किसान दिवस पर प्राकृतिक खेती अपनाने की मोदी की किसानों से अपील

 वाराणसी, 23 दिसंबर (वार्ता) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार को किसान दिवस के अवसर पर प्राकृतिक खेती को समय की मांग बताते हुये देश के किसानों से इसे अपनाने की अपील की है।

मोदी ने अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी में बनास डेयरी संकुल और एकीकृत आयुष चिकित्सालय सहित अन्य विकास परियोजनाओं के लाेकार्पण एवं शिलान्यास समारोह को संबोधित करते हुये कहा, “धरती मां के कायाकल्प के लिए, हमारी मिट्टी की सुरक्षा के लिए, आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए, हमें एक बार फिर प्राकृतिक खेती की तरफ मुड़ना ही होगा। यही आज समय की मांग है।”


उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की जयंती के माैके पर मनाये जाने वाले किसान दिवस की देशवासियाें को बधाई देते हुये कहा कि समय के साथ प्राकृतिक खेती का दायरा सिमटता गया, उस पर केमिकल वाली खेती हावी होती गई। माेदी ने कहा कि इससे पर्यावरण और जीवजगत की सेहत के लिये पैदा हुये खतरे को देखते हुये प्रधानमंत्री ने कहा कि किसानों को अब प्राकृतिक खेती की तरफ लौटना होगा।

माेदी ने प्राकृतिक खेती में पशुधन के महत्व का उल्लेख करते हुये कहा, “हमारे यहां गाय की बात करना, गोबरधन की बात करना कुछ लोगों ने गुनाह बना दिया है। गाय कुछ लोगों के लिए गुनाह हो सकती है, लेकिन हमारे लिए गाय, माता है, पूजनीय है। गाय-भैंस का मजाक उड़ाने वाले लोग ये भूल जाते हैं कि देश के 08 करोड़ परिवारों की आजीविका ऐसे ही पशुधन से चलती है।”

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि प्राकृतिक खेती में पशुधन के महत्व को समझते हुये ही देश में डेयरी सेक्टर को मजबूत करना, सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है। इसी का नतीजा है कि देश में 6-7 साल पहले की तुलना में दूध उत्पादन लगभग 45 प्रतिशत बढ़ा है। आज भारत दुनिया का लगभग 22 प्रतिशत दूध उत्पादन करता है।

मोदी ने कहा, “मुझे खुशी है कि उप्र आज देश का सबसे अधिक दूध उत्पादक राज्य तो है ही, डेयरी सेक्टर के विस्तार में भी बहुत आगे है।” उन्होंने कहा कि इसी कड़ी में आज यहां बनास काशी संकुल का शिलान्यास किया गया है।

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