन है अधिक जानकारी हेतु वेबसाइट एचटीअीपीएस://भीष्मइंडिक्सडॉटओआरजी के माध्यम से संपर्क किया जा सकता है।

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