एनडीए में महिलाओं की भर्ती ऐतिहासिक फैसला

नयी दिल्ली 18 अगस्त (वार्ता) सशस्त्र सेनाओं में स्थायी कमीशन के बाद अब उच्चतम न्यायालय ने राष्ट्रीय रक्षा अकादमी, एनडीए की परीक्षा में महिलाओं की उम्मीदवारी का मार्ग प्रशस्त करने संबंधी फैसला दिया है लेकिन बड़ा सवाल यह है कि इस निर्णय को अमली जामा पहनाने में वास्तव में कितना समय लगेगा।

इससे पहले खुद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले की प्राचीर से ऐलान किया था कि देश की बेटियों के लिए सभी सैनिक स्कूलों के दरवाजे खोले जा रहे हैं और वे भी सैनिक स्कूलों में पढ सकेंगी।

उच्चतम न्यायालय ने एनडीए परीक्षा में महिलाओं की उम्मीदवारी से संबंधित एक रिट याचिका की सुनवाई के दौरान बुधवार को अंतरिम आदेश में कहा कि महिलाएं भी इस परीक्षा में बैठ सकती हैं लेकिन अकादमी में उनका प्रवेश न्यायालय के अंतिम फैसले पर निर्भर करेगा। न्यायालय ने सरकार से कहा है कि वह आगामी पांच सितम्बर को होने वाली इस परीक्षा के लिए जारी अधिसूचना को संशोधन के साथ प्रकाशित करे।

हालांकि अभी रक्षा मंत्रालय तथा तीनों सेनाओं की ओर से इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आयी है लेकिन जानकारों का कहना है कि यह एक ऐतिहासिक फैसला है पर इसे जमीन पर उतारने में कुछ समय लगेगा। एक तो अब इस परीक्षा के लिए विज्ञापन में सुधार किया जायेगा। इसके अलावा सरकार को विज्ञापन से पहले महिला उम्मीदवारों के लिए विभिन्न मानदंड भी तय करने होंगे। उनकी परीक्षा से संबंधित अन्य ढांचागत जरूरतों को भी पूरा किया जायेगा।

सशस्त्र सेनाओं में महिला अधिकारियों की संख्या निरंतर बढ रही है और सेनाएं इसके लिए धीरे धीरे तैयार भी हो रही है लेकिन जानकारों का कहना है कि एनडीए का दरवाजा एकदम से महिलाओं के लिए खोलना इतना आसान नहीं होगा। इसके लिए सभी स्तर पर सुविधाओं और ढांचागत जरूरतों को पूरा करने में कुछ समय लगेगा।

रक्षा मंत्रालय ने गत फरवरी में राज्यसभा में एक सवाल के जवाब में बताया था कि देश में तीनों सेनाओं में 9118 महिला अधिकारी हैं। इसके अलावा 1500 से अधिक महिलाओं को सेना पुलिस में भर्ती करने की मंजूरी दी गयी है।

प्रतिशत के हिसाब से नौसेना में सबसे अधिक साढे छह प्रतिशत महिला अधिकारी हैं। सेना में पुरूषों की संख्या 12 लाख से अधिक है जबकि महिलाओं की संख्या 6807 है जो केवल 0.56 प्रतिशत है। वायु सेना में करीब डेढ लाख पुरूषों की तुलना में 1607 महिलाएं हैं जो एक प्रतिशत से थोडा अधिक है। जज एडवोकेट जनरल और एज्युकेशन कोर में पहले से ही स्थायी कमीशन का प्रावधान था और बाद में सरकार ने उन सभी कोर तथा सेवाओं में स्थायी कमीशन देने की घोषणा की जिनके लिए उन्हें योग्य पाया जायेगा।

इससे पहले न्यायालय ने शार्ट सर्विस कमीशन से सेनाओं में अधिकारी बनने वाली महिलाओं को स्थायी कमीशन देने का ऐतिहासिक निर्णय दिया था। इसके बाद सेना में करीब 450 महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन दिया गया था। अब सैनिक स्कूलों के दरवाजे लड़कियों के लिए खोलने की घोषणा के बाद सशस्त्र सेनाओं में महिला अधिकारियों की भर्ती में तेजी आने की पूरी-पूरी संभावना है।

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