सहकारी समितियां अपने नाम में अनधिकृत रूप से ‘बैंक’ शब्द न जोड़े:आरबीआई

मुंबई, 22 नवंबर (वार्ता) भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने सहकारी समितियों को अपने नाम में ‘बैंक’ शब्द नियम विरुद्ध तरीके से जोड़ने के प्रति आगाह किया है। केंद्रीय बैंक ने जनता को भी ऐसी समितियों के साथ कारोबार में सावधानी बरतने को कहा है क्योंकि ऐसी इकाइयों में जमा राशि पर सरकार की ओर से कोई गारंटी नहीं होती।

आरबीआई ने सोमवार को एक बयान में कहा कि कोई सहकारी समिति बैंकिंग विनियमन कानून 1949 के प्रावधानों या उसकी (आरबीआई) की अनुमति के बिना अपने नाम के साथ बैंक नहीं लगा सकती है।

केंद्रीय बैंक ने कहा है कि उसके सामने कुछ ऐसे मामले आए हैं जहां सहकारी समितियां बैंकिंग विनियमन कानून 1949 के प्रावधानों के खिलाफ अपने नाम में बैंक शब्द लगा रही हैं। वक्तव्य ने कहा है कि ऐसी कुछ समितियां ऐसे लोगों से जमा राशि भी प्राप्त कर रही है जो उनके सदस्य नहीं है/ या साधारण/सम्बद्ध सदस्य हैं। उनका यह कृत्य बैंकों के काम जैसा है जब कि वे बैंकिंग विनियमन कानून के अनुसार ऐसा काम करने को अधिकृत नहीं हैं।

रिजर्व बैंक ने जनता को आगाह किया है कि ऐसी समितियों को बैंकिंग कारोबार करने का लाइसेंस नहीं दिया गया है। उनके पास जमा कराई गयी रकम पर जमा बीमा एवं साख गारंटी निगम (डीआईसीजीसी) का संरक्षण नहीं मिला है।

बैंकिंग विनियमन कानून 1949 में 2020 में संशोधन कर यह प्रावधान किया गया था कि सहकारी समितियां संशोधित कानून के तहत और रिजर्व बैंक की अनुमिति के बिना अपने नाम में बैंकिंग, बैंक या बैंकर शब्द नहीं जोड़ सकतीं।

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