राम की अयोध्या में सुबह 1022 बजे शुरू होगी 14 कोसी परिक्रमा
अयोध्या, 11 नवंबर (वार्ता) अयोध्या में शुक्रवार को चाक चौबंद सुरक्षा व्यवस्था के बीच 14 कोसी परिक्रमा कोविड प्रोटोकाल का पालन करते हुये सम्पन्न होगी। चौबीस घंटे चलने वाली परिक्रमा 12 नवम्बर को प्रात: 1022 बजे से शुरू होगी।
जिलाधिकारी नितीश कुमार ने गुरूवार को बताया कि चौदह कोसी परिक्रमा मेले की तैयारियां पूरी कर ली गयी हैं। जिला प्रशासन की तरफ से श्रद्धालुओं से यह बार-बार अपील की जा रही है कि कोविड 19 को देखते हुए मास्क का प्रयोग जरूर करें। उन्होंने बताया कि जिले की शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों के लोग ही परिक्रमा में भाग लेते हैं जिससे कोविड-19 का सुचारू रूप से पालन कराया जाना जरूरी है। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर जिला प्रशासन सतर्क है जगह-जगह पर पुलिस बल तैनात किये गये हैं। परिक्रमा को सकुशल सम्पन्न कराने के लिये पांच जोन व 43 सेक्टरों में बांटकर निगरानी के लिये पुलिस फोर्स के साथ मजिस्ट्रेटों की तैनाती की गयी है। परिक्रमा 13 नवम्बर को सुबह 0917 बजे समाप्त होगी।मान्यताओं के मुताबिक बड़ा परिक्रमा अर्थात चौदह कोसी परिक्रमा का सीधा संबंध मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के चौदह वर्ष के वनवास से है। किवदंतियों के अनुसार भगवान श्रीराम के चौदह वर्ष के वनवास से अपने को जोड़ते हुए अयोध्यावासियों ने प्रत्येक वर्ष के लिये एक कोस परिक्रमा की होगी। इस प्रकार चौदह वर्ष के लिये चौदह कोस परिक्रमा पूरा किया, तभी से यह परम्परा बन गयी और उस परम्परा का निर्वाह करते हुए आज भी कार्तिक की अमावस्या अर्थात् दीपावली के नौवें दिन श्रद्धालु यहां आकर करीब 42 किलोमीटर अर्थात् चौदह कोस की परिक्रमा एक निर्धारित मार्ग पर अयोध्या और फैजाबाद नगर तक चौतरफा पैदल नंगे पांव चलकर अपनी-अपनी परिक्रमा पूरी करते हैं।
कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की अष्टमी को शुरू होने वाले इस परिक्रमा में ज्यादातर श्रद्धालु ग्रामीण अंचलों से आते हैं। यह एक-दो दिन पूर्व ही यहां आकर अपने परिजनों व साथियों के साथ विभिन्न मंदिरों में आकर शरण लेते हैं और परिक्रमा के एक दिन निश्चित समय पर सरयू स्नान कर अपनी परिक्रमा शुरू कर देते हैं, जो उसी स्थान पर पुन: पहुंचने पर समाप्त होती है।
परिक्रमा में ज्यादातर लोग लगातार चलकर अपनी परिक्रमा पूरा करना चाहते हैं। क्योंकि रुक जाने पर मांसपेशियों पर खिंचाव आ जाने से थकान का अनुभव जल्दी होने लगता है। यद्यपि श्रद्धालुओं में न रुकने की चाह रहती है फिर भी लम्बी दूरी की वजह से रुकना तो पड़ता है। विश्राम के लिए रुकने वालों में ज्यादातर वृद्ध या अधेड़ उम्र के लोग रहते हैं। इनके विश्राम के लिये जिला प्रशासन के अलावा तमाम स्वयंसेवी संस्थायें आगे आकर जगह-जगह विश्रामालय, नि:शुल्क प्रारंभिक चिकित्सा केन्द्र व जलपान गृहों का इंतजाम करती हैं। श्रद्धालु औसतन अपनी-अपनी परिक्रमा करीब छह-सात घंटें में पूरी कर लेते हैं।
