ऊंट और बकरी के डिब्बाबंद दूध की बढ़ रही लोकप्रियता
नयी दिल्ली 26 दिसंबर (वार्ता) ऊंट और बकरी के दूध के चिकित्सकीय गुणों के साथ ही अन्य दूध की तुलना में अधिक कैल्सियम, प्रोटीन और पोषकतत्व होने के कारण अब देश के साथ ही विदेशों में भी भारत के डिब्बाबंद इन दूध की मांग में तेजी बढ़ने लगी है।
इन्नोवेटिव तरीके से ऊंट और बकरी के दूध का देश में पहली बार व्यापार करने वाली स्टार्टअप कंपनी आदविक फूड्स को अगले दो वर्षाें में इससे 25 करोड़ रुपये के से अधिक के कारोबाार की उम्मीद है। वर्ष 2016 में श्री हितेष राठी द्वारा स्थापति इस स्टार्टअप के सह संस्थापक श्रेय कुमार ने यहां कहा कि अभी उनकी कंपनी मासिक 20 हजार लीटर ऊंट के दूध की खरीद कर रही है। करीब चार हजार लीटर बकरी के दूध भी खरीदे जा रहे हैं।उन्होंने कहा कि वर्ष 2016 में देश में ऊंट और बकरी के दूध का कारोबार शुरू वाली उनकी एक मात्र कंपनी थी लेकिन अब कई कंपनियां इस क्षेत्र में आ चुकी है। पिछले वर्ष काेरोना के बावजूद नौ करोड़ रुपये का कारोबार करने वाली यह कंपनी अब अपने उत्पादों में विविधिता भी ला रही है और ऊंट के दूध के चॉकलेट के साथ ही अन्य उत्पाद भी पेश कर रही है।
श्री कुमार ने कहा कि उनकी कंपनी सीधे पशुपालकों से दूध खरीदती है और फिर फ्रीज ड्राइड कर उसकी पैकेजिंग करती है। इसी तरह से बकरी के दूध भी कारोबार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अमेरिका सहित दुनिया के कई देशों में ऊंट और बकरी के दूध का कारोबार होता है लेकिन फ्रीज ड्राइड दूध की गुणवत्ता में नाम मात्र की भी कमी नहीं आती है। यह प्रोसेस कुछ महंगा है लेकिन गुणवत्ता के लिये आवश्यक है।
उन्होंने दावा किया कि उनकी कंपनी पहली बार देश में फैट (वसा) के स्थान पर प्रति लीटर दूध की खरीद कर रही है। इसके कारण दूसरी कंपनियों को भी ऊंट और बकरी के दूध का लीटर के हिसाब से भुगतान करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि जब कारोबार शुरू किया था तब भारत में कोई प्रमाणित कंपनी नहीं थी जो सिर्फ इन दोनों दूध का कारोबार करती हो लेकिन अब कुछ छोटी बड़ी कई कंपनियों ने इसमें प्रवेश किया है।
उन्होंने बताया कि अभी 50 रुपये प्रति लीटर पशुपालकों को दिया जा रहा है और एक रुपया प्रति लीटर ऊंट के संरक्षण के लिए दिया जाता है क्योंकि देश में अभी मात्र 2.50 लाख ऊंट के होने का अनुमान है लेकिन इसके दूध के व्यापार को बढ़ाने के लिए इसकी संख्या में बढोतरी की भी जरूरत है।
उन्होंने कहा कि अब तक व्यक्तिगत निवेश से इस कारोबार को गति दी जा रही है लेकिन अब जिस तेजी से इसकी मांग बढ़ रही है उसके मद्देनजर निवेशकों की आवश्यकता महसूस की जा रही है और ऐसे निवेशकों की तलाश की जा रही है जो न:न सिर्फ निवेश करें बल्कि कंपनी को गति प्रदान करने में भी अपने अनुभव और विशेषज्ञता दे सके।
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