पूर्वी उत्तर प्रदेश की कई नदियां उफान पर,अनेक गांव बाढ़ से घिरे
गोरखपुर, 02 सितम्बर (वार्ता) पूर्वी उत्तर प्रदेश के गोरखपुर मंडल एवं आस-पास के इलाके की नदियों का जलस्तर बढ़ने से कई जिलों में बाढ़ की स्थिति गंभीर हो गयी है।
केन्द्रीय जल आयोग से गुरुवार को मिली जानकारी के अनुसार राप्ती नदी गोरखपुर में बर्डघाट में खतरे के निशान से 2.23 रिपीट 2.23 मीटर उपर बह रही है जबकि वर्ष 1998 की स्थिति से 33 सेंटीमीटर नीचे है। क्षेत्र के गोरखपुर, बस्ती, सिद्धार्थनगर, देवरिया, महराजगंज और संतकबीर नगर जिले के गुजर रही नदियों में जल स्तर बढने के कारण एक बार फिर राप्ती नदी की 23 वर्ष पूर्व वर्ष 1998 जैसा तांडव मचाने की ओर बढ़ रही है।गोरखपुर के सिंचायी विभाग के अधीक्षण अभियंता दिनेश सिंह ने बताया कि राप्ती नदी का जल स्तर बढने से चिंता बढ गयी है। गोरखपुर-वाराणसी राज मार्ग पर सड़क दोनो तरफ पानी भरा हुआ है इसीलिए वाहनों को रूक-रूक कर आने-जाने का निर्देश दिया गया है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार गोरखपुर जिले में नदियों के बढते जलस्तर के साथ कई बांध खतरे की जद में आ गये हैं। कहीं रिसाव हो रहा है तो कहीं बांध दरक गये है ,नतीजन ग्रमीणों में दहशत का आलम है। गोरखपुर से पडोसी देश नेपाल को जोड़ने वाला गोरखपुर-सोनौली राजमार्ग पर स्थित चिउंटहा गांव के पास फोरलेन के एक लेन की तरफ लगभग एक फुट पानी बह रहा है, जिसके कारण आवागमन बंद कर दिया गया है।
इसके अलावा जिले के चिलुआताल में पानी भर जाने के कारण कयी गांवों के लोगों के सामने संकट खडा हो गया है। राप्ती नदी पर बने बंधों में रिसाव का सिलसला जारी है। लहसडी और एकला में प्रशासन बाढ़ को बचाने का प्रयास कर रहा है।
सूत्रों ने मुताबिक जिले के 243 गांव बाढ़ की दो लाख से अधिक जनसंख्या बाढ से प्रभावित हैं। क्षेत्र के सिद्धार्थनगर जिले में राप्ती नदी खतरे के निशान से उपर बह रही है और सैकडों गांव बाढ से प्रभावित है। ग्रामीण बंधों पर शरण लिए हुए है। संतकबीर नगर जिले में रोहिणी और गोर्रा नदी भी खतरे के निशान से 46 सेन्टीमीटर उपर बह रही है और पानी का दबाव पांच दिन से बढा हुआ है इसलिए बंधों के टूटने का खतरा बढ़ रहा है।
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