ब्राह्मण समीकरण तय करेंगे गोरखपुर की नौ सीटों का भविष्य

 गोरखपुर 14 दिसंबर (वार्ता) मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह जिले गोरखपुर में ब्राह्मण समीकरणों में उलट फेर ने अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव की तस्वीर को बदल दिया है।

पूर्वी उत्तर प्रदेश के महत्वपूर्ण जिले में दो संसदीय क्षेत्र की नाै विधानसभा सीटों पर ब्राह्मणों की भूमिका हर चुनाव में महत्वपूर्ण रहती है। गोरखपुर सदर संसदीय क्षेत्र में पांच विधानसभा गोरखपुर .शहर.. गोरखपुर ग्रामीण, पिपराइच, सहजनवा, कैम्पियरगंज और बांसगांव सुरक्षित संसदीय क्षेत्र में चिल्लूपार, चारी चौरा, खजनी, बांसगांव विधानसभा आती है जबकि और बासगांव सु क्षेत्र में देवरिया जिले की रूद्रपुर विधान सभा सीट पडती है।

गोरखपुर .शहर. विधान सभा सीट से डा. राधा मोहनदास अग्रवाल पांच बार लगातार चुने गये तो गोरखपुर ग्रामीण से विपिन सिंह पहली बार और पिपराइच से महेन्द्र प्रताप सिंह चुने गये थे जबकि कैम्पियरगंज में पूर्व मंत्री फतेह बहादुर सिंह ने अपना जीत का क्रम बनाये रखा और इस बार भाजपा से जीतकर विधानसभा में पहुंचे थे। इसी तरह सहजनवा विधानसभा में छात्र राजनीति से जुडे हुए शीतल पान्डेय को पहली बार विधान सभा पहुचने का मौका मिला।

जिले की बांसगांव .सु. संसदीय क्षेत्र में पडने वाले पांच विधान सभा सीट में चिल्लूपार विधान सभा को छोडकर अन्य सभी सीटों पर भाजपा ने विजय हासिल की थी जिसमें बांसगांव से डा. विमलेश पासवान, खजनी से संत प्रसाद, चौरी चौरा से संगीता यादव और रूदपुर से जय प्रकाश निषाद ने जीत हासिल की थी जबकि एक अन्य सीट चिल्लूपार में पूर्वांचल की राजनीति अपना दमखम दिखाते रहे पूर्व मंत्री पंडित हरिशंकर तिवारी के पुत्र विनय शंकर तिवारी ने जीत हासिल की थी।

वर्ष 2017 के विधान सभा चुनाव पर नजर डाला जाय तो मोदी लहर तथा योगी के कुशल नेतृत्व की वजह से जिले में बांसगांव .सु. संसदीय क्षंत्र की एक चिल्लूपार विधान सभा सीट छोडकर सभी सीटों पर भाजपा ने विजय का झंडा लहराया था और इस बार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में गोरखपुर में हुए विकास कार्य को मुद्दा बनाकर भाजपा मैदान में उतरने वाली है तो इस क्षेत्र में निषाद वोट को अपने पक्ष में रखने के लिए संजय निषाद से समझाौता कर रखा है इसलिए धरातल पर उसकी स्थिति काफी मजबूत है।

दूसरी तरफ विपक्ष के पास कोरोना महामारी, शहर में आक्सीजन की कमी, पेट्रोल व रसोई गैस की बढी कीमतें प्रमुख हथियार होगी और सभी अपने पक्ष में माहौल बनाने के लिए प्रयत्नशील हैं। मुख्य विपक्षी समाजवादी पार्टी ने इस बीच अपना कुनबा बढाया है। ब्राह्मण वोटों पर अच्छी पकड रखने वाले पूर्व मंत्री पंडित हरिशंकर तिवारी से जुडे प्रमुख दिग्गज उनके पुत्र विधायक विनय शंकर तिवारी, पूर्व सांसद भीष्म शंकर उर्फ कुशल तिवारी ने बसपा छोडकर सपा का दामन थाम लिया है जिससे पार्टी को काफी बल मिलेगा। इसी प्रकार बसपा को झटका देते हुए विधान परिषद के पूर्व सभापति गणेश शंकर पान्डेय ने पाला बदला तो खलीलाबाद से भाजपा विधायक जय चौबे भी साइकिल पर सवार हो गये हैं।

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