यूपी में सांप की 18 प्रजातियां जहरीली, काटने पर घबरायें नही
लखनऊ 28 जुलाई (वार्ता) मानसून के दौरान सर्प दंश की घटनाएं अक्सर बढ़ जाती हैं। ऐसे सांप के काटने पर व्यक्ति को घबड़ाना नही चाहिये। यूपी में सांप की 18 प्रजातियां ऐसी हैं, जो जहरीले होने की श्रेणी में आती हैं। जिनके काटने पर व्यक्ति की मौत हो सकती है। ऐसे में व्यक्ति को शांत रहना चाहिए। यदि पीड़ित घबरा जायेगा, तो उस पर जहर का असर तेजी के साथ होगा।डॉ राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में शनिवार को स्नेक बाइट इनकमिंग प्रिवेंशन इन यूपी कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में संस्थान के निदेशक प्रो डॉ सीएम सिंह ने बताया कि यदि किसी को सांप ने काट लिया है, तो उसे शांत रखने में मदद करें, जिससे पीड़ित घबराये नहीं। यदि पीड़ित घबरा जायेगा, तो उस पर जहर का असर तेजी के साथ होगा। जिस जगह पर सांप ने काटा है, उसको स्थिर रखें। अस्पताल ले जाते समय पीड़ित को चलायें नहीं बल्कि किसी वाहन से अस्पताल लेकर जायें। घाव को न काटें या न चूसें और न ही बांधें, इससे जहर और फैले सकता है। बर्फ या घरेलू उपचार न करें, ये बिलकुल भी प्रभावी नहीं हैं। इसके अलावा झाड़-फूंक या ओझा-तांत्रिक पर विश्वास कतई न करें, इससे समस्या बढ़ जायेगी, तुरंत चिकित्सा सहायता लें।
उन्होंने कहा कि देश में हर साल 58 हजार लोगों की सांप के काटने से मौत हो जाती है। ऐसे में सांप के काटने पर तत्काल एंटीवेनम इंजेक्शन लगवाना ही एक मात्र तरीका है, जिससे व्यक्ति की जान बचाई जा सकती है। लेकिन सांप के काटने के बाद और अस्पताल पहुंचने तक सर्पदंश के शिकार व्यक्ति और उसके परिजनों को कुछ खास बातों का ध्यान रखना चाहिए, तभी व्यक्ति की जान बचाना एक चिकित्सक के लिए संभव होगा।
कार्यशाला के दौरान डॉ. चंद्रकांत लहरिया ने बताया कि यूपी में 30 प्रकार के सांप पाये जाते हैं, जिनमें से 18 प्रकार के सांप जहरीले होते हैं। इनमें से चार सांपों कोबरा, करैत, रसेल वाइपर और सॉ स्केल्ड वाइपर के काटने पर एंटीवेनम दवा उपलब्ध है। इसी दवा से अन्य सांपों के काटने पर भी इलाज किया जाता है। डॉक्टर पीड़ित की जांच कर एंटीवेनम और अन्य दवायें देते हैं, जिससे पीड़ित की जान बचाई जाती है। उन्होंनें बताया कि सांपों की कुछ प्रजातियां ऐसेी होती है, जिसके काटने पर कोई हानि नहीं होती है, लेकिन यह व्यक्ति स्वयं तय न करें, बल्कि किसी भी प्रकार के सांप के काटने पर तत्काल अपने नजदीकी अस्पताल पहुंचे और डॉक्टर से संपर्क करें। डॉक्टर पीड़ित की जांच के बाद तय करेगा कि एंटीवेनम इंजेक्शन देना है या नहीं।

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