जिलाधिकारी के मुताबिक कार्तिक पूर्णिमा मेला 18 नवंबर को पूर्वान्ह 11 बजकर 15 मिनट से सरयू स्नान शुरू होगा, जो 19 नवंबर को दोपहर एक बजे तक सम्पन्न होगी। इस अवसर पर प्रशासनिक व्यवस्थायें सुनिश्चित कराने व मेले में शांति व्यवस्था, विधि व्यवस्था तथा भीड़ नियंत्रण हेतु अधिकारी व मजिस्टे्रटों की तैनाती की गयी है। श्रद्धालु स्नान करने के बाद प्रसिद्ध हनुमानगढ़ी मंदिर, नागेश्व नाथ मंदिर, कनक भवन मंदिर के साथ ही श्रीराम जन्मभूमि पर विराजमान रामलला का दर्शन करेंगे। ऐसी जगहों पर भी प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था का कड़ा प्रबंध किये हैं।
उन्होंने बताया कि अयोध्या की सीमा में वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा।
यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने के लिये रूट डायवर्जन की व्यवस्था परिक्रमा समाप्ति तक रहेगी। गोरखपुर से अयोध्या होकर बाराबंकी या लखनऊ जाने वाले सभी प्रकार के वाहन हाईवे होकर गंतव्य को जायेंगे। उन्होंने बताया कि आवश्यकतानुसार यातायात को बस्ती बाईपास से उतरौला रोड पर मोड़ दिया जायेगा। लखनऊ से गोरखपुर जाने वाले वाहन हाईवे से होकर जायेंगे तथा आवश्यकता के अनुसार यातायात को रामनगर चौराहा बाराबंकी से गोंडा मार्ग पर डायवर्ट किया जायेगा।
उन्होंने बताया कि इसी तरह लखनऊ अयोध्या रोड से आने वाले सभी प्रकार के वाहनों को बूथ नंबर एक सहादतगंज से शहर की ओर प्रवेश पूर्णतया प्रतिबंधित रहेगा और भारी वाहनों को थाना रौनाही के सामने रोका जायेगा। उन्होंने बताया कि रायबरेली अयोध्या रोड पर आने वाले वाहनों का अग्रसेन चौराहे से शहर की ओर प्रवेश पूर्णतया प्रतिबंधित रहेगा। सुलतानपुर-अयोध्या रोड पर वाहनों का शांति चौक से अयोध्या की ओर प्रवेश पूर्णतया प्रतिबंधित रहेगा। सभी वाहन हाईवे की ओर मोड़ दिये जायेंगे। आवश्यकतानुसार भारी वाहनों को पूराकलन्दर थाने की ओर रोक दिया जायेगा।
उन्होंने बताया कि अयोध्या की सीमा में वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा।
यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने के लिये रूट डायवर्जन की व्यवस्था परिक्रमा समाप्ति तक रहेगी। गोरखपुर से अयोध्या होकर बाराबंकी या लखनऊ जाने वाले सभी प्रकार के वाहन हाईवे होकर गंतव्य को जायेंगे। उन्होंने बताया कि आवश्यकतानुसार यातायात को बस्ती बाईपास से उतरौला रोड पर मोड़ दिया जायेगा। लखनऊ से गोरखपुर जाने वाले वाहन हाईवे से होकर जायेंगे तथा आवश्यकता के अनुसार यातायात को रामनगर चौराहा बाराबंकी से गोंडा मार्ग पर डायवर्ट किया जायेगा।
उन्होंने बताया कि इसी तरह लखनऊ अयोध्या रोड से आने वाले सभी प्रकार के वाहनों को बूथ नंबर एक सहादतगंज से शहर की ओर प्रवेश पूर्णतया प्रतिबंधित रहेगा और भारी वाहनों को थाना रौनाही के सामने रोका जायेगा। उन्होंने बताया कि रायबरेली अयोध्या रोड पर आने वाले वाहनों का अग्रसेन चौराहे से शहर की ओर प्रवेश पूर्णतया प्रतिबंधित रहेगा। सुलतानपुर-अयोध्या रोड पर वाहनों का शांति चौक से अयोध्या की ओर प्रवेश पूर्णतया प्रतिबंधित रहेगा। सभी वाहन हाईवे की ओर मोड़ दिये जायेंगे। आवश्यकतानुसार भारी वाहनों को पूराकलन्दर थाने की ओर रोक दिया जायेगा।
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