बच्चों को ‘ऑनलाइन गेमिंग’ के खतरों से बचाने को परामर्श जारी

नयी दिल्ली, 10 दिसंबर (वार्ता) केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की ओर से ‘ऑनलाइन गेमिंग’ के खतरों से बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए अभिभावकों और शिक्षकों के लिए परामर्श जारी किया गया है।

मंत्रालय की ओर से शुक्रवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि प्रौद्योगिकी के नए युग में, ऑनलाइन खेल बच्चों के साथ बहुत लोकप्रिय हैं। ऑनलाइन खेल की लत एक सामान्य कारक है क्योंकि बच्चे किसी भी समय कहीं भी यह खेल कंप्यूटर, मोबाइल या टेबलेट में आसानी से खेल सकते हैं।

महामारी के कारण स्कूलों के बंद होने से बच्चों द्वारा मोबाइल और इंटरनेट के उपयोग में वृद्धि हुई है। ऑनलाइन गेमिंग के कई नुकसान हैं। गेमिंग कंपनियां भावनात्मक रूप से बच्चे को एप खरीदने के लिए मजबूर करती हैं।

यही वजह है माता-पिता और शिक्षकों को सलाह देते हुए कहा गया है कि माता-पिता बच्चों को ऐप खरीदारी से बचाने के लिए आरबीआई के दिशानिर्देशों के अनुसार ओटीपी आधारित भुगतान विधियों को अपनाऐं।

अभिभावक बच्चों को अज्ञात वेबसाइटों से सॉफ़्टवेयर और एप डाउनलोड न करने की सलाह दें। उन्हें वेबसाइटों में लिंक, छवियों और ‘पॉप-अप’ पर क्लिक करने से सावधान रहने के लिए कहें क्योंकि उनमें वायरस हो सकता है और कंप्यूटर को नुकसान हो सकता है अथवा अशलील सामग्री हो सकती है।

परामर्श में कहा गया है कि अभिभावक और शिक्षक बच्चों को सलाह दें कि गेम डाउनलोड करते समय इंटरनेट पर व्यक्तिगत जानकारी न दें। उन्हें वेब कैम, निजी संदेश या ऑनलाइन चैट के माध्यम से वयस्कों और अजनबियों के साथ संवाद न करने की सलाह दें, क्योंकि इससे ऑनलाइन दुर्व्यवहार करने वालों से संपर्क का जोखिम बढ़ जाता है।

मंत्रालय ने अभिभावकों से कहा है कि ऑनलाइन खेल खेलते समय, अगर कुछ गलत हुआ है, तो तुरंत रुकें और एक स्क्रीनशॉट लें और इसकी रिपोर्ट करें।

परामर्श में कहा गया है कि बच्चों को ऑनलाइन मंच पर गोपनीयता की रक्षा करने में मदद करें, उन्हें एक स्क्रीन नाम का उपयोग करने के लिए कहें, जो उनके वास्तविक नाम को प्रकट नहीं करता हो। बच्चे द्वारा खेले जाने वाले किसी भी खेल की आयु रेटिंग की जांच करें। धमकाने के मामले में, जवाब न देने के लिए प्रोत्साहित करें और परेशान करने वाले संदेशों का रिकॉर्ड रखें और गेम साइट व्यवस्थापक को व्यवहार की रिपोर्ट करें।

हमेशा सुनिश्चित करें कि बच्चा परिवार में रखे कंप्यूटर से इंटरनेट का उपयोग करता हो। बच्चे के असामान्य और गुप्त व्यवहार, पर नज़र रखें। उनके मोबाइल फ़ोन की जांच करे।

शिक्षकों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि बच्चों को समय-समय पर इंटरनेट के पेशेवरों के ज़रिये जागरूक किया जाए।

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